आज उन्नत AI सिस्टम बनाने और चलाने के लिए जिन मुख्य संसाधनों की जरूरत होती है—जैसे हाई‑परफॉर्मेंस चिप्स, बड़े क्लाउड प्लेटफॉर्म और विशाल डेटा सेंटर—उन पर मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों का नियंत्रण है।
अगर यह निर्भरता और बढ़ती है, तो यूरोप की AI कंपनियों को कंप्यूटिंग क्षमता, कीमतों, आपूर्ति और यहां तक कि नीतिगत फैसलों (जैसे एक्सपोर्ट कंट्रोल या प्लेटफॉर्म नियम) के लिए भी बाहरी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
मेंश का मानना है कि दुनिया भर में AI इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बन रहा है—विशाल कंप्यूट क्लस्टर, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और ऊर्जा‑खपत वाले डेटा सेंटरों में भारी निवेश हो रहा है।
एक बार जब ये सिस्टम बन जाते हैं और लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट तय हो जाते हैं, तो वे बाजार में लंबे समय तक प्रभुत्व स्थापित कर देते हैं। इसलिए उनका कहना है कि अगले दो साल वह निर्णायक समय हैं जिसमें यूरोप को अपनी कंप्यूट क्षमता खड़ी करनी होगी।
अगर इस अवधि में वैश्विक कंप्यूट संसाधन बड़े “हाइपरस्केल” खिलाड़ियों द्वारा लॉक हो गए, तो बाद में आने वालों के लिए उन्नत AI मॉडल ट्रेन करना बहुत कठिन हो सकता है।
मेंश AI को सिर्फ सॉफ्टवेयर इनोवेशन नहीं बल्कि एक औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक मानते हैं।
वे इसे एक सरल रूपक से समझाते हैं: “इलेक्ट्रॉन्स को टोकन में बदलना।”
मतलब यह कि बिजली कंप्यूटिंग हार्डवेयर को चलाती है और वही हार्डवेयर AI मॉडल का आउटपुट—यानी टेक्स्ट या अन्य डिजिटल परिणाम—उत्पन्न करता है।
इस नजरिये से AI ऊर्जा, टेलीकॉम और परिवहन जैसी बुनियादी संरचनाओं की श्रेणी में आ जाती है।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर कई आपस में जुड़े घटकों से बनता है।
उन्नत AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए विशेष प्रोसेसर जैसे GPU या AI एक्सेलेरेटर की जरूरत होती है। इन चिप्स की उपलब्धता और सप्लाई यह तय करती है कि कौन सबसे बड़े और शक्तिशाली मॉडल बना सकता है।
अगर यूरोपीय कंपनियों को इन चिप्स के लिए विदेशी क्लाउड प्रदाताओं या सप्लाई चेन पर निर्भर रहना पड़े, तो उनकी क्षमता सीमित हो सकती है।
बड़े AI क्लस्टर चलाने के लिए विशाल मात्रा में बिजली चाहिए। विश्वसनीय और सस्ती ऊर्जा अब AI प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण कारक बनती जा रही है।
यही कारण है कि मेंश “इलेक्ट्रॉन्स से टोकन” वाली उपमा देते हैं—क्योंकि ऊर्जा ही AI उत्पादन की आधारशिला बन रही है।
चिप्स और बिजली को एक साथ चलाने के लिए बड़े पैमाने के AI‑अनुकूल डेटा सेंटर जरूरी होते हैं। यहीं पर वे कंप्यूटिंग क्लस्टर होते हैं जो AI मॉडल को ट्रेन और चलाते हैं।
यूरोप की क्षमता बढ़ाने के लिए Mistral जैसी कंपनियाँ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर कंपनी ने स्वीडन में लगभग €1.2 अरब (करीब $1.4 अरब) का डेटा सेंटर प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कंप्यूट क्षमता बढ़ाना है।
मेंश की चेतावनी एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक सवाल से जुड़ी है—डिजिटल संप्रभुता।
AI के संदर्भ में इसका मतलब है कि कोई क्षेत्र अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा और तकनीकी क्षमताओं पर स्वयं नियंत्रण रख सके।
यदि आधारभूत तकनीक—क्लाउड, कंप्यूटिंग, ऊर्जा और डेटा प्लेटफॉर्म—दूसरे देशों की कंपनियों के हाथ में हों, तो स्थानीय कंपनियाँ केवल एप्लिकेशन बना सकती हैं, लेकिन असली तकनीकी नियंत्रण बाहर रहेगा।
यूरोप AI नियमन के मामले में दुनिया में अग्रणी रहा है और सुरक्षा व जवाबदेही से जुड़े कई नियम बना चुका है। लेकिन मेंश का तर्क है कि सिर्फ नियमन से तकनीकी स्वतंत्रता नहीं मिलती।
कानून बाजार को दिशा दे सकते हैं, लेकिन वे GPU, बिजली नेटवर्क या कंप्यूट क्लस्टर नहीं बना सकते। इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश और औद्योगिक रणनीति जरूरी है।
मेंश के अनुसार यूरोप को एक पूर्ण AI इकोसिस्टम बनाना होगा जिसमें शामिल हों:
• स्थानीय AI मॉडल और रिसर्च प्रतिभा
• हाई‑परफॉर्मेंस चिप्स और कंप्यूट क्लस्टर
• ऊर्जा से जुड़े बड़े डेटा सेंटर
• निवेश पूंजी और सरकारी खरीद (public procurement) से बाजार समर्थन
इन सभी तत्वों के बिना यूरोप AI तकनीक का निर्माता बनने के बजाय सिर्फ उपभोक्ता बन सकता है।
आने वाले कुछ साल तय करेंगे कि यूरोप अपना पूरा AI स्टैक खड़ा कर पाता है—या फिर वैश्विक टेक दिग्गजों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रह जाता है।