सिटी रिसर्च के स्कॉट क्रोनर्ट ने तेल की अचानक आई गिरावट को महंगाई के परिदृश्य और निवेशकों के मनोबल के लिए अप्रत्याशित राहत माना—ईरान संघर्ष या ऊर्जा आपूर्ति के जोखिम खत्म होने का संकेत नहीं। 4 नवंबर को ब्रेंट क्रूड 8.7% गिरकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर और अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई 8.3% टूटकर 88.12 डॉलर पर बंद हुआ। दोनों के बंद भाव 31 अगस्त के बाद सबसे निचले स्तर पर थे।
13 क्रोनर्ट ने कहा कि इस गिरावट से महंगाई के दबाव में कुछ कमी आई; अगले दिन ब्रेंट में फिर तेजी लौटी।
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तेल की कीमतों में गिरावट बाजार के लिए क्यों अहम थी
तेल सस्ता होने से महंगाई के एक स्रोत का दबाव घट सकता है। क्रोनर्ट ने कम तेल कीमतों और टैरिफ संबंधी चिंताओं में कमी को ठंडी पड़ती महंगाई, उभरते बाजारों के लिए बेहतर माहौल और व्यापक वैश्विक बाजार रैली की संभावना से जोड़ा।
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ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर भी इसका असर पड़ा। एक बाजार विवरण के मुताबिक, निवेशकों ने फेडरल रिजर्व की एक संभावित दर बढ़ोतरी को अपनी उम्मीदों से हटा दिया।
20 यह बाजार की धारणा में बदलाव था—फेड का फैसला नहीं, न ही आगे नरम मौद्रिक नीति की गारंटी। उसी विवरण में कहा गया कि बेहतर मनोभाव निकट अवधि में शेयरों को सहारा दे सकता है, जबकि बुनियादी आर्थिक स्थितियां अभी नहीं बदली थीं।
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तेल और नीचे जाने की राह शर्तों पर निर्भर
सिटी की कमोडिटी टीम का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है और ढुलाई लागत सामान्य स्तर पर लौटती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट की गुंजाइश है।
48 यानी यह अनुमान केवल कूटनीतिक समाधान की उम्मीद पर नहीं, बल्कि जहाजरानी और आपूर्ति की वास्तविक स्थितियों में बदलाव पर टिका है।
समुद्री जोखिम बने रहने के संकेत भी थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को कतर के पास एक टैंकर पर प्रक्षेपास्त्रों से हमला हुआ।
18 यह घटना अपने आप में तेल की कीमत का स्तर तय नहीं करती, लेकिन बताती है कि तेज गिरावट को आपूर्ति जोखिमों से स्थायी राहत मानना जल्दबाजी होगी।
उम्मीद और समाधान में फर्क
चुनाव के बाद कीमतों में आई गिरावट के पीछे निवेशकों की यह उम्मीद थी कि राजनीतिक दबाव और ईरान के प्रति अमेरिका का अधिक समझौतावादी रुख तेल को सस्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है। गिरावट के आकार पर क्रोनर्ट का आश्चर्य और महंगाई पर इसके राहतकारी असर पर उनका जोर, इस कदम का तत्काल बाजार महत्व दिखाता है।
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फिर भी आगे का रास्ता अनिश्चित है। कम तेल कीमतें महंगाई को लेकर माहौल बेहतर कर सकती हैं और जोखिम लेने की निवेशकों की इच्छा बढ़ा सकती हैं। लेकिन वे अपने आप यह साबित नहीं करतीं कि जहाजरानी सामान्य हो गई है, कोई समझौता हो चुका है या संघर्ष के आर्थिक असर खत्म हो गए हैं।