चीन ने 19 अगस्त को 35 AI साझेदार देशों पर अमेरिकी दबाव का विरोध करते हुए कहा कि देशों को AI पर गुट चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और उनकी ‘डिजिटल संप्रभुता’ का सम्मान होना चाहिए। [44][45] अमेरिका का Pax Silica गठबंधन AI मॉडल, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं पर भरोसेमंद सहयोग पर केंद्रित...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did China respond to the United States’ reported plan to pressure the 35 countries that signed its AI Opportunity Statement to choose be. Article summary: China rejected the reported U.S. “choose sides” approach. Its foreign-ministry spokesperson, Lin Jian, said Beijing opposes bloc confrontation in AI and urged respect for every country’s “digital sovereignty,” rather tha. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
चीन ने अमेरिका की उस कथित योजना को खारिज कर दिया है, जिसमें 35 देशों से वॉशिंगटन के Pax Silica पहल और बीजिंग के World Artificial Intelligence Cooperation Organization (WAICO) में से किसी एक का चुनाव करने को कहा जा सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि बीजिंग AI के मुद्दे पर देशों को गुटों में बांटने और पक्ष चुनने के लिए मजबूर करने का विरोध करता है। उन्होंने हर देश की “डिजिटल संप्रभुता” का सम्मान करने की अपील की।
यह विवाद अमेरिकी विदेश विभाग के एक कथित मसौदा पत्र से जुड़ा है। Reuters के अनुसार, यह पत्र जून में अमेरिकी “AI Opportunity Statement” पर हस्ताक्षर करने वाले 35 देशों को भेजे जाने की तैयारी थी। मसौदे में चेतावनी दी गई थी कि बीजिंग के नेतृत्व वाले प्रतिस्पर्धी ढांचे में शामिल होने वाले देशों को अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन से बाहर किया जा सकता है। पत्र में Pax Silica की सदस्यता को महज औपचारिक सदस्यता नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता बताया गया था।
Pax Silica अमेरिका के नेतृत्व वाला समूह है। इसका कथित जोर उन संसाधनों और तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर है, जो किसी देश की AI क्षमता तय करते हैं—जैसे उन्नत AI मॉडल, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिज।
इसलिए यह केवल एक राजनयिक घोषणा नहीं है। यह AI इकोसिस्टम के रणनीतिक हिस्सों तक पहुंच और आपूर्ति शृंखलाओं के समन्वय का ढांचा भी है। वॉशिंगटन इसे उन देशों के बीच सहयोग मजबूत करने के माध्यम के रूप में देखता है, जिन्हें वह भरोसेमंद साझेदार मानता है। रिपोर्टों में जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को इस पहल से जुड़े देशों के रूप में बताया गया है।
अमेरिका का कथित संदेश यह है कि कोई देश Pax Silica का हिस्सा रहते हुए ऐसे प्रतिद्वंद्वी संगठनों में शामिल नहीं हो सकता, जिनकी अपेक्षाएं अमेरिकी ढांचे से टकराती हों। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग अभी एक मसौदा पत्र और प्रस्तावित चेतावनी तक सीमित है। इससे यह साबित नहीं होता कि चीन के साथ हर प्रकार के सहयोग पर अपने-आप कोई निश्चित चिप, क्लाउड या निवेश प्रतिबंध लागू हो जाएगा।
World Artificial Intelligence Cooperation Organization यानी WAICO की स्थापना 16 जुलाई को शंघाई में एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी संगठन के रूप में की गई थी। इसका मुख्यालय भी शंघाई में है। संगठन के घोषित उद्देश्यों में अंतरराष्ट्रीय AI सहयोग और वैश्विक AI शासन शामिल हैं, साथ ही AI के सुरक्षित, निष्पक्ष और जनहितकारी विकास पर जोर दिया गया है। स्थापना के समय 29 देशों ने इसके समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
बाद में चीन ने कहा कि अगस्त के मध्य तक WAICO के 38 संस्थापक सदस्य हो चुके थे। इस वजह से शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले 29 देशों और बाद में घोषित 38 सदस्यों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।
WAICO की शुरुआती सदस्यता में ग्लोबल साउथ और गैर-पश्चिमी देशों की हिस्सेदारी अधिक है। रिपोर्टों में रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों का नाम लिया गया है। शुरुआती संस्थापकों में कोई प्रमुख पश्चिमी लोकतंत्र शामिल नहीं था।
रिपोर्ट की गई अमेरिकी रणनीति का उद्देश्य यह रोकना है कि चीन साझेदार देशों और साझा तकनीकी इकोसिस्टम के जरिए AI के रणनीतिक संसाधनों तक भरोसेमंद पहुंच हासिल कर सके। मसौदा पत्र में AI मॉडल, चिप और महत्वपूर्ण खनिजों को Pax Silica से सीधे जोड़ा गया है।
इन संसाधनों पर नियंत्रण का असर केवल कारोबारी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहता। सेमीकंडक्टर उन्नत कंप्यूटिंग की नींव हैं; AI मॉडल और उनसे जुड़ा बुनियादी ढांचा यह तय करते हैं कि कौन देश AI सिस्टम विकसित और तैनात कर सकता है; वहीं महत्वपूर्ण खनिज हार्डवेयर आपूर्ति शृंखला के अहम हिस्सों के लिए जरूरी होते हैं।
इन क्षेत्रों में सहयोग को व्यवस्थित करके वॉशिंगटन इस संभावना को कम करना चाहता है कि चीन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुंच का इस्तेमाल अपनी तकनीकी, आर्थिक या सुरक्षा संबंधी ताकत बढ़ाने में करे।
हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य आपूर्ति शृंखला और तकनीकी सुरक्षा से जुड़ी इस रणनीति का समर्थन करते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि WAICO में शामिल होने वाले हर देश पर अपने-आप कोई खास चिप, क्लाउड या निवेश दंड लागू होगा। स्पष्ट बात फिलहाल इतनी है कि Pax Silica ढांचे से बाहर किए जाने की कथित चेतावनी दी गई है; इसके व्यावहारिक परिणाम अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
चीन का जवाब इस विवाद को केवल “वॉशिंगटन या बीजिंग में से किसे चुनना है” वाले सवाल तक सीमित नहीं रहने देता। बीजिंग के अनुसार, हर देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों और विकास की जरूरतों के आधार पर अपने तकनीकी साझेदार, नियम और विकास का रास्ता चुनने का अधिकार होना चाहिए।
यह संदेश विकासशील देशों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। इनमें से कई देश चीनी बुनियादी ढांचे या सहयोग का लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन साथ ही अमेरिकी बाजारों, निवेश, चिप और तकनीकी साझेदारियों तक अपनी पहुंच भी बनाए रखना चाहते हैं। ऐसे में जबरन कराया गया चुनाव उनके सामने किसी तटस्थ सुरक्षा व्यवस्था की तरह नहीं, बल्कि तकनीक तक पहुंच को राजनीतिक अनुशासन में बदलने की कोशिश की तरह पेश किया जा सकता है।
चीन अपनी व्यापक डिजिटल शासन नीति में भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करता रहा है। वह डिजिटल संप्रभुता, समावेशी विकास और तकनीकी नाकाबंदी के विरोध की बात करता है। इस दृष्टिकोण का मूल तर्क सीधा है: सरकारों को अपनी राष्ट्रीय तकनीकी रणनीति पर नियंत्रण छोड़े बिना सहयोग के कई प्रारूपों में भाग लेने की अनुमति होनी चाहिए।
बीजिंग का गुटबंदी के विरोध वाला तर्क यह नहीं दिखाता कि प्रतिस्पर्धा खत्म हो रही है। WAICO चीन-प्रायोजित संस्था है और इससे AI शासन, मानकों तथा तकनीकी संबंधों पर बीजिंग का प्रभाव बढ़ सकता है—भले ही वह खुद को समावेशी और विकासोन्मुख मंच के रूप में प्रस्तुत करे। विश्लेषकों ने इसकी सदस्यता को मुख्यतः गैर-पश्चिमी और ग्लोबल साउथ-केंद्रित बताया है।
यही इस विवाद का केंद्रीय तनाव है। अमेरिका गठबंधन की सदस्यता और रणनीतिक आपूर्ति शृंखलाओं के जरिए देशों को अपने साथ संरेखित करने की कोशिश कर रहा है। चीन संप्रभुता, समावेश और विकास सहयोग की भाषा के जरिए इस विचार को चुनौती दे रहा है कि देशों को अनिवार्य रूप से किसी एक शक्ति के साथ खड़ा होना होगा।
दोनों दृष्टिकोण उन्हीं देशों और उन्हीं वैश्विक नियमों पर प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जो AI के अगले चरण को आकार देंगे। 35 हस्ताक्षरकर्ता देशों के लिए व्यावहारिक सवाल अब केवल यह नहीं है कि बेहतर AI सहयोग किस ढांचे में मिलेगा। सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका-नेतृत्व वाले आपूर्ति शृंखला गठबंधन में भागीदारी चीन समर्थित शासन संगठन की सदस्यता के साथ संगत रह सकती है—और यदि नहीं, तो हर देश के पास अपनी तकनीकी नीति तय करने की कितनी स्वतंत्रता बचेगी।
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चीन ने 19 अगस्त को 35 AI साझेदार देशों पर अमेरिकी दबाव का विरोध करते हुए कहा कि देशों को AI पर गुट चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और उनकी ‘डिजिटल संप्रभुता’ का सम्मान होना चाहिए। [44][45]
चीन ने 19 अगस्त को 35 AI साझेदार देशों पर अमेरिकी दबाव का विरोध करते हुए कहा कि देशों को AI पर गुट चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और उनकी ‘डिजिटल संप्रभुता’ का सम्मान होना चाहिए। [44][45] अमेरिका का Pax Silica गठबंधन AI मॉडल, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं पर भरोसेमंद सहयोग पर केंद्रित है, जबकि चीन समर्थित WAICO AI शासन, सुरक्षा, नवाचार और विकास सहयोग का मंच बनने का दावा करता है।
यह विवाद दिखाता है कि AI की आपूर्ति शृंखलाएं और वैश्विक नियम अब भू राजनीतिक प्रभाव के साधन बन रहे हैं—और विकासशील देश दोनों महाशक्तियों के तकनीकी गुटों में से किसी एक को चुनने के दबाव का विरोध कर सकते हैं।