मई 2026 में Google ने Gemini के पुराने daily prompt limits हटाकर compute‑based quota लागू किया, जिसमें prompt की जटिलता, इस्तेमाल किए गए फीचर्स और चैट की लंबाई से usage तय होता है।[2][12] Free और paid दोनों plans में यह सिस्टम लागू हुआ, लेकिन AI Plus, AI Pro और AI Ultra जैसे सब्सक्रिप्शन में क्रमशः ज्यादा compute bu...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did Google’s new compute‑based usage limits for the Gemini AI assistant—introduced around Google I/O 2026 to replace daily prompt counts. Article summary: Google replaced Gemini’s old daily prompt-count system with compute-based quotas that refresh every five hours until a weekly cap is reached, and usage now depends on prompt complexity, features/models used, and chat len. Topic tags: general, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Google is changing how it calculates your weekly Gemini usage limits, and it’s another reflection of how powerful agentic AI features have broken flat-rate consumer AI plans. As of" source context "Google just made big changes to Gemini usage limits - PCWorld" Reference image 2: visual subject "Google is changing how it calculat
मई 2026 में Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के उपयोग का तरीका बदल दिया। पहले जहां उपयोग को रोज़ाना भेजे गए prompts (प्रश्न या कमांड) की संख्या से मापा जाता था, अब इसे compute‑based quota से मापा जाता है—यानी हर interaction में कितनी प्रोसेसिंग पावर लगी।
Google का कहना था कि आधुनिक AI मॉडल चलाने की असली लागत को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव ज़रूरी था। लेकिन जैसे ही नया सिस्टम लागू हुआ, कई यूज़र्स ने शिकायत की कि उनका quota उम्मीद से कहीं जल्दी खत्म हो रहा है।
पहले Gemini का उपयोग अपेक्षाकृत आसान नियमों पर आधारित था: एक दिन में सीमित संख्या में prompts भेज सकते थे। यह मॉडल समझने में सरल था, लेकिन अलग‑अलग तरह के AI कामों की वास्तविक लागत को नहीं दर्शाता था।
17 मई 2026 से Google ने नया सिस्टम लागू किया, जिसमें अब उपयोग का हिसाब compute consumption से लगाया जाता है।
अब किसी भी Gemini इंटरैक्शन में quota खपत तीन मुख्य चीज़ों पर निर्भर करती है:
इस नए सिस्टम में quota हर पाँच घंटे में refresh होता है, लेकिन साथ ही एक साप्ताहिक सीमा (weekly cap) भी होती है।
इसका मतलब है कि साधारण टेक्स्ट सवाल बहुत कम quota खर्च करेगा, जबकि कोडिंग सहायता, एजेंट‑स्टाइल workflow या मीडिया जनरेशन जैसे काम काफी ज्यादा compute उपयोग कर सकते हैं। Google के अनुसार यही वास्तविकता है कि हर AI काम की लागत समान नहीं होती।
Compute‑based limits सभी Gemini योजनाओं पर लागू हैं, लेकिन हर subscription में उपलब्ध compute budget अलग है।
Google के सपोर्ट पेज के अनुसार:
Google I/O 2026 में कंपनी ने $100 प्रति माह का AI Ultra प्लान भी पेश किया। उदाहरण के तौर पर, Google के नए Antigravity coding environment में Ultra प्लान को AI Pro की तुलना में लगभग 5 गुना ज्यादा usage limit दी गई।
इस बदलाव के बाद subscription plans के बीच असली अंतर सिर्फ फीचर्स नहीं रहा—अब मुख्य अंतर यह है कि आपको कितना AI compute budget मिलता है।
सबसे बड़ी समस्या थी predictability की कमी। पहले यूज़र आसानी से अंदाज़ा लगा सकते थे कि उनके पास कितने prompts बचे हैं। नए सिस्टम में यह स्पष्ट नहीं होता कि अगला task कितना quota खर्च करेगा।
खासतौर पर इन मामलों में quota तेजी से खत्म होने लगा:
कई डेवलपर्स ने बताया कि कुछ ही कामकाजी sessions में पाँच‑घंटे का allowance या यहां तक कि weekly limit भी खत्म हो सकती है।
कुछ subscribers ने इसे “bait‑and‑switch” तक कहा—उनका तर्क था कि वे वही subscription फीस दे रहे हैं, लेकिन असल उपयोग पहले से कम हो गया है।
यूज़र्स के विरोध के बाद Google ने जल्दी प्रतिक्रिया दी, खासकर Antigravity नाम के अपने AI‑powered coding tool में।
लॉन्च के कुछ ही दिनों के भीतर:
इसके बाद कंपनी ने limits को एक बार फिर तीन गुना बढ़ाया, जिससे डेवलपर्स के लिए उपलब्ध compute budget काफी बढ़ गया।
इससे संकेत मिला कि Google ने शुरुआती अनुमान में यह कम आंका था कि वास्तविक workflows—खासतौर पर coding और agent‑based tasks—कितनी तेजी से compute खर्च करेंगे।
Gemini का यह मामला AI उद्योग की एक बड़ी चुनौती दिखाता है।
आज के AI सिस्टम में हर task की लागत अलग होती है। एक छोटा टेक्स्ट जवाब बनाना अपेक्षाकृत सस्ता है, जबकि लंबे context वाला reasoning, कोडिंग एजेंट या वीडियो जनरेशन बहुत ज्यादा compute मांग सकते हैं।
इसी कारण कंपनियां साधारण “message count” limits से हटकर compute‑based usage की ओर जा रही हैं। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है—जब limit किसी जटिल और अस्पष्ट गणना पर निर्भर हो, तो यूज़र्स के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उनके पास वास्तव में कितना उपयोग बाकी है।
Google के Gemini बदलाव ने यही संतुलन दिखाया: लागत के हिसाब से सही सिस्टम बनाना आसान नहीं है, क्योंकि यूज़र्स को भी ऐसा अनुभव चाहिए जो साफ, समझने योग्य और भरोसेमंद लगे।
Studio Global AI
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मई 2026 में Google ने Gemini के पुराने daily prompt limits हटाकर compute‑based quota लागू किया, जिसमें prompt की जटिलता, इस्तेमाल किए गए फीचर्स और चैट की लंबाई से usage तय होता है।[2][12]
मई 2026 में Google ने Gemini के पुराने daily prompt limits हटाकर compute‑based quota लागू किया, जिसमें prompt की जटिलता, इस्तेमाल किए गए फीचर्स और चैट की लंबाई से usage तय होता है।[2][12] Free और paid दोनों plans में यह सिस्टम लागू हुआ, लेकिन AI Plus, AI Pro और AI Ultra जैसे सब्सक्रिप्शन में क्रमशः ज्यादा compute budget दिया जाता है।[2][34]
डेवलपर्स के विरोध के बाद Google ने Antigravity coding tool में Gemini limits को कई गुना बढ़ाया और यूज़र्स के weekly quotas reset किए।[10][14]