नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों ने इलेक्ट्रॉन के प्रतिपदार्थ साथी—एक अकेले पॉज़िट्रॉन—को पेनिंग ट्रैप में महीनों तक सीमित रखा और उसकी सबसे निचली क्वांटम अवस्थाओं को अलग-अलग पहचानने में सफलता पाई। इस व्यवस्था को “वन-पॉज़िट्रॉन क्वांटम साइक्लोट्रॉन” कहा गया है। इससे पॉज़िट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण पहले की शास्त्रीय साइक्लोट्रॉन विधियों से कहीं अधिक सटीकता से मापने का रास्ता खुलता है। यह मापन का नया औज़ार है, पदार्थ और प्रतिपदार्थ के बीच अंतर का प्रमाण नहीं।
3
17
पॉज़िट्रॉन को कैसे फँसाया और नियंत्रित किया गया?
पेनिंग ट्रैप विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से आवेशित कण को सीमित रखता है। इस प्रयोग में पॉज़िट्रॉन को किसी ठोस डिब्बे की दीवार से छुआकर नहीं, बल्कि चुंबकीय क्षेत्र में निलंबित रखकर फँसाया गया। शोधपत्र के मुताबिक, कण की सबसे निचली साइक्लोट्रॉन और स्पिन ऊर्जा-अवस्थाओं को तब पहचाना जा सका जब वह अलग-थलग था।
3
17
ऐसे कण को पकड़ना आसान नहीं होता। रेडियोधर्मी क्षय से निकलने वाले पॉज़िट्रॉन बहुत अधिक ऊर्जा वाले हो सकते हैं, इसलिए उन्हें पहले इतना धीमा करना पड़ता है कि ट्रैप उन्हें रोक सके।
12 प्रयोग से जुड़ी रिपोर्टों में पॉज़िट्रॉन को लगभग 300 मिलीकेल्विन तक ठंडा करने का ज़िक्र है। लेकिन उपलब्धि केवल बहुत कम तापमान तक पहुँचना नहीं है: अहम बात उसकी क्वांटम अवस्थाओं को नियंत्रित करना और एक-दूसरे से अलग पहचानना है।
10
17
फँस जाने के बाद पॉज़िट्रॉन को माइक्रोवेव की मदद से एक क्वांटम अवस्था से दूसरी में ले जाया जा सकता है। इन बदलावों को उत्तेजित और फिर मापकर शोधकर्ता उसकी ऊर्जा-संरचना का अध्ययन कर सकते हैं।
4
11 शास्त्रीय साइक्लोट्रॉन गति पर आधारित मापन के बजाय, इस तरह का क्वांटम नियंत्रण पॉज़िट्रॉन के चुंबकीय आघूर्ण की अधिक सटीक जाँच का अवसर देता है।
11
17
चुंबकीय आघूर्ण की तुलना क्यों अहम है?
किसी कण का चुंबकीय आघूर्ण बताता है कि वह चुंबकीय क्षेत्र के साथ कैसे प्रतिक्रिया करता है। पॉज़िट्रॉन का मापा गया मान इलेक्ट्रॉन के मान से तुलना करने पर एक बुनियादी सममिति की जाँच की जा सकती है। CPT सममिति के अनुसार, दोनों के चुंबकीय आघूर्ण का परिमाण बराबर और चिह्न विपरीत होना चाहिए।
11
17
नॉर्थवेस्टर्न की टीम ने इलेक्ट्रॉन के चुंबकीय आघूर्ण का मापन 0.13 पार्ट्स पर ट्रिलियन की अनिश्चितता के साथ प्रकाशित किया है।
32 समूह की शोध-संबंधी वेबसाइट का लक्ष्य है कि पॉज़िट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण पहले के मापों से 150 गुना अधिक सटीकता से मापा जाए, ताकि दोनों की तुलना और बेहतर हो सके। यह भविष्य का लक्ष्य है—नए ट्रैप से हासिल हो चुका नतीजा नहीं।
34
अगर दोहराए जा सकने वाले, पुष्ट माप में अंतर सामने आता है, तो वह इलेक्ट्रॉन और पॉज़िट्रॉन के अपेक्षित संबंध को चुनौती देगा और मापन तथा उसकी अनिश्चितताओं की बारीकी से जाँच ज़रूरी होगी। नया उपकरण अधिक संवेदनशील परीक्षण संभव बनाता है; उसने अभी ऐसा कोई अंतर नहीं दिखाया है।
11
17
नतीजा क्या है—और क्या नहीं?
शोधपत्र में एक ऐसा क्वांटम साइक्लोट्रॉन स्थापित करने का वर्णन है जिसमें एक पॉज़िट्रॉन की सबसे निचली साइक्लोट्रॉन और स्पिन अवस्थाएँ स्पष्ट रूप से मापी गईं। संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, कण को महीनों तक ट्रैप में रखा गया। ये उपलब्धियाँ आगे के सटीक मापों के लिए आधार तैयार करती हैं।
3
17
अगला वैज्ञानिक कदम इलेक्ट्रॉन और पॉज़िट्रॉन के चुंबकीय आघूर्ण की तुलना करना है। जब तक वह मापन नहीं होता और किसी संभावित अंतर की पुष्टि नहीं की जाती, तब तक कण भौतिकी के नियमों में दरार या ब्रह्मांड में पदार्थ और प्रतिपदार्थ की असमानता की व्याख्या—इस प्रयोग के निष्कर्ष नहीं, केवल संभावनाएँ हैं।