फ्रांस का समग्र औद्योगिक उत्पादन जून में मई की तुलना में सिर्फ 0.1% बढ़ा, जो 0.3% वृद्धि के अनुमान से कम है । हालांकि, यह आंकड़ा भ्रामक है क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में जून में 1.1% की गिरावट आई (मई में -1.0% के बाद) ।
दोनों अर्थव्यवस्थाओं में इस सुस्ती के कुछ साझा कारण हैं:
इटली और फ्रांस के जून के आंकड़े पुष्टि करते हैं कि वर्ष की मजबूत शुरुआत के बाद, दूसरी तिमाही में यूरोज़ोन की औद्योगिक रिकवरी ने गति खो दी है। पहली तिमाही में इन्वेंट्री रीस्टॉकिंग और रक्षा खर्च के कारण जो रिकवरी आई थी, वह फीकी पड़ रही है ।
ECB ने 11 जून 2026 की अपनी बैठक में डिपॉजिट सुविधा दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 2.25% कर दिया था, जो एक साल के ठहराव के बाद किया गया कदम था । यह निर्णय लगातार ऊंची मुद्रास्फीति (2026 में 3.0% और 2027 में 2.3% का अनुमान) के कारण लिया गया था ।
अब, कमजोर औद्योगिक आंकड़े, सेवा क्षेत्र में संकुचन और नकारात्मक क्षेत्र में कम्पोजिट पीएमआई को देखते हुए, ECB के लिए अगली बैठक में दरों में कोई बदलाव नहीं करने का मामला मजबूत हो गया है । मध्य पूर्व युद्ध गतिविधियों पर बोझ डाल रहा है, और ECB के अपने अनुमानों में पहले से ही 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 0.8% और 2027 के लिए 1.2% रहने का अनुमान लगाया गया है ।
विकास धीमा होने और मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर लेकिन नीचे की ओर रुझान दिखाने के कारण, ECB के अगले कदम से पहले और डेटा का इंतजार करने की संभावना है। मंदी की चपेट में आने का जोखिम (policy error) बढ़ गया है, और एक लंबा ठहराव ही संभावित रणनीति लगती है।
इटली और फ्रांस के निराशाजनक आंकड़ों ने वह सापेक्षिक विकास लाभ कम कर दिया है, जो यूरोज़ोन 2026 की शुरुआत में अमेरिका के मुकाबले बना रहा था। कमजोर मैन्युफैक्चरिंग डेटा आमतौर पर यूरो पर दबाव डालता है क्योंकि इससे ब्याज दर अंतर के अनुमान कम हो जाते हैं।
बाजार अब ECB द्वारा आगे दरें बढ़ाने की संभावना कम आंकेंगे। यदि फेड (Fed) अपनी दरों में कोई बदलाव नहीं करता है या उसे अधिक आक्रामक (हॉकिश) माना जाता है, तो EUR/USD पर दोबारा दबाव आ सकता है। नाजुक रिकवरी की कहानी यूरो को मौजूदा स्तरों से मजबूत होने का कोई ठोस कारण नहीं देती।
निष्कर्ष: इटली (-1.0%) और फ्रांस (समग्र +0.1%, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग -1.1%) दोनों के आंकड़े उम्मीदों से चूक गए हैं, जो एक सुस्त वास्तविक अर्थव्यवस्था को उजागर करते हैं। ऐसा लगता है कि ECB का जून का दर वृद्धि इस चक्र का शिखर हो सकता है, और अब एक लंबा ठहराव ही संभव है। इन आंकड़ों के मद्देनजर यूरो के और मजबूत होने की कोई बड़ी संभावना नहीं दिखती।