MIT ने इंजीनियर्ड बैक्टीरिया से बनाए दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बोर्ड
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए। हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी। प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए।
हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी।
प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर तथा 24 प्रिंटेड कॉलोनियों वाला फुल ऐडर शामिल था; भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों में सूखे, कीटों या रोग के संकेत पहचानकर प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं।
How did MIT researchers engineer Pantoea agglomerans bacteria into living transistors and relay strains that use chemical signals to performEngineered bacterial colonies can be arranged on agar to create reconfigurable biological circuits.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did MIT researchers engineer Pantoea agglomerans bacteria into living transistors and relay strains that use chemical signals to perform. Article summary: MIT’s approach treats colonies of engineered *Pantoea agglomerans* as modular, chemical-signal-processing elements rather than trying to encode an entire complex program in every cell. The result is a reconfigurable “liv. Topic tags: general, education, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wat
openai.com
MIT शोधकर्ताओं ने इंजीनियर्ड Pantoea agglomerans बैक्टीरिया को एक तरह के जैविक सर्किट बोर्ड के हिस्सों में बदल दिया है। ये सर्किट पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड की तरह इलेक्ट्रॉन नहीं चलाते। इसके बजाय, बैक्टीरियल कॉलोनियाँ फैलने वाले रासायनिक संकेतों को पहचानती हैं, बनाती हैं और आगे भेजती हैं। इस तरह जीवित कोशिकाओं की प्रिंट की गई व्यवस्था लॉजिक और अंकगणितीय गणनाएँ कर सकती है।
इस काम की सबसे अहम बात यह है कि सर्किट को बदलने के लिए हर बार बैक्टीरिया का DNA फिर से लिखना जरूरी नहीं है। उन्हीं इंजीनियर्ड स्ट्रेन को अलग-अलग स्थानों पर प्रिंट करके नई गणना कराई जा सकती है। यानी प्रोग्राम का एक हिस्सा आनुवंशिक कोड में और दूसरा हिस्सा कॉलोनियों की भौतिक व्यवस्था में मौजूद रहता है।
बैक्टीरिया ने ट्रांजिस्टर और तारों की भूमिका कैसे निभाई?
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"MIT ने इंजीनियर्ड बैक्टीरिया से बनाए दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बोर्ड" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए। हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर तथा 24 प्रिंटेड कॉलोनियों वाला फुल ऐडर शामिल था; भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों में सूखे, कीटों या रोग के संकेत पहचानकर प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं।
MIT ने इंजीनियर्ड बैक्टीरिया से बनाए दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बोर्ड
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए। हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी। प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए।
हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी।
प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर तथा 24 प्रिंटेड कॉलोनियों वाला फुल ऐडर शामिल था; भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों में सूखे, कीटों या रोग के संकेत पहचानकर प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं।
How did MIT researchers engineer Pantoea agglomerans bacteria into living transistors and relay strains that use chemical signals to performEngineered bacterial colonies can be arranged on agar to create reconfigurable biological circuits.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did MIT researchers engineer Pantoea agglomerans bacteria into living transistors and relay strains that use chemical signals to perform. Article summary: MIT’s approach treats colonies of engineered *Pantoea agglomerans* as modular, chemical-signal-processing elements rather than trying to encode an entire complex program in every cell. The result is a reconfigurable “liv. Topic tags: general, education, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wat
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MIT शोधकर्ताओं ने इंजीनियर्ड Pantoea agglomerans बैक्टीरिया को एक तरह के जैविक सर्किट बोर्ड के हिस्सों में बदल दिया है। ये सर्किट पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड की तरह इलेक्ट्रॉन नहीं चलाते। इसके बजाय, बैक्टीरियल कॉलोनियाँ फैलने वाले रासायनिक संकेतों को पहचानती हैं, बनाती हैं और आगे भेजती हैं। इस तरह जीवित कोशिकाओं की प्रिंट की गई व्यवस्था लॉजिक और अंकगणितीय गणनाएँ कर सकती है।
इस काम की सबसे अहम बात यह है कि सर्किट को बदलने के लिए हर बार बैक्टीरिया का DNA फिर से लिखना जरूरी नहीं है। उन्हीं इंजीनियर्ड स्ट्रेन को अलग-अलग स्थानों पर प्रिंट करके नई गणना कराई जा सकती है। यानी प्रोग्राम का एक हिस्सा आनुवंशिक कोड में और दूसरा हिस्सा कॉलोनियों की भौतिक व्यवस्था में मौजूद रहता है।
बैक्टीरिया ने ट्रांजिस्टर और तारों की भूमिका कैसे निभाई?
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"MIT ने इंजीनियर्ड बैक्टीरिया से बनाए दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बोर्ड" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
MIT की टीम ने पाँच इंजीनियर्ड बैक्टीरियल स्ट्रेन से रासायनिक संकेतों पर आधारित दोबारा कॉन्फ़िगर किए जा सकने वाले जीवित सर्किट बनाए। हर काम एक ही कोशिका में भरने के बजाय, शोधकर्ताओं ने ट्रांजिस्टर जैसे और रिले स्ट्रेन की अलग अलग कॉलोनियों में गणना बाँट दी।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
प्रयोगों में OR और implication लॉजिक, 1 से 4 डिमल्टीप्लेक्सर तथा 24 प्रिंटेड कॉलोनियों वाला फुल ऐडर शामिल था; भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों में सूखे, कीटों या रोग के संकेत पहचानकर प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने छोटे अणुओं से नियंत्रित होने वाले दो ट्रांजिस्टर-जैसे बैक्टीरियल स्ट्रेन बनाए।
एक स्ट्रेन इनपुट अणु OC-6 मिलने पर सक्रिय होता है।
दूसरा स्ट्रेन OC-6 से दब जाता है।
दोनों स्ट्रेन OC-12 को भी पहचानते हैं और निर्धारित आंतरिक स्थितियाँ पूरी होने पर रासायनिक आउटपुट OHC-14 बना सकते हैं।
इसके अलावा तीन रिले स्ट्रेन तैयार किए गए। ये OHC-14 को ऐसे रासायनिक संकेतों में बदलते हैं जिन्हें आगे मौजूद ट्रांजिस्टर-कॉलोनियाँ पहचान सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में तार एक घटक से दूसरे तक सिग्नल ले जाते हैं; यहाँ रिले कॉलोनियों ने रासायनिक संदेशों को माध्यम के जरिए आगे पहुँचाकर वही काम किया।
यह व्यवस्था एक ही कोशिका में बहुत बड़ा जेनेटिक सर्किट डालने की समस्या को कम करती है। हर अतिरिक्त नियामक कार्य के लिए कोशिका को नई आणविक मशीनरी बनानी पड़ती है। बहुत से कार्य एक साथ डालने पर ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर आपस में हस्तक्षेप कर सकते हैं और प्रोटीन बनाने का बोझ कोशिका पर बढ़ जाता है। अलग-अलग कॉलोनियों को अलग-अलग काम सौंपने से हर स्ट्रेन को केवल अपना स्थानीय कार्य करना पड़ता है।
अगर DNA नहीं बदला, तो सर्किट दोबारा कैसे बना?
शोधकर्ताओं ने बैक्टीरियल कॉलोनियों को अगर पर छोटे-छोटे बिंदुओं के रूप में प्रिंट किया। पड़ोसी कॉलोनियों के बीच दूरी लगभग 5 मिलीमीटर रखी गई, ताकि रासायनिक संकेत एक कॉलोनी से दूसरी तक पहुँच सकें और आगे रिले हो सकें।
प्रयोग की प्रक्रिया में पहले सर्किट का लेआउट तय किया गया। इसके बाद अलग-अलग इंजीनियर्ड स्ट्रेन को उगाकर प्रिंटिंग के लिए तैयार किया गया और चयनित पैटर्न के अनुसार अगर पर जमा किया गया। प्रयोगात्मक प्रोटोकॉल में स्ट्रेन को चयनात्मक अगर पर उगाने और फिर उन्हें प्रिंटिंग के लिए तैयार करने के चरण बताए गए हैं।
नई गणना के लिए शोधकर्ताओं को केवल यह बदलना था कि कौन-सा स्ट्रेन किस स्थान पर प्रिंट होगा और उसके पड़ोस में कौन-सी कॉलोनी होगी। इस तरह आनुवंशिक इंजीनियरिंग तय करती है कि कोई स्ट्रेन क्या कर सकता है, जबकि प्रिंट किया गया लेआउट तय करता है कि वे क्षमताएँ आपस में कैसे जुड़ेंगी।
किन गणनाओं का प्रदर्शन किया गया?
टीम ने धीरे-धीरे अधिक जटिल जैविक लॉजिक सर्किट बनाए, जिनमें शामिल थे:
OR लॉजिक: कई इनपुट में से कोई एक सक्रिय हो तो आउटपुट मिल सकता है।
Implication-प्रकार के ऑपरेशन: इनपुट के बीच शर्त-आधारित तार्किक संबंधों को प्रोसेस करना।
1-से-4 डिमल्टीप्लेक्सर: नियंत्रण संकेतों के आधार पर एक इनपुट को चार संभावित आउटपुट में से किसी एक की ओर भेजना।
अंकगणितीय सर्किट: हाफ-ऐडर और फुल-ऐडर जैसी व्यवस्थाएँ।
फुल-ऐडर के प्रदर्शन में 24 प्रिंटेड बैक्टीरियल कॉलोनियों का इस्तेमाल हुआ। इससे यह दिखा कि गणना को एक ही, अत्यधिक बोझ वाली कोशिका में सीमित रखने के बजाय सहयोग करती हुई कई कॉलोनियों में बाँटा जा सकता है।
आठ घंटे का समय कंप्यूटरों के लिए धीमा, जीवविज्ञान के लिए उपयोगी क्यों?
इन जीवित सर्किटों को एक गणना पूरी करने में लगभग आठ घंटे लगे। सिलिकॉन आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स की तुलना में यह बेहद धीमा है, जहाँ लॉजिक ऑपरेशन आम तौर पर नैनोसेकंड या उससे भी कम समय-मान पर होते हैं। इसलिए यह तकनीक पारंपरिक कंप्यूटर प्रोसेसर की जगह लेने के लिए नहीं बनाई गई है।
इसका संभावित लाभ गति नहीं, बल्कि जैविक परिस्थितियों में स्थानीय और स्वायत्त प्रतिक्रिया है। पौधों में सूखे का तनाव, कीटों का हमला या रोग का विकास अक्सर घंटों या दिनों में होता है। ऐसे मामलों में आठ घंटे में किसी संकेत को पहचानकर जैविक प्रतिक्रिया शुरू करना उपयोगी हो सकता है।
दूसरे शब्दों में, यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग की तेज़ी के बदले जैविक वातावरण के साथ सीधे एकीकरण का विकल्प देती है।
पौधों की जड़ों और पत्तियों में संभावित इस्तेमाल
शोधकर्ताओं के अनुसार, भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों से जुड़े वातावरण में लगाए जा सकते हैं। किसी जड़ या पत्ती पर मौजूद सर्किट सूखे, कीट-हमले या रोगजनक से जुड़े संकेतों को एक साथ पढ़ सकता है और केवल सही संकेत-पैटर्न मिलने पर प्रतिक्रिया शुरू कर सकता है।
संभावित प्रतिक्रिया के तौर पर किसी फफूंदनाशक यौगिक या अन्य पौध-सुरक्षात्मक पदार्थ का उत्पादन सोचा जा सकता है। यह अभी एक शोध-दिशा है, तैयार कृषि उत्पाद नहीं। फिर भी यह उदाहरण बताता है कि रासायनिक कंप्यूटिंग धीमी होने के बावजूद उन जगहों पर उपयोगी हो सकती है जहाँ समस्या खुद जैविक गति से विकसित होती है।
सिंथेटिक बायोलॉजी के लिए इसका बड़ा बदलाव
पारंपरिक जेनेटिक-सर्किट डिजाइन का एक सवाल यह रहा है कि एक ही कोशिका में कितने कार्य भरे जा सकते हैं। MIT की व्यवस्था सवाल को बदल देती है: अलग-अलग कार्यों को कितनी कॉलोनियों में बाँटना चाहिए और उन कॉलोनियों को किस क्रम में रखना चाहिए?
इस विभाजन से एकल कोशिकाओं पर प्रोटीन-उत्पादन का बोझ कम हो सकता है। साथ ही, भौतिक लेआउट प्रोग्रामिंग की एक अतिरिक्त परत बन जाता है। विशेषीकृत हिस्सों की छोटी लाइब्रेरी से नए सर्किट तैयार करने का यह तरीका हर नई लॉजिक डिजाइन के लिए पूरी तरह नया बैक्टीरियल स्ट्रेन बनाने की जरूरत घटा सकता है।
इस शोध को आंशिक रूप से अमेरिकी Defense Advanced Research Projects Agency (DARPA) और Intelligence Advanced Research Projects Activity (IARPA) ने वित्तपोषित किया।
news.mit.edu
A programming language for living cells | MIT News
शोधकर्ताओं ने छोटे अणुओं से नियंत्रित होने वाले दो ट्रांजिस्टर-जैसे बैक्टीरियल स्ट्रेन बनाए।
एक स्ट्रेन इनपुट अणु OC-6 मिलने पर सक्रिय होता है।
दूसरा स्ट्रेन OC-6 से दब जाता है।
दोनों स्ट्रेन OC-12 को भी पहचानते हैं और निर्धारित आंतरिक स्थितियाँ पूरी होने पर रासायनिक आउटपुट OHC-14 बना सकते हैं।
इसके अलावा तीन रिले स्ट्रेन तैयार किए गए। ये OHC-14 को ऐसे रासायनिक संकेतों में बदलते हैं जिन्हें आगे मौजूद ट्रांजिस्टर-कॉलोनियाँ पहचान सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में तार एक घटक से दूसरे तक सिग्नल ले जाते हैं; यहाँ रिले कॉलोनियों ने रासायनिक संदेशों को माध्यम के जरिए आगे पहुँचाकर वही काम किया।
यह व्यवस्था एक ही कोशिका में बहुत बड़ा जेनेटिक सर्किट डालने की समस्या को कम करती है। हर अतिरिक्त नियामक कार्य के लिए कोशिका को नई आणविक मशीनरी बनानी पड़ती है। बहुत से कार्य एक साथ डालने पर ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर आपस में हस्तक्षेप कर सकते हैं और प्रोटीन बनाने का बोझ कोशिका पर बढ़ जाता है। अलग-अलग कॉलोनियों को अलग-अलग काम सौंपने से हर स्ट्रेन को केवल अपना स्थानीय कार्य करना पड़ता है।
अगर DNA नहीं बदला, तो सर्किट दोबारा कैसे बना?
शोधकर्ताओं ने बैक्टीरियल कॉलोनियों को अगर पर छोटे-छोटे बिंदुओं के रूप में प्रिंट किया। पड़ोसी कॉलोनियों के बीच दूरी लगभग 5 मिलीमीटर रखी गई, ताकि रासायनिक संकेत एक कॉलोनी से दूसरी तक पहुँच सकें और आगे रिले हो सकें।
प्रयोग की प्रक्रिया में पहले सर्किट का लेआउट तय किया गया। इसके बाद अलग-अलग इंजीनियर्ड स्ट्रेन को उगाकर प्रिंटिंग के लिए तैयार किया गया और चयनित पैटर्न के अनुसार अगर पर जमा किया गया। प्रयोगात्मक प्रोटोकॉल में स्ट्रेन को चयनात्मक अगर पर उगाने और फिर उन्हें प्रिंटिंग के लिए तैयार करने के चरण बताए गए हैं।
नई गणना के लिए शोधकर्ताओं को केवल यह बदलना था कि कौन-सा स्ट्रेन किस स्थान पर प्रिंट होगा और उसके पड़ोस में कौन-सी कॉलोनी होगी। इस तरह आनुवंशिक इंजीनियरिंग तय करती है कि कोई स्ट्रेन क्या कर सकता है, जबकि प्रिंट किया गया लेआउट तय करता है कि वे क्षमताएँ आपस में कैसे जुड़ेंगी।
किन गणनाओं का प्रदर्शन किया गया?
टीम ने धीरे-धीरे अधिक जटिल जैविक लॉजिक सर्किट बनाए, जिनमें शामिल थे:
OR लॉजिक: कई इनपुट में से कोई एक सक्रिय हो तो आउटपुट मिल सकता है।
Implication-प्रकार के ऑपरेशन: इनपुट के बीच शर्त-आधारित तार्किक संबंधों को प्रोसेस करना।
1-से-4 डिमल्टीप्लेक्सर: नियंत्रण संकेतों के आधार पर एक इनपुट को चार संभावित आउटपुट में से किसी एक की ओर भेजना।
अंकगणितीय सर्किट: हाफ-ऐडर और फुल-ऐडर जैसी व्यवस्थाएँ।
फुल-ऐडर के प्रदर्शन में 24 प्रिंटेड बैक्टीरियल कॉलोनियों का इस्तेमाल हुआ। इससे यह दिखा कि गणना को एक ही, अत्यधिक बोझ वाली कोशिका में सीमित रखने के बजाय सहयोग करती हुई कई कॉलोनियों में बाँटा जा सकता है।
आठ घंटे का समय कंप्यूटरों के लिए धीमा, जीवविज्ञान के लिए उपयोगी क्यों?
इन जीवित सर्किटों को एक गणना पूरी करने में लगभग आठ घंटे लगे। सिलिकॉन आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स की तुलना में यह बेहद धीमा है, जहाँ लॉजिक ऑपरेशन आम तौर पर नैनोसेकंड या उससे भी कम समय-मान पर होते हैं। इसलिए यह तकनीक पारंपरिक कंप्यूटर प्रोसेसर की जगह लेने के लिए नहीं बनाई गई है।
इसका संभावित लाभ गति नहीं, बल्कि जैविक परिस्थितियों में स्थानीय और स्वायत्त प्रतिक्रिया है। पौधों में सूखे का तनाव, कीटों का हमला या रोग का विकास अक्सर घंटों या दिनों में होता है। ऐसे मामलों में आठ घंटे में किसी संकेत को पहचानकर जैविक प्रतिक्रिया शुरू करना उपयोगी हो सकता है।
दूसरे शब्दों में, यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग की तेज़ी के बदले जैविक वातावरण के साथ सीधे एकीकरण का विकल्प देती है।
पौधों की जड़ों और पत्तियों में संभावित इस्तेमाल
शोधकर्ताओं के अनुसार, भविष्य में ऐसे सर्किट पौधों से जुड़े वातावरण में लगाए जा सकते हैं। किसी जड़ या पत्ती पर मौजूद सर्किट सूखे, कीट-हमले या रोगजनक से जुड़े संकेतों को एक साथ पढ़ सकता है और केवल सही संकेत-पैटर्न मिलने पर प्रतिक्रिया शुरू कर सकता है।
संभावित प्रतिक्रिया के तौर पर किसी फफूंदनाशक यौगिक या अन्य पौध-सुरक्षात्मक पदार्थ का उत्पादन सोचा जा सकता है। यह अभी एक शोध-दिशा है, तैयार कृषि उत्पाद नहीं। फिर भी यह उदाहरण बताता है कि रासायनिक कंप्यूटिंग धीमी होने के बावजूद उन जगहों पर उपयोगी हो सकती है जहाँ समस्या खुद जैविक गति से विकसित होती है।
सिंथेटिक बायोलॉजी के लिए इसका बड़ा बदलाव
पारंपरिक जेनेटिक-सर्किट डिजाइन का एक सवाल यह रहा है कि एक ही कोशिका में कितने कार्य भरे जा सकते हैं। MIT की व्यवस्था सवाल को बदल देती है: अलग-अलग कार्यों को कितनी कॉलोनियों में बाँटना चाहिए और उन कॉलोनियों को किस क्रम में रखना चाहिए?
इस विभाजन से एकल कोशिकाओं पर प्रोटीन-उत्पादन का बोझ कम हो सकता है। साथ ही, भौतिक लेआउट प्रोग्रामिंग की एक अतिरिक्त परत बन जाता है। विशेषीकृत हिस्सों की छोटी लाइब्रेरी से नए सर्किट तैयार करने का यह तरीका हर नई लॉजिक डिजाइन के लिए पूरी तरह नया बैक्टीरियल स्ट्रेन बनाने की जरूरत घटा सकता है।
इस शोध को आंशिक रूप से अमेरिकी Defense Advanced Research Projects Agency (DARPA) और Intelligence Advanced Research Projects Activity (IARPA) ने वित्तपोषित किया।
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