21 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत में उतार-चढ़ाव के पीछे दो विपरीत संकेत थे। खाड़ी में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भाव को $110 प्रति बैरल के पार पहुंचाया। लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की अपेक्षाकृत मजबूत आवाजाही ने तेजी को सीमित किया। अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में गिरावट ने शुरुआती बढ़त को सहारा दिया, मगर पूरे कारोबारी सत्र में कीमतें लगातार ऊपर नहीं रहीं।
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आपूर्ति को लेकर चिंता से मिली तेजी
मंगलवार को ब्रेंट का भाव $111.99 तक पहुंचा था—पांच महीने का उच्च स्तर—लेकिन कारोबार के अंत में यह 76 सेंट गिरकर $108.79 पर बंद हुआ। बुधवार को दिसंबर वायदा अनुबंध 03:50 GMT पर $1.59 यानी 1.5% चढ़कर $110.38 पर था। रॉयटर्स के एक बाद के अपडेट में 07:47 GMT पर भाव $110.11 बताया गया, जो $1.32 की बढ़त थी। ये दिन के अलग-अलग समय के भाव हैं, बंद भाव नहीं।
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तत्काल चिंता यह थी कि हमलों से तेल की ढुलाई या ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। जहाज़ों की आवाजाही पर नज़र रखने वाली कंपनी Kpler ने पिछले दो हफ्तों में कम-से-कम 18 जहाज़ों पर हमले दर्ज किए। विश्लेषकों ने यह भी चेताया कि ईरान की टैंकरों को निशाना बनाने की कार्रवाई होर्मुज़ से आगे ओमान की खाड़ी तक फैली थी। व्यापारी लाल सागर में जहाज़रानी के जोखिम और सऊदी ऊर्जा ढांचे को मिल रही धमकियों पर भी नज़र रख रहे थे।
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कूटनीति से भी तत्काल राहत के संकेत नहीं मिले। मध्यस्थता प्रयासों के तहत तेहरान गए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से ईरान ने कहा कि उसकी मांगें पूरी होने तक वह वॉशिंगटन से बातचीत नहीं करेगा। उपलब्ध रिपोर्ट में उन मांगों का ब्योरा नहीं दिया गया है।
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फिर क्यों कम हुई बढ़त?
कीमत तय करते समय भू-राजनीतिक जोखिम ही एकमात्र पहलू नहीं था। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की अपेक्षाकृत मजबूत आवाजाही ने जहाज़ों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की चिंताओं को कुछ हद तक संतुलित किया। बुधवार को ब्रेंट कुछ समय के लिए $108 से नीचे भी गया। रॉयटर्स की एक बाद की रिपोर्ट में 14:50 GMT पर इसका भाव $109.04 था। यानी दिन के दौरान कीमत में उतार-चढ़ाव हुआ; $108 से नीचे का स्तर दिन का अंतिम बंद भाव नहीं था।
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आपूर्ति की बहाली उल्लेखनीय थी, लेकिन पूरी नहीं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, खाड़ी के तेल उत्पादकों का कच्चे तेल का निर्यात सितंबर में 4.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन बढ़कर 13.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया। यह युद्ध से पहले के स्तर का 75% से अधिक था। बढ़ते भौतिक प्रवाह ने सुरक्षा चिंताएं बनी रहने के बावजूद कीमतों की तेजी को सीमित करने में मदद की।
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अमेरिकी भंडार में गिरावट ने दिया सहारा
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में व्यावसायिक कच्चे तेल का भंडार करीब 3.1 मिलियन बैरल घटकर 412.5 मिलियन बैरल रह गया। यह साल के इस समय के पांच साल के औसत से करीब 3% कम था। गिरावट रॉयटर्स के सर्वे में अनुमानित 820,000 बैरल से कहीं बड़ी थी। इससे एक दिन पहले अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) ने 4.93 मिलियन बैरल की कमी का अपना अनुमान जारी किया था।
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पेट्रोलियम उत्पादों के आंकड़े मिले-जुले रहे: गैसोलीन भंडार करीब 3.0 मिलियन बैरल घटा, जबकि डिस्टिलेट भंडार 1.7 मिलियन बैरल बढ़ा। इसलिए रिपोर्ट में कच्चे तेल और गैसोलीन के भंडार में कमी दिखी, लेकिन हर ईंधन श्रेणी में नहीं।
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कुल मिलाकर, उस दिन बाजार में दो ताकतों के बीच खींचतान रही। जहाज़रानी और कूटनीति से जुड़े जोखिमों ने आपूर्ति घटने की आशंका बढ़ाई; दूसरी ओर, खाड़ी से निर्यात की बहाली और होर्मुज़ में आवाजाही ने संकेत दिया कि ज्यादा तेल बाजार तक पहुंच रहा है। अमेरिकी कच्चे तेल के घटते भंडार ने शुरुआती तेजी को बल दिया, पर सुधरते प्रवाह का असर भी बना रहा।
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