इज़राइल का दावा है कि ईरान युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यूएई का गुप्त दौरा कर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की, लेकिन यूएई ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ऐसा कोई दौरा हुआ ही नहीं। रिपोर्टों में इज़राइल‑यूएई के बीच संभावित रक्षा सहयोग—जैसे आयरन डोम, काउंटर‑ड्रोन तकनीक और संयुक्त हथियार फंड—की च...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did Netanyahu’s reported secret wartime visit to the UAE during the US-Israeli campaign against Iran lead to a diplomatic dispute after. Article summary: Netanyahu’s office said he secretly visited the UAE during the US-Israeli war with Iran and met UAE President Sheikh Mohammed bin Zayed, but the UAE publicly denied that any such visit occurred, turning what Israel frame. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Prime Minister Benjamin Netanyahu (left) leads the weekly cabinet meeting on May 17, 2026 (Screenshot/GPO); Former prime minister Naftali Bennett arrives for a meeting with support" source context "Report: Netanyahu revealed secret UAE visit to avoid being upstaged by election rival Bennett | The Times of Israel"
अमेरिका‑इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान एक असामान्य कूटनीतिक विवाद सामने आया, जब इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का गुप्त दौरा किया और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान से मुलाकात की। लेकिन अबू धाबी ने तुरंत इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई दौरा हुआ ही नहीं। इस विरोधाभास ने दोनों साझेदार देशों के बीच दुर्लभ सार्वजनिक असहमति पैदा कर दी।
इज़राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान नेतन्याहू चुपचाप यूएई गए और वहां राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की। इज़राइल ने इस बैठक को दोनों देशों के संबंधों में "ऐतिहासिक प्रगति" बताया।
इज़राइल और यूएई ने 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत आधिकारिक संबंध स्थापित किए थे। उस समझौते के बाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग धीरे‑धीरे बढ़ा है।
हालांकि इज़राइल ने शुरुआत में इस कथित यात्रा के बारे में कई महत्वपूर्ण विवरण—जैसे सही तारीख या बैठक का पूरा एजेंडा—सार्वजनिक नहीं किया।
इज़राइल के बयान के कुछ ही समय बाद यूएई सरकार ने इसे "पूरी तरह निराधार" बताते हुए सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया।
यह प्रतिक्रिया इसलिए भी उल्लेखनीय थी क्योंकि आम तौर पर इज़राइल और यूएई अपने संबंधों को कम प्रचार के साथ संभालते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, खासकर सुरक्षा मामलों में अमीरात अक्सर सार्वजनिक चर्चा से बचना पसंद करता है, विशेष रूप से तब जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ हो।
जब इज़राइल ने कथित बैठक को सार्वजनिक किया, तो यह मुद्दा अचानक खुलकर सामने आ गया और अबू धाबी को अपने क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिक्रिया देनी पड़ी।
इस विवाद का समय भी महत्वपूर्ण था। संघर्ष के दौरान यूएई खुद भी कथित तौर पर ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर रहा था, जिससे उसकी सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई थीं।
ऐसी स्थिति में इज़राइल के साथ खुले तौर पर सैन्य सहयोग स्वीकार करना यूएई के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता था। मध्य पूर्व में ईरान के साथ जटिल संबंध और क्षेत्रीय जनमत जैसे कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए संभव है कि अमीराती नेतृत्व सुरक्षा समन्वय को सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं करना चाहता था।
इस विवाद से पहले भी इज़राइल और यूएई के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग के संकेत मिल चुके थे।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान से संभावित मिसाइल या ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए इज़राइल ने यूएई की मदद हेतु आयरन डोम एयर‑डिफेंस सिस्टम और संबंधित कर्मियों को भेजा। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के बयानों और बाद की मीडिया रिपोर्टों में सामने आई।
इसके अलावा, कुछ स्रोतों के अनुसार दोनों देशों ने एक संयुक्त रक्षा फंड बनाने की योजना पर काम किया है, जिसका उद्देश्य हथियार प्रणालियों की संयुक्त खरीद और विकास करना हो सकता है। रिपोर्टों में कहा गया कि यूएई इज़राइली एयर‑डिफेंस तकनीकों के विकास में वित्तीय सहयोग भी दे सकता है।
एक अन्य क्षेत्र काउंटर‑ड्रोन तकनीक है। यूएई अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए इज़राइल की विशेषज्ञता का उपयोग करने में रुचि रखता बताया गया है।
हालांकि इन सहयोग योजनाओं के कई विवरण अभी भी अनाम अधिकारियों या अप्रत्यक्ष रिपोर्टिंग पर आधारित हैं, इसलिए उनका पूरा दायरा स्पष्ट नहीं है।
विश्लेषकों के अनुसार, इज़राइल का यह खुलासा व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इज़राइल यह दिखाना चाहता था कि उसे क्षेत्र में अरब साझेदारों का समर्थन मिल रहा है। इसलिए इस कथित यात्रा को "ऐतिहासिक प्रगति" के रूप में प्रस्तुत किया गया।
लेकिन यही कदम यूएई की सामान्य कूटनीतिक शैली से टकरा गया। अमीराती नेतृत्व अक्सर सुरक्षा सहयोग को कम प्रोफ़ाइल में रखना पसंद करता है, जबकि इज़राइल सार्वजनिक रूप से कूटनीतिक उपलब्धियों को उजागर करने की कोशिश करता है।
इस विवाद का यह अर्थ नहीं है कि इज़राइल‑यूएई संबंध कमजोर हो रहे हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना उल्टा यह दिखाती है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा हो सकता है।
दरअसल, यह मामला मध्य पूर्व की कूटनीति की एक जानी‑पहचानी वास्तविकता को उजागर करता है: क्षेत्रीय संकट के समय सुरक्षा साझेदारियाँ तेज़ी से बढ़ सकती हैं, लेकिन सरकारें इस बात पर सहमत नहीं होतीं कि उन्हें कितनी खुलकर स्वीकार किया जाए।
इस मामले में इज़राइल का सार्वजनिक दावा और यूएई का तत्काल इनकार इसी तनाव की झलक दिखाता है—जहाँ रणनीतिक सहयोग और राजनीतिक सावधानी के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
Studio Global AI
Use this topic as a starting point for a fresh source-backed answer, then compare citations before you share it.
इज़राइल का दावा है कि ईरान युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यूएई का गुप्त दौरा कर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की, लेकिन यूएई ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ऐसा कोई दौरा हुआ ही नहीं।
इज़राइल का दावा है कि ईरान युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यूएई का गुप्त दौरा कर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की, लेकिन यूएई ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ऐसा कोई दौरा हुआ ही नहीं। रिपोर्टों में इज़राइल‑यूएई के बीच संभावित रक्षा सहयोग—जैसे आयरन डोम, काउंटर‑ड्रोन तकनीक और संयुक्त हथियार फंड—की चर्चा है, हालांकि कई विवरण अभी भी अनाम सूत्रों पर आधारित हैं।
विश्लेषकों के अनुसार इज़राइल क्षेत्रीय गठबंधनों को खुलकर दिखाना चाहता है, जबकि यूएई आमतौर पर सुरक्षा सहयोग को सार्वजनिक करने से बचता है—यही अंतर विवाद का कारण बना।