इस नजरिए में सोना मुख्य रूप से नियमित आय देने वाला निवेश नहीं, बल्कि एक संभावित पोर्टफोलियो हेज है। महंगाई, मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता या शेयरों और बॉन्ड के बीच बढ़ते सह-संबंध की स्थिति में यह पारंपरिक विविधीकरण की कमजोर पड़ती भूमिका की भरपाई कर सकता है।
विल्सन ने मौजूदा माहौल को एक व्यापक कमोडिटी रोटेशन के रूप में बताया। उनके अनुसार, यह रुझान पहले सोने और चांदी के खननकर्ताओं से शुरू हुआ, फिर दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य धातुओं, ऊर्जा तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्रों तक फैला।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कमोडिटी या माइनिंग कंपनी का शेयर एक ही दिशा में चलेगा। संकेत इतना है कि निवेशक पारंपरिक शेयर-बॉन्ड मिश्रण से आगे बढ़कर ऐसे एक्सपोजर तलाश रहे हैं, जिनका व्यवहार सामान्य इक्विटी और फिक्स्ड-इनकम निवेश से अलग हो सकता है।
मॉर्गन स्टैनली का 2026 की दूसरी छमाही के लिए 5,200 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य एक अनुमान है, गारंटी नहीं। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, इस लक्ष्य के लिए गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड यानी ETF में निवेश प्रवाह की महत्वपूर्ण वापसी जरूरी हो सकती है। केंद्रीय बैंकों की खरीद से समर्थन मिल सकता है, लेकिन ETF निवेशक फेड की नीति की उम्मीदों, वास्तविक बॉन्ड यील्ड और डॉलर की दिशा के प्रति खासे संवेदनशील होते हैं।
गोल्ड लक्ष्य के सामने प्रमुख जोखिम ये हैं:
भूराजनीतिक तनाव का असर सीधा-सीधा सोने के पक्ष में नहीं माना जा सकता। तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, लेकिन अगर इससे तेल महंगा होता है और फेड ब्याज दरों में कटौती टाल देता है, तो बढ़ती यील्ड उस सुरक्षित-निवेश मांग का असर कम कर सकती है।
सोने के लिए अधिक अनुकूल स्थिति तब बनेगी, जब आर्थिक आंकड़े कमजोर हों, ब्याज दर बढ़ने की आशंकाएं घटें, वास्तविक यील्ड नीचे आए, डॉलर कमजोर हो और गोल्ड ETF में फिर से खरीदारी शुरू हो।
अगर कीमती धातुओं और कमोडिटी का रोटेशन व्यापक होता है, तो चांदी को भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, चांदी आमतौर पर सोने की तुलना में अधिक अस्थिर होती है। चांदी के 75 से 100 डॉलर या उससे ऊपर पहुंचने के दावों को उपलब्ध साक्ष्यों से पुष्ट परिणाम नहीं माना जा सकता; इन्हें केवल अनुमानित परिदृश्य समझना चाहिए।
रिपोर्ट किया गया सत्र इस अंतर को दिखाता है: चांदी 1.32% चढ़ी, जबकि सोना 0.44% बढ़ा। फिर भी, किसी एक कारोबारी सत्र से लंबे समय की दिशा तय नहीं होती। अगर ब्याज दरें और डॉलर की चाल कीमती धातुओं के खिलाफ जाती है, तो चांदी में सोने की तुलना में बड़ी गिरावट भी आ सकती है।
UBS ने सोने को आकर्षक एसेट और हेज बताया है। बैंक ने 2026 के लिए अपने लक्ष्य बढ़ाकर मार्च, जून और सितंबर में 6,200 डॉलर प्रति औंस कर दिए हैं, जो पहले 5,000 डॉलर थे। इसके बाद उसने 2026 के अंत तक कीमत के 5,900 डॉलर तक कुछ नरम पड़ने का अनुमान लगाया है।
ये अनुमान मॉर्गन स्टैनली के दूसरी छमाही के 5,200 डॉलर के लक्ष्य से अधिक तेजी वाले हैं। फिर भी, इन्हें निश्चित परिणाम नहीं, बल्कि विश्लेषकों के पूर्वानुमान के रूप में देखना चाहिए। दोनों अनुमानों के बीच का अंतर बताता है कि सोने का दीर्घकालिक आधार सकारात्मक हो सकता है, लेकिन इसकी राह मौद्रिक नीति, वास्तविक यील्ड, मुद्रा की चाल, निवेश प्रवाह और भूराजनीतिक घटनाओं के महंगाई पर असर से तय होगी।
इसलिए पोर्टफोलियो के संदर्भ में विल्सन का संदेश केवल “सोना खरीदें” नहीं है। उनका तर्क यह है कि 2022 में शेयरों और बॉन्ड की एक साथ हुई गिरावट ने दिखा दिया कि निवेशकों को विविधीकरण के लिए ज्यादा व्यापक विकल्पों की जरूरत हो सकती है। साथ ही, बॉन्ड निवेश में ब्याज दर से जुड़े जोखिम को भी नियंत्रित करना जरूरी है।