Kevin Warsh के 28 अगस्त के Jackson Hole भाषण ने सितंबर की Fed बैठक को लेकर बाजार की गणना बदल दी। उन्होंने ब्याज दर बढ़ाने का कोई पक्का वादा नहीं किया, लेकिन महंगाई को Fed का “प्रमुख फोकस” बताया, 2% PCE लक्ष्य को “स्थिर और तय” लक्ष्य के रूप में दोहराया और चेतावनी दी कि अगर अंतर्निहित महंगाई स्पष्ट रूप से और पर्याप्त तेजी से लक्ष्य की ओर नहीं बढ़ती, तो नीति-निर्माताओं को अभी “काम करना होगा।” इससे सितंबर में एक और दर वृद्धि की संभावना खुली रही।
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The Wall Street Journal में उद्धृत ब्याज-दर वायदा आंकड़ों के अनुसार, भाषण से पहले सितंबर में दर बढ़ने की बाजार-आधारित संभावना करीब 35% थी, जो भाषण के बाद लगभग 58% हो गई।
6 यह बाजार द्वारा जोखिम का पुनर्मूल्यांकन था—यह इस बात की पुष्टि नहीं थी कि Federal Open Market Committee यानी FOMC ने दर बढ़ाने का फैसला कर लिया है।
Warsh का संदेश इतना सख्त क्यों माना गया
Warsh ने इस धारणा को चुनौती दी कि गर्मियों में महंगाई के कुछ अपेक्षाकृत बेहतर आंकड़े टिकाऊ गिरावट का पर्याप्त प्रमाण हैं। उनके अनुसार, इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि अंतर्निहित महंगाई में “महत्वपूर्ण सुधार” हुआ है। Fed का पसंदीदा महंगाई माप PCE price index अब भी लक्ष्य से काफी ऊपर था: इसकी 12 महीने की वृद्धि 3.7% और छह महीने की वृद्धि 4.1% थी, जबकि Fed का लक्ष्य 2% है।
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उन्होंने भविष्य की नीति के लिए कोई तय मार्गदर्शन या स्पष्ट reaction function भी नहीं दिया। इसका मतलब था कि निवेशकों को किसी पहले से घोषित दर-पथ के बजाय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान देना होगा। व्यावहारिक संकेत सशर्त लेकिन सख्त था: अगर महंगाई पर्याप्त गति से 2% की ओर नहीं लौटती, तो अतिरिक्त मौद्रिक सख्ती जरूरी हो सकती है।
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यह असर उभरते बाजारों तक कैसे पहुंचा
इसका असर वित्तीय बाजारों में एक परिचित श्रृंखला के जरिए दिखा:
- अमेरिकी दरों की ऊंची उम्मीदों से डॉलर वाली संपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हुईं।
- मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी Treasury yields ने अमेरिका के बाहर के कर्जदारों और निवेशकों के लिए वित्तीय परिस्थितियां कड़ी कर दीं।
- जोखिम लेने की इच्छा घटने से उभरते बाजारों के शेयरों और मुद्राओं पर दबाव आया।
समकालीन बाजार रिपोर्टों के अनुसार, MSCI का developing-market equity gauge एक समय 1.4% तक गिर गया। उभरते बाजारों की मुद्राओं का सूचकांक 0.1% नीचे आया। संबंधित सत्र में दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर सूचकांकों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।
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इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बहत दबाव में रहे, जबकि फिलीपीनी पेसो पर ऊर्जा लागत से जुड़ी अलग कमजोरी भी थी। The Edge Malaysia की रिपोर्ट के अनुसार, 28 अगस्त को पेसो 0.6% तक गिरकर प्रति डॉलर 62.236 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
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यह कदम एशियाई विदेशी मुद्रा बाजारों में पहले से दिख रहे एक व्यापक रुझान से भी मेल खाता था। विश्लेषकों ने रुपिया, बहत और पेसो जैसी तेल-संवेदनशील मुद्राओं को मजबूत डॉलर और ऊंची ऊर्जा लागत के संयुक्त असर के प्रति अधिक जोखिमग्रस्त बताया है।
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महंगे तेल ने दबाव क्यों बढ़ाया
Fed की दरों को लेकर बदली उम्मीद के साथ तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार को दूसरा झटका दिया। तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में महंगी ऊर्जा से आयात बिल बढ़ता है और मुद्रा तथा बाहरी भुगतान संतुलन पर दबाव आ सकता है। एशियाई बाजारों की रिपोर्टिंग में मजबूत डॉलर और ऊंचे तेल को उभरती बाजार परिसंपत्तियों में कमजोरी से जोड़ा गया है।
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तेल Fed की महंगाई संबंधी चुनौती को भी जटिल बनाता है। यदि ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो नीति-निर्माताओं को यह भरोसा होने में अधिक समय लग सकता है कि कुल महंगाई 2% लक्ष्य की ओर लौट रही है। इसका मतलब अपने-आप दर वृद्धि नहीं है, लेकिन इससे बाजार निकट भविष्य में दरों में कटौती की उम्मीद लगाने से अधिक सतर्क हो सकता है।
नतीजा जोखिम से बचने वाला मिला-जुला माहौल रहा: अमेरिकी दरों का अधिक सख्त अनुमान, मजबूत डॉलर और मध्य-पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता। थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे तेल आयातक देशों की मुद्राओं पर दबाव इसलिए अधिक रहा क्योंकि ऊर्जा लागत पहले से ही असर डाल रही थी।
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अब निवेशक किन आंकड़ों पर नजर रखेंगे
आगे बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि आर्थिक आंकड़े Warsh की लगातार बनी हुई महंगाई को लेकर चिंता को सही ठहराते हैं या तत्काल सख्ती की जरूरत को कमजोर करते हैं।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़े
निवेशक PCE और CPI में ऐसे संकेत तलाशेंगे कि महंगाई 2% की ओर उस गति से बढ़ रही है या नहीं, जिसे Fed पर्याप्त मानेगा। महंगाई में लगातार या फिर से आई तेजी दरों को ऊंचा बनाए रखने अथवा बढ़ाने का आधार मजबूत कर सकती है। इसके उलट, स्पष्ट disinflation से भाषण के बाद हुआ कुछ पुनर्मूल्यांकन वापस पलट सकता है।
रोजगार बाजार
नौकरी वृद्धि, बेरोजगारी और वेतन के आंकड़े बताएंगे कि अर्थव्यवस्था कड़ी मौद्रिक नीति को कितना सह सकती है। मजबूत रोजगार के साथ जिद्दी महंगाई रहे तो सितंबर की दर वृद्धि को बाजार के लिए सही ठहराना आसान होगा। इसके विपरीत, रोजगार बाजार में तेज गिरावट से आर्थिक कमजोरी का जोखिम फिर केंद्र में आ सकता है।
डॉलर, Treasury yields और तेल
निवेशक अल्पकालिक अमेरिकी Treasury yields, डॉलर और तेल की कीमतों पर भी नजर रखेंगे। डॉलर और छोटी अवधि की yields बताते हैं कि बाजार Fed की सख्ती को कितनी मजबूती से कीमतों में शामिल कर रहा है। तेल एशियाई देशों के व्यापार संतुलन और अमेरिकी महंगाई के अनुमान—दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
यह पुनर्मूल्यांकन है, उभरते बाजारों की तेजी का अंत नहीं
बाजार की प्रतिक्रिया तेज और महत्वपूर्ण थी, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि उभरते बाजारों की व्यापक तेजी निश्चित रूप से समाप्त हो गई है। 31 अगस्त को MSCI emerging-market currency index के बारे में बताया गया कि वह अब भी महीने में 1.8% बढ़त की राह पर था—लगातार दूसरे महीने की वृद्धि—हालांकि Warsh के भाषण के बाद उस पर दबाव आया।
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यह अंतर अहम है। Warsh के भाषण ने निकट भविष्य में अमेरिकी दरों में कटौती की उम्मीद पर दांव लगाना महंगा कर दिया और ऊंचे तेल ने कमजोर एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ाया। लेकिन यह घटनाक्रम स्थायी उलटफेर बनेगा या नहीं, इसका जवाब आगे आने वाले महंगाई, रोजगार और ऊर्जा-बाजार के आंकड़े देंगे—सिर्फ भाषण नहीं।