इसका मतलब है कि साधारण टेक्स्ट सवाल बहुत कम quota खर्च करेगा, जबकि कोडिंग सहायता, एजेंट‑स्टाइल workflow या मीडिया जनरेशन जैसे काम काफी ज्यादा compute उपयोग कर सकते हैं। Google के अनुसार यही वास्तविकता है कि हर AI काम की लागत समान नहीं होती।
Compute‑based limits सभी Gemini योजनाओं पर लागू हैं, लेकिन हर subscription में उपलब्ध compute budget अलग है।
Google के सपोर्ट पेज के अनुसार:
Google I/O 2026 में कंपनी ने $100 प्रति माह का AI Ultra प्लान भी पेश किया। उदाहरण के तौर पर, Google के नए Antigravity coding environment में Ultra प्लान को AI Pro की तुलना में लगभग 5 गुना ज्यादा usage limit दी गई।
इस बदलाव के बाद subscription plans के बीच असली अंतर सिर्फ फीचर्स नहीं रहा—अब मुख्य अंतर यह है कि आपको कितना AI compute budget मिलता है।
सबसे बड़ी समस्या थी predictability की कमी। पहले यूज़र आसानी से अंदाज़ा लगा सकते थे कि उनके पास कितने prompts बचे हैं। नए सिस्टम में यह स्पष्ट नहीं होता कि अगला task कितना quota खर्च करेगा।
खासतौर पर इन मामलों में quota तेजी से खत्म होने लगा:
कई डेवलपर्स ने बताया कि कुछ ही कामकाजी sessions में पाँच‑घंटे का allowance या यहां तक कि weekly limit भी खत्म हो सकती है।
कुछ subscribers ने इसे “bait‑and‑switch” तक कहा—उनका तर्क था कि वे वही subscription फीस दे रहे हैं, लेकिन असल उपयोग पहले से कम हो गया है।
यूज़र्स के विरोध के बाद Google ने जल्दी प्रतिक्रिया दी, खासकर Antigravity नाम के अपने AI‑powered coding tool में।
लॉन्च के कुछ ही दिनों के भीतर:
इसके बाद कंपनी ने limits को एक बार फिर तीन गुना बढ़ाया, जिससे डेवलपर्स के लिए उपलब्ध compute budget काफी बढ़ गया।
इससे संकेत मिला कि Google ने शुरुआती अनुमान में यह कम आंका था कि वास्तविक workflows—खासतौर पर coding और agent‑based tasks—कितनी तेजी से compute खर्च करेंगे।
Gemini का यह मामला AI उद्योग की एक बड़ी चुनौती दिखाता है।
आज के AI सिस्टम में हर task की लागत अलग होती है। एक छोटा टेक्स्ट जवाब बनाना अपेक्षाकृत सस्ता है, जबकि लंबे context वाला reasoning, कोडिंग एजेंट या वीडियो जनरेशन बहुत ज्यादा compute मांग सकते हैं।
इसी कारण कंपनियां साधारण “message count” limits से हटकर compute‑based usage की ओर जा रही हैं। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है—जब limit किसी जटिल और अस्पष्ट गणना पर निर्भर हो, तो यूज़र्स के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उनके पास वास्तव में कितना उपयोग बाकी है।
Google के Gemini बदलाव ने यही संतुलन दिखाया: लागत के हिसाब से सही सिस्टम बनाना आसान नहीं है, क्योंकि यूज़र्स को भी ऐसा अनुभव चाहिए जो साफ, समझने योग्य और भरोसेमंद लगे।
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