3. शेयर सूचकांक रिकॉर्ड ऊँचाइयों के करीब
दुनिया के प्रमुख स्टॉक इंडेक्स अपने उच्च स्तरों के आसपास ट्रेड कर रहे थे, जिससे यह धारणा मजबूत हुई कि अर्थव्यवस्था अभी भी अपेक्षा से अधिक मजबूत है।
4. AI और टेक निवेश की लंबी थीम
कंपनियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश की उम्मीद ने भी बाज़ार के प्रति सकारात्मक भावना को बढ़ावा दिया।
इन सभी कारकों ने मिलकर निवेशकों की भावना को कुछ ही हफ्तों में सावधानी से आशावाद की ओर मोड़ दिया।
मई का यह तेज़ पलटाव इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि अप्रैल का सर्वे बिल्कुल विपरीत तस्वीर दिखा रहा था।
उस समय स्थिति यह थी:
मई का सर्वे इसलिए एक तेज़ बदलाव दिखाता है—सिर्फ एक महीने में निवेशक डिफेंसिव पोज़िशन से आक्रामक इक्विटी खरीद की ओर लौट आए।
दिलचस्प बात यह है कि साल की शुरुआत में निवेशक पहले से ही काफी आशावादी थे।
पहले के सर्वे बताते हैं:
कम कैश का मतलब होता है कि निवेशक पहले से ही बड़े पैमाने पर निवेश कर चुके हैं, इसलिए बाज़ार में नया पैसा आने की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
इतनी तेज़ी से बदली निवेशक भावना अल्पकाल में बाज़ार को सहारा दे सकती है, लेकिन इससे कुछ जोखिम भी पैदा होते हैं।
भीड़भाड़ वाली पोज़िशनिंग
जब बड़ी संख्या में निवेशक एक साथ शेयर खरीदते हैं, तो आगे नई खरीद की गुंजाइश कम रह जाती है।
नीतिगत उम्मीदों पर निर्भरता
काफी आशावाद इस उम्मीद पर टिका है कि फेड ब्याज दरें घटाएगा। अगर महंगाई कम नहीं हुई और दर कटौती टल गई, तो शेयर बाज़ार पर दबाव आ सकता है।
वैश्विक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता
अप्रैल में जो आर्थिक मंदी की आशंका सामने आई थी, वह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कमजोर आर्थिक डेटा फिर से भावना बदल सकता है।
Bank of America का यह सर्वे दिखाता है कि बड़े निवेशकों का मूड कितनी तेजी से बदल सकता है:
इन तेज़ उतार‑चढ़ाव से एक बात साफ होती है—आज के वैश्विक बाज़ार में निवेशक पोज़िशनिंग और भावना बहुत तेजी से बदल सकती है, खासकर जब आर्थिक वृद्धि, कॉरपोरेट कमाई या मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदें बदलती हैं।