आईआईएफ के आंकड़ों के अनुसार, उभरते देशों की सरकारों ने जनवरी–अगस्त 2026 में 190 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा बॉन्ड बेचे, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकम 160 अरब डॉलर थी। बाद की पेशकशों से कुल रकम लगभग 200 अरब डॉलर प... मार्च में युद्ध के असर से बाजार लगभग ठहर गया था, लेकिन अप्रैल में पोलैंड ने 6 अरब डॉलर के डॉलर ब...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did emerging-market governments achieve record foreign-currency sovereign bond sales of $190 billion in January–August 2026, versus $160. Article summary: The evidence points to strong investor appetite, improved emerging-market financial resilience, and issuers taking advantage of opportunities to borrow—not an absence of war-related disruption or borrowing risk. Issuance. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
उभरते बाजारों की सरकारों के लिए 2026 की कहानी लगातार खुला बाजार मिलने की नहीं, बल्कि मौका मिलते ही उधार जुटाने की है। अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थान (आईआईएफ) के सितंबर में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त तक उन्होंने विदेशी मुद्रा में रिकॉर्ड 190 अरब डॉलर के सरकारी बॉन्ड जारी किए। 2025 की समान अवधि के 160 अरब डॉलर से यह 30 अरब डॉलर, यानी 18.75% अधिक है। इसके बाद करीब 10 अरब डॉलर की पेशकशों से साल का रिपोर्ट किया गया कुल आंकड़ा लगभग 200 अरब डॉलर पहुंचा। ये नए बॉन्ड की बिक्री के आंकड़े हैं, कुल बकाया कर्ज के नहीं।5
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साल की शुरुआत में बॉन्ड बिक्री तेज थी। फिर ईरान युद्ध ने बाजारों को झटका दिया और उधारी की लागत बढ़ने पर बिक्री लगभग रुक गई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के निगरानी आंकड़ों में मार्च के दौरान प्रमुख विदेशी मुद्राओं में सरकारी बॉन्ड बिक्री सिर्फ 4.1 अरब डॉलर दर्ज है—एक साल पहले से लगभग 60% कम। बाजार में दोबारा गुंजाइश बनते ही उधारकर्ता लौटे: अप्रैल की शुरुआत में पोलैंड ने पांच, 10 और 30 साल की अवधि वाले डॉलर बॉन्ड से 6 अरब डॉलर जुटाए।38
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सऊदी अरब की जनवरी की बिक्री शुरुआती मांग का उदाहरण है। उसने चार हिस्सों में डॉलर बॉन्ड जारी करके 11.5 अरब डॉलर जुटाए, जबकि निवेशकों के ऑर्डर लगभग 31 अरब डॉलर के थे—बिक्री की रकम का करीब 2.7 गुना। हालांकि ऑर्डर मिलने का मतलब यह नहीं कि उतनी ही रकम के बॉन्ड अंततः निवेशकों को आवंटित हुए।57
58 सितंबर की रिपोर्टिंग के अनुसार, सऊदी अरब और कतर युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किए गए डॉलर बॉन्ड बाजार में लौटे। यह क्रम शुरुआती उधारी, बीच में रुकावट और फिर बाजार खुलने को दिखाता है; उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि खाड़ी देशों ने युद्ध की आशंका में जानबूझकर कितनी उधारी पहले ही जुटा ली थी।
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मेक्सिको और तुर्की भी अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार के बड़े उधारकर्ताओं में थे। ब्लूमबर्ग के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में इन दोनों देशों के उधारकर्ताओं ने, पोलैंड और सऊदी अरब के उधारकर्ताओं की तरह, प्रत्येक ने 10 अरब डॉलर से अधिक जुटाए। लेकिन इस आंकड़े में सरकारें और कंपनियां दोनों शामिल हैं; इसे 190 अरब डॉलर के सरकारी बॉन्ड आंकड़े में हर देश की हिस्सेदारी नहीं समझना चाहिए। सितंबर में तुर्की की आगे की उधारी की योजना का उल्लेख था, पूरी हो चुकी बिक्री का नहीं।17
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शुरुआती झटके के बाद निवेश का प्रवाह सुधरा। रॉयटर्स की रिपोर्ट में आईआईएफ के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में उभरते बाजारों से 66.2 अरब डॉलर निकलने के बाद अप्रैल में 58.3 अरब डॉलर का पोर्टफोलियो निवेश आया। इसमें शेयर और बॉन्ड दोनों शामिल हैं: यह बदली हुई निवेशक धारणा का संकेत है, सरकारी बॉन्ड की खरीद का सीधा आंकड़ा नहीं।43
ब्लूमबर्ग के अनुसार, उभरते बाजारों के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड का क्रेडिट स्प्रेड—तुलनीय सुरक्षित बॉन्ड के मुकाबले निवेशक जो अतिरिक्त प्रतिफल मांगते हैं—लगभग दो दशक के सबसे संकरे स्तर पर था। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ब्याज बढ़ने से डॉलर बॉन्ड का कुल प्रतिफल और उधारी लागत बढ़ सकती है, भले ही उधारकर्ता के जोखिम के लिए मांगा जाने वाला यह अतिरिक्त अंतर कम रहे।17
रॉयटर्स ने सुधारों, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, गहरे घरेलू पूंजी बाजारों और घरेलू निवेशकों के बड़े आधार को कुछ उभरते बाजारों की बेहतर झटके सहने की क्षमता से जोड़ा है। लेकिन मजबूत आधार का अर्थ जोखिम से छुटकारा नहीं है: युद्ध से महंगाई, सरकारी वित्त पर दबाव और व्यापार में बाधाएं भी बढ़ी हैं। विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज की अदायगी का जोखिम बना रहता है।34
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रेटिंग एजेंसी फिच को उम्मीद है कि सऊदी अरब उभरते बाजारों में डॉलर ऋण और सुकूक—इस्लामी वित्त के तहत जारी प्रतिभूतियां—के प्रमुख जारीकर्ताओं में बना रहेगा। उसका अनुमान है कि 2026 में सऊदी ऋण पूंजी बाजार का कुल बकाया आकार 600 अरब डॉलर होगा। यह विभिन्न क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों और राजकोषीय घाटे सहित कई कारणों से जुड़ा बकाया कर्ज का अनुमान है, 600 अरब डॉलर के नए सरकारी डॉलर बॉन्ड जारी करने का अनुमान नहीं।49
अर्थशास्त्री मोहम्मद अल-एरियन के मुताबिक, उभरते बाजारों के अतिरिक्त बॉन्ड वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल पर सीमित अतिरिक्त दबाव डालते हैं। उनकी तुलना में विकसित अर्थव्यवस्थाओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों का बॉन्ड निर्गम कहीं बड़ा है। यानी निवेशकों की पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन उनके आकलन में प्रतिफल पर इसके असर की कोई निश्चित मात्रा नहीं दी गई है।15
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आईआईएफ के आंकड़ों के अनुसार, उभरते देशों की सरकारों ने जनवरी–अगस्त 2026 में 190 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा बॉन्ड बेचे, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकम 160 अरब डॉलर थी। बाद की पेशकशों से कुल रकम लगभग 200 अरब डॉलर प...
आईआईएफ के आंकड़ों के अनुसार, उभरते देशों की सरकारों ने जनवरी–अगस्त 2026 में 190 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा बॉन्ड बेचे, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकम 160 अरब डॉलर थी। बाद की पेशकशों से कुल रकम लगभग 200 अरब डॉलर प... मार्च में युद्ध के असर से बाजार लगभग ठहर गया था, लेकिन अप्रैल में पोलैंड ने 6 अरब डॉलर के डॉलर बॉन्ड बेचे। सऊदी अरब की जनवरी की 11.5 अरब डॉलर की बिक्री को लगभग 31 अरब डॉलर के ऑर्डर मिले थे।[38][7][57][58]
निवेशकों की मांग लौटी है, पर विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने का जोखिम खत्म नहीं हुआ।[43][34][37]