अकाउंट्स का संबंध पोइपेट से जोड़ा गया। यह बंतेय मेनची प्रांत का शहर है, जिसे सार्वजनिक रिपोर्टों में ऑनलाइन स्कैम कंपाउंड्स और मानव तस्करी से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में बार-बार चिन्हित किया गया है ।
ऑपरेटर पहले डेटिंग प्रोफाइल और भावनात्मक बातचीत के जरिए भरोसा कायम करते थे। इसके बाद वे क्रिप्टोकरेंसी या स्पॉट गोल्ड ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देते थे। ChatGPT का इस्तेमाल नकली स्टॉक-खरीद पुष्टिकरण और असली जैसे दिखने वाले ट्रेडिंग इंटरफेस तैयार करने में भी किया गया ।
फर्जी पहचान के पीछे छिपे ऑपरेटर पीड़ितों से लंबे समय तक रोमांटिक बातचीत करते थे। इस तरीके को अक्सर “पिग-बुचरिंग” कहा जाता है—इसमें ठग कई हफ्तों या महीनों तक भावनात्मक रिश्ता बनाकर बाद में पैसे की मांग या निवेश का प्रस्ताव रखते हैं ।
ठग खुद को ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधि बताते थे और नकली बोनस या जीत का लालच देते थे। पीड़ितों से जमा कराई गई रकम वापस नहीं मिलती थी।
ऑपरेटर खुद को पुलिस या दूसरी कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों से कहते थे कि गंभीर अपराधों के लिए जुर्माना भरना होगा। ChatGPT की मदद से नकली कानूनी नोटिस, पासपोर्ट और अन्य आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेज तैयार किए गए ।
OpenAI की रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा यह था कि ठगी करने वाले सभी लोग स्वेच्छा से इस नेटवर्क में शामिल हों, ऐसा जरूरी नहीं। कुछ गतिविधियों में मानव तस्करी और जबरन आपराधिक काम से जुड़े संकेत मिले ।
नेटवर्क ने पोइपेट में “चैटर” की नौकरियों के लिए सोशल मीडिया विज्ञापन बनाए। इनमें हवाई यात्रा, रहने की जगह, भोजन, वीजा और वर्क परमिट का वादा किया जाता था। मानव तस्करी करने वाले गिरोह अक्सर वैध रोजगार का झांसा देकर विदेशी नागरिकों को ऐसे स्कैम कंपाउंड्स तक लाते हैं ।
उपयोगकर्ताओं ने कर्मचारियों के कर्ज, वेतन से कटौती, अनुशासनात्मक जुर्माने और लोन भुगतान से जुड़ी स्प्रेडशीट संभालीं। आंतरिक संदेशों में आव्रजन स्थिति, वर्क परमिट, वीजा की अवधि खत्म होने और भर्ती प्रोत्साहनों पर भी चर्चा का अनुवाद किया गया ।
कुछ बातचीत में संभावित हिरासत, भागने की कोशिशों और उन लोगों पर आपराधिक कार्रवाई के डर का उल्लेख था जिन्हें स्कैम कंपाउंड्स में काम करने के लिए मजबूर किया गया हो सकता है ।
OpenAI ने कहा कि वह हर व्यक्ति की परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकता। हालांकि, कंपनी के अनुसार यह मामला याद दिलाता है कि ठगी करने वाले लोग खुद भी शोषण के शिकार हो सकते हैं ।
ये संकेत दक्षिण-पूर्व एशिया में संगठित अपराध समूहों पर वॉल स्ट्रीट जर्नल, Amnesty International, Reuters और Associated Press की रिपोर्टों से भी मेल खाते हैं। इन रिपोर्टों में बताया गया है कि लोगों को झूठे नौकरी प्रस्तावों से फंसाकर कर्ज, दबाव और जबरन काम की स्थिति में रखा जाता है ।
OpenAI की कार्रवाई तीन स्तरों पर हुई :
कुल वित्तीय नुकसान का अभी स्पष्ट अनुमान उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ठगों की अपनी आंतरिक बातचीत के आधार पर OpenAI ने कहा कि नेटवर्क ने अलग-अलग स्कैम के जरिए सैकड़ों लोगों से संपर्क किया हो सकता है। कुछ पीड़ितों को हजारों डॉलर का नुकसान हुआ ।
यह घटना अकेली नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानित 1,00,000 से 1,50,000 लोग—जिनमें कई विदेशी नागरिक थे—फर्जी नौकरी के प्रस्तावों के जरिए कंबोडिया लाए गए और ऐसे कंपाउंड्स में रखने के बाद ऑनलाइन ठगी के लिए मजबूर किए गए । Amnesty International की 2025 की रिपोर्ट में कंबोडिया के 50 से अधिक स्कैम कंपाउंड्स को मानव तस्करी, गुलामी और जबरन मजदूरी से जुड़े स्थल बताया गया ।
OpenAI ने इससे पहले फरवरी 2025 में भी कंबोडिया से जुड़े ChatGPT अकाउंट्स के एक समूह को बैन किया था। इन अकाउंट्स का इस्तेमाल X, Facebook, Instagram और LINE जैसे प्लेटफॉर्म्स पर रोमांस-बेटिंग नेटवर्क के लिए जापानी, चीनी और अंग्रेजी में टिप्पणियां और संदेश तैयार करने में किया जा रहा था । Meta की बाद की जांच में यह गतिविधि कंबोडिया में हाल ही में शुरू किए गए एक स्कैम कंपाउंड से जुड़ी हुई प्रतीत हुई ।
यह मामला दिखाता है कि वही भाषा मॉडल जो पढ़ाई, रचनात्मक काम और उत्पादकता में मदद कर सकते हैं, उन्हें संगठित अपराधी नेटवर्क ठगी का पैमाना बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अकाउंट बैन, खतरे से जुड़े संकेतों को साझा करना और सार्वजनिक पारदर्शिता—AI कंपनियों की प्रतिक्रिया का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकते हैं।
लेकिन केवल अकाउंट बैन से जमीन पर मौजूद स्कैम कंपाउंड या उसके पीछे का आपराधिक ढांचा खत्म नहीं होता। एक उद्योग विश्लेषण के अनुसार, OpenAI ने नेटवर्क की ऑपरेशनल सहायता वाली परत को बाधित किया है, भौतिक संगठन को नहीं । ऐसे कंपाउंड्स में फंसे लोगों की सुरक्षा, पहचान और पुनर्वास के लिए सरकारों, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिक समाज के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी होगी।