इस तेजी का एक अहम कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट था। इससे पहले तेल महंगा हुआ था क्योंकि अमेरिका और ईरान से जुड़े भू‑राजनीतिक तनावों के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई थी। बाद में यह उम्मीद बनी कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू हो सकती है, जिसके बाद तेल की कीमतें कुछ नरम पड़ीं।
तेल सस्ता होने का असर व्यापक होता है। ऊर्जा लागत कम होने से उत्पादन, परिवहन और कई उद्योगों का खर्च घटता है, जिससे महंगाई के दबाव भी कम हो सकते हैं। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट आमतौर पर शेयर बाजारों के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
जब ऊर्जा लागत कम होने की संभावना बढ़ी, तो निवेशकों ने एशियाई बाजारों में फिर से खरीदारी बढ़ाई।
दूसरा बड़ा कारक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यानी U.S. Treasury yields में गिरावट था। जब बॉन्ड यील्ड कम होती है तो उधारी की लागत और कंपनियों के भविष्य के मुनाफे को डिस्काउंट करने की दर भी घटती है। इससे शेयरों की वैल्यूएशन को सहारा मिलता है।
रिपोर्टों में कहा गया कि बॉन्ड बाजार का दबाव कम होना एशियाई शेयरों की तेजी के पीछे एक प्रमुख कारण था। इससे वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए माहौल ज्यादा अनुकूल बन गया।
एशियाई बाजार विशेष रूप से अमेरिकी वित्तीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के आधार पर ही जोखिम तय करता है।
एशियाई बाजार अक्सर पिछले अमेरिकी सत्र से दिशा लेते हैं। जब वॉल स्ट्रीट पर मजबूत तेजी आती है, तो उसका असर अगले दिन एशिया में भी दिखाई देता है।
हाल के सत्र में अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की अगुवाई में जोरदार उछाल देखा गया, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा और वही गति एशियाई बाजारों तक पहुंची।
चिप निर्माता Nvidia के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने वैश्विक टेक रैली को और तेज कर दिया। कंपनी का मुनाफा साल‑दर‑साल 200% से अधिक बढ़ा, जबकि राजस्व लगभग 85% उछला।
यह संकेत था कि डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े हार्डवेयर की मांग अभी भी बेहद मजबूत है।
एशिया की कई कंपनियां—जैसे मेमोरी‑चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां—एआई हार्डवेयर के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए Nvidia के नतीजों से पैदा हुआ उत्साह एशियाई टेक शेयरों में भी दिखाई दिया।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों वाले बाजारों ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।
दक्षिण कोरिया के Kospi में बड़ी बढ़त दर्ज हुई क्योंकि निवेशकों ने Samsung Electronics और अन्य चिप कंपनियों में खरीदारी बढ़ाई।
जापान का Nikkei 225 भी ऊपर चढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 व्यापक क्षेत्रीय रुझान के साथ हल्की बढ़त में रहा।
इन सभी कारकों ने मिलकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया:
जब ऐसे संकेत एक साथ आते हैं, तो निवेशक आमतौर पर सुरक्षित परिसंपत्तियों से हटकर शेयरों—खासकर टेक और ग्रोथ कंपनियों—में पैसा लगाते हैं। यही वजह है कि इस दौर में एशिया के प्रमुख शेयर सूचकांकों में व्यापक तेजी देखने को मिली।