चीन के अंतरिक्ष यात्री चयन कार्यक्रम को दुनिया के सबसे कठोर कार्यक्रमों में माना जाता है। उम्मीदवारों को कई चरणों से गुजरना पड़ता है, जिनमें मेडिकल जांच, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और कठिन शारीरिक परीक्षण शामिल होते हैं।
इस दौरान लाई को भी वही कठिन प्रशिक्षण करना पड़ा जो अन्य उम्मीदवारों को करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, सेंट्रीफ्यूज परीक्षण—जहाँ शरीर पर अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल डाला जाता है और कई लोगों को चक्कर या धुंधली दृष्टि तक हो सकती है। मोशन सिकनेस का इतिहास होने के बावजूद उन्होंने इन परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया और चयन के अगले चरणों तक पहुँच गईं।
लाई ने अगस्त 2024 में आधिकारिक तौर पर चीन के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में हांगकांग का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रवेश किया।
इसके बाद उनका प्रशिक्षण बेहद गहन हो गया। चीन मानव अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार उन्होंने:
इस ट्रेनिंग में अंतरिक्ष यान के सिस्टम, मिशन संचालन, वैज्ञानिक प्रयोगों के उपकरण और कक्षा में प्रयोग करने की प्रक्रियाएँ शामिल थीं।
शुरुआत में मंदारिन लाई की मुख्य कामकाजी भाषा नहीं थी। लेकिन अंतरिक्ष कार्यक्रम में रोजमर्रा के प्रशिक्षण और संचार के कारण उनकी भाषा क्षमता तेजी से बेहतर हुई।
जब शेनझोउ‑23 मिशन के क्रू की घोषणा हुई, तब जिउचुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ज्यादातर बातें मंदारिन में ही कहीं—जो इस बात का संकेत था कि उन्होंने भाषा की बाधा भी काफी हद तक पार कर ली थी।
अंततः लाई का‑यिंग को पेलोड स्पेशलिस्ट के रूप में चुना गया। इस भूमिका में उनका मुख्य काम तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों के उपकरणों को संचालित करना होगा।
उनका चयन कई मायनों में ऐतिहासिक है:
लाई का‑यिंग की यात्रा इस धारणा को चुनौती देती है कि अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए शुरुआत से ही परफेक्ट होना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कमियों के साथ शुरुआत की—मोशन सिकनेस, भाषा की बाधा और खुद के अनुसार औसत अकादमिक प्रदर्शन।
फिर भी उन्होंने आवेदन किया, कठिन चयन प्रक्रिया से गुज़रीं, सैकड़ों प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए और धीरे‑धीरे अपनी कमजोरियों को सुधारती रहीं।
उनके शब्दों में, सबसे अहम फैसला बस इतना था: “कोशिश करके देखना।”
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