Zeppelin नोटबुक के कई हिस्से पूरी तरह तकनीकी और पूर्वानुमेय होते हैं, जैसे:
क्योंकि ये कार्य नियमों पर आधारित हैं, इन्हें डिटर्मिनिस्टिक कोड और ऑटोमेशन से संभाला गया, न कि AI से।
असल जटिलता नोटबुक के अंदर मौजूद बिज़नेस लॉजिक में होती है—डेटा ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स स्टेप्स और विश्लेषण का उद्देश्य।
यहाँ सिस्टम context‑aware prompts तैयार करता है, जिन्हें Databricks Genie जैसे AI टूल्स के साथ उपयोग किया जाता है। इससे उपयोगकर्ता नोटबुक के हर चरण की मंशा को समझकर उसे नए सिस्टम में फिर से बना सकते हैं।
इस तरीके से:
पूरा माइग्रेशन टूल Databricks App के रूप में बनाया गया था। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता सीधे Databricks वातावरण के भीतर ही माइग्रेशन प्रक्रिया चला सकते थे।
इस सिस्टम में मुख्य घटक शामिल थे:
सामान्य तौर पर प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती थी।
1. Notebook ingestion
यूज़र Zeppelin नोटबुक्स को एक्सपोर्ट करके Databricks App में अपलोड करते थे।
2. Structural conversion
ऑटोमेशन नोटबुक की संरचना—paragraphs, interpreter syntax और metadata—को Databricks के अनुरूप बदल देता था।
3. AI‑assisted logic reconstruction
AI‑जनरेटेड प्रॉम्प्ट्स की मदद से एनालिटिकल लॉजिक को Databricks टूल्स के साथ दोबारा बनाया जाता था।
4. Human validation
अंतिम चरण में उपयोगकर्ता नोटबुक की समीक्षा कर उसे फाइनल करते थे। इससे डोमेन नॉलेज और कंप्लायंस सुरक्षित रहते थे।
टूल लागू होने से पहले एक नोटबुक को दोबारा बनाने में कई घंटे लग जाते थे।
2,000 नोटबुक्स के पैमाने पर इसका अर्थ है:
कई जनरेटिव AI प्रोजेक्ट्स व्यावहारिक लाभ दिखाने में संघर्ष करते हैं। Deutsche Börse का यह उदाहरण इसलिए अलग है क्योंकि यह सीधे एक महँगे इंजीनियरिंग बॉटलनेक को हल करता है।
इस मॉडल की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं:
यह माइग्रेशन Deutsche Börse की बड़ी क्लाउड रणनीति का भी हिस्सा है। कंपनी धीरे‑धीरे अपने डेटा और एनालिटिक्स सिस्टम को क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म्स पर स्थानांतरित कर रही है।
उदाहरण के लिए, कंपनी ने अपने DAX इन्फ्रास्ट्रक्चर को Google Cloud पर फिर से बनाया, जिससे:
कंपनी यह भी बता चुकी है कि उसके 50% से अधिक वर्कलोड अब क्लाउड पर चल रहे हैं, जो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े बदलाव को दिखाता है।
Deutsche Börse का यह प्रोजेक्ट एंटरप्राइज़ इंजीनियरिंग में GenAI के उपयोग का एक व्यावहारिक मॉडल पेश करता है:
इस रणनीति ने एक विशाल मैन्युअल माइग्रेशन परियोजना को तेज़, अर्ध‑स्वचालित वर्कफ़्लो में बदल दिया—और हर नोटबुक के पुनर्निर्माण का समय घंटों से घटाकर मिनटों में ला दिया।
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