क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है। प्रयोग में एक ही परमाणु तरंग के दो सुसंगत पथों की तुलना हुई: एक को चुंबकीय क्षेत्रों से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे को मुक...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did an international team led by researchers at Ben-Gurion University of the Negev, the University of Ulm, and the University of Oxford. Article summary: The Quantum Galileo Interferometer directly measured the gravity-induced phase accumulated by a freely falling atomic matter wave, and found the phase predicted when quantum mechanics is treated consistently with Einstei. Topic tags: general, education, academic, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, waterm
बेन्-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव, यूनिवर्सिटी ऑफ उल्म और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से जुड़े शोधकर्ताओं ने पहली बार मुक्त-पतन करते एक क्वांटम पिंड के लिए अनुमानित गुरुत्वाकर्षणीय फेज को सीधे मापा है। उनके क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर में अति-शीतल रुबिडियम परमाणुओं की एक पदार्थ-तरंग के दो हिस्सों की तुलना की गई—एक हिस्सा प्रयोगशाला के सापेक्ष थामा गया और दूसरा स्वतंत्र रूप से गिरा। मापा गया फेज आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत को इस निम्न-ऊर्जा क्वांटम स्थिति में लागू करने पर मिलने वाले अनुमान से मेल खाया। 1
2
रुबिडियम परमाणुओं को बेहद कम तापमान तक ठंडा किया गया, ताकि उनके तरंग-जैसे क्वांटम व्यवहार को सुसंगत ढंग से नियंत्रित किया जा सके। उपकरण ने परमाणुओं की क्वांटम तरंग-फलन को दो अलग-अलग स्थानिक तरंग-पैकेट पथों में बांट दिया। 1
2
इनमें से एक पथ को चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से प्रयोगशाला के सापेक्ष लगभग स्थिर रखा गया। दूसरे पथ को प्रक्षेपित करने के बाद मुक्त-पतन में छोड़ दिया गया—अर्थात उसके गिरने के दौरान प्रयोगकर्ताओं ने उस शाखा पर कोई बल नहीं लगाया। 2
निर्धारित समय के बाद दोनों पथों को फिर मिलाया गया। पानी की दो लहरों की तरह, वे एक-दूसरे के साथ व्यतिकरण करती हैं। इसी व्यतिकरण में उनका सापेक्ष फेज दर्ज होता है: दोनों पथों पर क्वांटम तरंग के विकास में जमा हुआ अंतर। एक शाखा गिर रही थी और दूसरी को सहारा दिया गया था; इसलिए माप मुक्त-पतन से जुड़े फेज को अलग से पकड़ सका। 2
आइंस्टीन का तुल्यता सिद्धांत कहता है कि स्थानीय स्तर पर मुक्त-पतन कर रहे प्रेक्षक को गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव गायब-सा लगता है। नया परिणाम यह परखता है कि जब पदार्थ-तरंग एक साथ अलग-अलग पथों पर फैली हुई हो, तब यह सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी के साथ कैसे बैठता है।
मापा गया सापेक्ष फेज मुक्त-पतन के अनुमानित फेज से मेल खाया। जिस सीमा में प्रयोग किया गया, यह इस बात का प्रमाण है कि तुल्यता सिद्धांत को सिर्फ एक निश्चित पथ वाले शास्त्रीय कण पर नहीं, बल्कि क्वांटम पिंड पर भी सुसंगत रूप से लागू किया जा सकता है। 1
2
यह इसलिए खास है कि प्रयोग केवल परमाणुओं के बादल का औसत त्वरण नहीं मापता। परमाणु के तरंग-फलन को अध्यारोपण (सुपरपोजिशन) में रखा गया और उसकी दो शाखाओं के बीच फेज-अंतर पढ़ा गया। 1
2
इसे क्वांटम ग्रैविटी की खोज कहना सही नहीं होगा।
यह न तो क्वांटम यांत्रिकी और सामान्य सापेक्षता को एकीकृत करता है, न ही ऐसा सिद्धांत देता है। इस तरह की निम्न-ऊर्जा गणना में परमाणु को क्वांटम पिंड माना जाता है, जबकि गुरुत्वाकर्षण को एक शास्त्रीय पृष्ठभूमि-क्षेत्र की तरह लिया जाता है। प्रयोग ने बस दिखाया कि जांची गई परिस्थितियों में यह व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला ढांचा सही फेज का अनुमान देता है। 2
यह भी स्थापित नहीं करता कि गुरुत्वाकर्षण स्वयं क्वांटम क्षेत्र है या वह क्वांटम सूचना ले जा सकता है। अब तक किसी प्रयोग ने गुरुत्वाकर्षणीय अंतःक्रिया की क्वांटम विशेषताओं का निर्णायक प्रमाण नहीं दिया है। 48
55
उस सवाल तक पहुंचने का एक चर्चित प्रस्ताव यह है कि दो द्रव्यमान पिंडों को क्वांटम अवस्थाओं में रखकर देखा जाए कि क्या केवल उनकी गुरुत्वाकर्षणीय अंतःक्रिया से उनके बीच एंटैंगलमेंट बनता है। मगर ऐसे प्रयोगों की व्याख्या सैद्धांतिक मान्यताओं पर निर्भर करती है। हालिया शोध में इस पर बहस जारी है कि क्या कुछ शास्त्रीय-गुरुत्वाकर्षण ढांचे भी एंटैंगलमेंट-जैसे प्रभाव पैदा कर सकते हैं। 51
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रोजर पेनरोज़ ने प्रस्ताव रखा है कि पर्याप्त बड़े स्थानिक अध्यारोपण अपनी अलग-अलग द्रव्यमान-वितरणों के कारण स्वतः सुसंगति खो सकते हैं। क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने इसके बजाय परमाणु पदार्थ-तरंगों का सुसंगत फेज मापा; इसे भारी और लंबे समय तक बने रहने वाले अध्यारोपणों में व्यतिकरण की दृश्यता के असामान्य क्षय को खोजने के लिए नहीं बनाया गया था।
ऐसे पतन प्रस्तावों की जांच के लिए द्रव्यमान, स्थानिक अलगाव और सुसंगति-समय को बदल सकने वाले प्रयोग चाहिए, जिनमें साधारण डीकोहेरेंस के स्रोतों को भी हटाया जा सके। टक्करों, विद्युत-चुंबकीय शोर, कंपन और उपकरणों की खामियों से भी व्यतिकरण की दृश्यता घट सकती है—बिना किसी नए गुरुत्वाकर्षणीय तंत्र के।
इसलिए नया माप उस परमाणवीय सीमा में सामान्य क्वांटम सुसंगति का समर्थन करता है जिसे उसने जांचा। यह बड़े पिंडों के लिए प्रस्तावित पतन मॉडलों की न तो पुष्टि करता है, न उन्हें निर्णायक रूप से खारिज करता है।
नैनोडायमंड वाले प्रस्तावित इंटरफेरोमीटर पदार्थ-तरंग प्रयोगों को काफी अधिक द्रव्यमान की सीमा तक ले जाना चाहते हैं। नैनोडायमंड में मौजूद नाइट्रोजन-वैकेंसी (NV) केंद्र एक स्पिन डिग्री ऑफ फ्रीडम दे सकता है, जिसका उपयोग चुंबकीय ग्रेडिएंट से स्थानिक अध्यारोपण बनाने और नियंत्रित करने में किया जा सकता है। 17
21
एक चिप-आधारित प्रस्ताव लगभग (10^{-19}) से (10^{-15}) किलोग्राम द्रव्यमान वाले कणों को लक्ष्य बनाता है। 20 ऐसे प्रयोग जांच सकेंगे कि पिंड का द्रव्यमान बढ़ने और पर्यावरण से उसका असर बढ़ने पर भी क्वांटम सुसंगति बची रहती है या नहीं।
यदि पर्याप्त रूप से अलग-थलग रखा गया भारी अध्यारोपण किसी खास पतन मॉडल की अनुमानित सीमा से अधिक समय तक बना रहे, तो वह मॉडल सीमित किया जा सकता है। लेकिन यदि व्यतिकरण मिटे, तो पहले यह दिखाना होगा कि उसका कारण साधारण डीकोहेरेंस नहीं है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर और चीन के अंतरिक्ष स्टेशन तियांगोंग का परमाणु-इंटरफेरोमेट्री प्रयोग—दोनों में गुरुत्वाकर्षण और अति-शीतल परमाणु शामिल हैं—मगर उनके सवाल अलग हैं।
तियांगोंग ने कक्षा में (^{85})Rb/(^{87})Rb का द्वि-प्रजाति परमाणु इंटरफेरोमीटर इस्तेमाल कर रुबिडियम के दो समस्थानिकों के मुक्त-पतन त्वरणों की तुलना की। 280 दिनों के आंकड़ों से कमजोर तुल्यता सिद्धांत परीक्षण की अनिश्चितता (2.8\times10^{-8}) बताई गई और परिणाम ((-3.1\pm4.6)\times10^{-7}) रिपोर्ट किया गया। 35
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यह मुक्त-पतन की सार्वभौमिकता का परीक्षण है: क्या अलग-अलग परीक्षण पिंड एक ही गुरुत्वीय क्षेत्र में समान ढंग से त्वरण पाते हैं?
इसके विपरीत, क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर एक ही सुसंगत पदार्थ-तरंग की दो शाखाओं—एक समर्थित और दूसरी मुक्त-पतन में—की तुलना करके मुक्त-पतन के अनुमानित क्वांटम फेज को मापता है। 2
दोनों प्रयोग क्वांटम परमाणुओं के साथ तुल्यता-सिद्धांत संबंधी भौतिकी का समर्थन करते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी, अपने-आप में, यह नहीं दिखाता कि गुरुत्वाकर्षण क्वांटित है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने एक सटीक लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है: उसने मुक्त-पतन करती परमाणु पदार्थ-तरंग का गुरुत्वाकर्षण से अनुमानित फेज सीधे देखा। सिद्धांत के साथ इसकी संगति, नियंत्रित क्वांटम अध्यारोपण वाली स्थिति तक तुल्यता सिद्धांत की जांच को विस्तृत करती है। 1
2
इसे सबसे सही ढंग से ऐसे समझना चाहिए: यह मजबूत साक्ष्य है कि मापी गई निम्न-ऊर्जा सीमा में क्वांटम यांत्रिकी और आइंस्टीन का तुल्यता सिद्धांत परस्पर संगत हैं। यह न तो क्वांटम ग्रैविटी का पूर्ण सिद्धांत है और न ही गुरुत्वाकर्षण-प्रेरित क्वांटम पतन की जांच।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है। प्रयोग में एक ही परमाणु तरंग के दो सुसंगत पथों की तुलना हुई: एक को चुंबकीय क्षेत्रों से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे को मुक्त रूप से गिरने दिया गया।
नैनोडायमंड जैसे भारी पिंडों के प्रस्तावित प्रयोग यह जांच सकते हैं कि अधिक द्रव्यमान पर क्वांटम सुसंगति कितनी देर बनी रहती है; हालांकि किसी नए प्रभाव को सामान्य पर्यावरणीय डीकोहेरेंस से अलग करना जरूरी होगा।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है। प्रयोग में एक ही परमाणु तरंग के दो सुसंगत पथों की तुलना हुई: एक को चुंबकीय क्षेत्रों से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे को मुक...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did an international team led by researchers at Ben-Gurion University of the Negev, the University of Ulm, and the University of Oxford. Article summary: The Quantum Galileo Interferometer directly measured the gravity-induced phase accumulated by a freely falling atomic matter wave, and found the phase predicted when quantum mechanics is treated consistently with Einstei. Topic tags: general, education, academic, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, waterm
बेन्-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव, यूनिवर्सिटी ऑफ उल्म और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से जुड़े शोधकर्ताओं ने पहली बार मुक्त-पतन करते एक क्वांटम पिंड के लिए अनुमानित गुरुत्वाकर्षणीय फेज को सीधे मापा है। उनके क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर में अति-शीतल रुबिडियम परमाणुओं की एक पदार्थ-तरंग के दो हिस्सों की तुलना की गई—एक हिस्सा प्रयोगशाला के सापेक्ष थामा गया और दूसरा स्वतंत्र रूप से गिरा। मापा गया फेज आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत को इस निम्न-ऊर्जा क्वांटम स्थिति में लागू करने पर मिलने वाले अनुमान से मेल खाया। 1
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रुबिडियम परमाणुओं को बेहद कम तापमान तक ठंडा किया गया, ताकि उनके तरंग-जैसे क्वांटम व्यवहार को सुसंगत ढंग से नियंत्रित किया जा सके। उपकरण ने परमाणुओं की क्वांटम तरंग-फलन को दो अलग-अलग स्थानिक तरंग-पैकेट पथों में बांट दिया। 1
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इनमें से एक पथ को चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से प्रयोगशाला के सापेक्ष लगभग स्थिर रखा गया। दूसरे पथ को प्रक्षेपित करने के बाद मुक्त-पतन में छोड़ दिया गया—अर्थात उसके गिरने के दौरान प्रयोगकर्ताओं ने उस शाखा पर कोई बल नहीं लगाया। 2
निर्धारित समय के बाद दोनों पथों को फिर मिलाया गया। पानी की दो लहरों की तरह, वे एक-दूसरे के साथ व्यतिकरण करती हैं। इसी व्यतिकरण में उनका सापेक्ष फेज दर्ज होता है: दोनों पथों पर क्वांटम तरंग के विकास में जमा हुआ अंतर। एक शाखा गिर रही थी और दूसरी को सहारा दिया गया था; इसलिए माप मुक्त-पतन से जुड़े फेज को अलग से पकड़ सका। 2
आइंस्टीन का तुल्यता सिद्धांत कहता है कि स्थानीय स्तर पर मुक्त-पतन कर रहे प्रेक्षक को गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव गायब-सा लगता है। नया परिणाम यह परखता है कि जब पदार्थ-तरंग एक साथ अलग-अलग पथों पर फैली हुई हो, तब यह सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी के साथ कैसे बैठता है।
मापा गया सापेक्ष फेज मुक्त-पतन के अनुमानित फेज से मेल खाया। जिस सीमा में प्रयोग किया गया, यह इस बात का प्रमाण है कि तुल्यता सिद्धांत को सिर्फ एक निश्चित पथ वाले शास्त्रीय कण पर नहीं, बल्कि क्वांटम पिंड पर भी सुसंगत रूप से लागू किया जा सकता है। 1
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यह इसलिए खास है कि प्रयोग केवल परमाणुओं के बादल का औसत त्वरण नहीं मापता। परमाणु के तरंग-फलन को अध्यारोपण (सुपरपोजिशन) में रखा गया और उसकी दो शाखाओं के बीच फेज-अंतर पढ़ा गया। 1
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इसे क्वांटम ग्रैविटी की खोज कहना सही नहीं होगा।
यह न तो क्वांटम यांत्रिकी और सामान्य सापेक्षता को एकीकृत करता है, न ही ऐसा सिद्धांत देता है। इस तरह की निम्न-ऊर्जा गणना में परमाणु को क्वांटम पिंड माना जाता है, जबकि गुरुत्वाकर्षण को एक शास्त्रीय पृष्ठभूमि-क्षेत्र की तरह लिया जाता है। प्रयोग ने बस दिखाया कि जांची गई परिस्थितियों में यह व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला ढांचा सही फेज का अनुमान देता है। 2
यह भी स्थापित नहीं करता कि गुरुत्वाकर्षण स्वयं क्वांटम क्षेत्र है या वह क्वांटम सूचना ले जा सकता है। अब तक किसी प्रयोग ने गुरुत्वाकर्षणीय अंतःक्रिया की क्वांटम विशेषताओं का निर्णायक प्रमाण नहीं दिया है। 48
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उस सवाल तक पहुंचने का एक चर्चित प्रस्ताव यह है कि दो द्रव्यमान पिंडों को क्वांटम अवस्थाओं में रखकर देखा जाए कि क्या केवल उनकी गुरुत्वाकर्षणीय अंतःक्रिया से उनके बीच एंटैंगलमेंट बनता है। मगर ऐसे प्रयोगों की व्याख्या सैद्धांतिक मान्यताओं पर निर्भर करती है। हालिया शोध में इस पर बहस जारी है कि क्या कुछ शास्त्रीय-गुरुत्वाकर्षण ढांचे भी एंटैंगलमेंट-जैसे प्रभाव पैदा कर सकते हैं। 51
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रोजर पेनरोज़ ने प्रस्ताव रखा है कि पर्याप्त बड़े स्थानिक अध्यारोपण अपनी अलग-अलग द्रव्यमान-वितरणों के कारण स्वतः सुसंगति खो सकते हैं। क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने इसके बजाय परमाणु पदार्थ-तरंगों का सुसंगत फेज मापा; इसे भारी और लंबे समय तक बने रहने वाले अध्यारोपणों में व्यतिकरण की दृश्यता के असामान्य क्षय को खोजने के लिए नहीं बनाया गया था।
ऐसे पतन प्रस्तावों की जांच के लिए द्रव्यमान, स्थानिक अलगाव और सुसंगति-समय को बदल सकने वाले प्रयोग चाहिए, जिनमें साधारण डीकोहेरेंस के स्रोतों को भी हटाया जा सके। टक्करों, विद्युत-चुंबकीय शोर, कंपन और उपकरणों की खामियों से भी व्यतिकरण की दृश्यता घट सकती है—बिना किसी नए गुरुत्वाकर्षणीय तंत्र के।
इसलिए नया माप उस परमाणवीय सीमा में सामान्य क्वांटम सुसंगति का समर्थन करता है जिसे उसने जांचा। यह बड़े पिंडों के लिए प्रस्तावित पतन मॉडलों की न तो पुष्टि करता है, न उन्हें निर्णायक रूप से खारिज करता है।
नैनोडायमंड वाले प्रस्तावित इंटरफेरोमीटर पदार्थ-तरंग प्रयोगों को काफी अधिक द्रव्यमान की सीमा तक ले जाना चाहते हैं। नैनोडायमंड में मौजूद नाइट्रोजन-वैकेंसी (NV) केंद्र एक स्पिन डिग्री ऑफ फ्रीडम दे सकता है, जिसका उपयोग चुंबकीय ग्रेडिएंट से स्थानिक अध्यारोपण बनाने और नियंत्रित करने में किया जा सकता है। 17
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एक चिप-आधारित प्रस्ताव लगभग (10^{-19}) से (10^{-15}) किलोग्राम द्रव्यमान वाले कणों को लक्ष्य बनाता है। 20 ऐसे प्रयोग जांच सकेंगे कि पिंड का द्रव्यमान बढ़ने और पर्यावरण से उसका असर बढ़ने पर भी क्वांटम सुसंगति बची रहती है या नहीं।
यदि पर्याप्त रूप से अलग-थलग रखा गया भारी अध्यारोपण किसी खास पतन मॉडल की अनुमानित सीमा से अधिक समय तक बना रहे, तो वह मॉडल सीमित किया जा सकता है। लेकिन यदि व्यतिकरण मिटे, तो पहले यह दिखाना होगा कि उसका कारण साधारण डीकोहेरेंस नहीं है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर और चीन के अंतरिक्ष स्टेशन तियांगोंग का परमाणु-इंटरफेरोमेट्री प्रयोग—दोनों में गुरुत्वाकर्षण और अति-शीतल परमाणु शामिल हैं—मगर उनके सवाल अलग हैं।
तियांगोंग ने कक्षा में (^{85})Rb/(^{87})Rb का द्वि-प्रजाति परमाणु इंटरफेरोमीटर इस्तेमाल कर रुबिडियम के दो समस्थानिकों के मुक्त-पतन त्वरणों की तुलना की। 280 दिनों के आंकड़ों से कमजोर तुल्यता सिद्धांत परीक्षण की अनिश्चितता (2.8\times10^{-8}) बताई गई और परिणाम ((-3.1\pm4.6)\times10^{-7}) रिपोर्ट किया गया। 35
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यह मुक्त-पतन की सार्वभौमिकता का परीक्षण है: क्या अलग-अलग परीक्षण पिंड एक ही गुरुत्वीय क्षेत्र में समान ढंग से त्वरण पाते हैं?
इसके विपरीत, क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर एक ही सुसंगत पदार्थ-तरंग की दो शाखाओं—एक समर्थित और दूसरी मुक्त-पतन में—की तुलना करके मुक्त-पतन के अनुमानित क्वांटम फेज को मापता है। 2
दोनों प्रयोग क्वांटम परमाणुओं के साथ तुल्यता-सिद्धांत संबंधी भौतिकी का समर्थन करते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी, अपने-आप में, यह नहीं दिखाता कि गुरुत्वाकर्षण क्वांटित है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने एक सटीक लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है: उसने मुक्त-पतन करती परमाणु पदार्थ-तरंग का गुरुत्वाकर्षण से अनुमानित फेज सीधे देखा। सिद्धांत के साथ इसकी संगति, नियंत्रित क्वांटम अध्यारोपण वाली स्थिति तक तुल्यता सिद्धांत की जांच को विस्तृत करती है। 1
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इसे सबसे सही ढंग से ऐसे समझना चाहिए: यह मजबूत साक्ष्य है कि मापी गई निम्न-ऊर्जा सीमा में क्वांटम यांत्रिकी और आइंस्टीन का तुल्यता सिद्धांत परस्पर संगत हैं। यह न तो क्वांटम ग्रैविटी का पूर्ण सिद्धांत है और न ही गुरुत्वाकर्षण-प्रेरित क्वांटम पतन की जांच।
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क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने मुक्त पतन करती रुबिडियम पदार्थ तरंग का गुरुत्वाकर्षणीय फेज मापा, जो आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत पर आधारित निम्न ऊर्जा अनुमान से मेल खाता है। प्रयोग में एक ही परमाणु तरंग के दो सुसंगत पथों की तुलना हुई: एक को चुंबकीय क्षेत्रों से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे को मुक्त रूप से गिरने दिया गया।
नैनोडायमंड जैसे भारी पिंडों के प्रस्तावित प्रयोग यह जांच सकते हैं कि अधिक द्रव्यमान पर क्वांटम सुसंगति कितनी देर बनी रहती है; हालांकि किसी नए प्रभाव को सामान्य पर्यावरणीय डीकोहेरेंस से अलग करना जरूरी होगा।