IMF बताता है कि किसी तारकीय आबादी में अलग-अलग द्रव्यमान वाले कितने तारे बनते हैं। 'बॉटम-हेवी' IMF में कम-द्रव्यमान वाले तारों का अनुपात अधिक होता है।
ऐसे छोटे तारे बहुत कम चमकते हैं, इसलिए सामान्य अवलोकनों में वे आसानी से छिप सकते हैं। लेकिन वे लंबे समय तक जीवित रहते हैं और उनकी संख्या बहुत अधिक होने पर वे आकाशगंगा के कुल तारकीय द्रव्यमान में बड़ा योगदान देते हैं। यदि किसी आकाशगंगा का द्रव्यमान मिल्की वे जैसे IMF को मानकर निकाला जाए, जबकि उसमें वास्तव में बॉटम-हेवी IMF हो, तो उसके तारों का कुल द्रव्यमान कम आंका जाएगा।
अध्ययन में शामिल सभी नौ विशाल, शांत आकाशगंगाओं में इस बॉटम-हेवी पैटर्न के संकेत मिले।
इस प्रभाव का सबसे बड़ा असर नमूने की दो सबसे पुरानी आकाशगंगाओं पर पड़ा। इन्हें JWST द्वारा खोजी गई असामान्य रूप से शुरुआती, परिपक्व आकाशगंगाओं के प्रत्यक्ष वंशज माना जाता है। बॉटम-हेवी IMF को शामिल करने पर इन दोनों का अनुमानित तारकीय द्रव्यमान पहले के अनुमानों से 3 से 4 गुना अधिक हो जाता है।
यह मामूली सुधार नहीं है। इसका अर्थ है कि आकाशगंगा-निर्माण के मॉडलों को ब्रह्मांडीय इतिहास के बहुत कम समय में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक पदार्थ को तारों में बदलकर इकट्ठा करना होगा। इनमें से एक पुरानी तारकीय आबादी संभवतः बिग बैंग के 1.5 अरब वर्ष से भी कम समय बाद बनी थी। यदि उसके पूर्वजों में भी ऐसा ही IMF था, तो उस आकाशगंगा को पहले के अनुमान से भी अधिक तारकीय द्रव्यमान और उससे भी तेज गति से बनाना पड़ा होगा।
JWST ने पहले ही ऐसे विशाल और विकसित सिस्टम खोजे हैं, जो ब्रह्मांड के बेहद शुरुआती दौर में मौजूद थे। उदाहरण के लिए, शांत आकाशगंगा GS-9209 की स्पेक्ट्रोस्कोपिक पुष्टि 4.658 रेडशिफ्ट पर हुई थी—उस समय ब्रह्मांड की आयु लगभग 1.25 अरब वर्ष थी। उस विश्लेषण में इसका अनुमानित तारकीय द्रव्यमान लगभग 3.8 × 10^10 सौर द्रव्यमान निकाला गया था।
नया परिणाम सीधे उन आकाशगंगाओं का IMF नहीं मापता जो बिग बैंग के बाद शुरुआती कुछ सौ मिलियन वर्षों में मौजूद थीं। वर्तमान माप लगभग 0.7 रेडशिफ्ट वाली आकाशगंगाओं के हैं। इसलिए इन निष्कर्षों को JWST द्वारा देखी गई सबसे शुरुआती आकाशगंगाओं पर लागू करना एक वैज्ञानिक अनुमान है, प्रत्यक्ष माप नहीं।
फिर भी, यदि शुरुआती आकाशगंगाओं में भी कम-द्रव्यमान वाले तारों की ऐसी ही अधिकता थी, तो उनका वास्तविक तारकीय द्रव्यमान शुरुआती अनुमानों से काफी अधिक हो सकता है। इससे आकाशगंगा-निर्माण मॉडलों के सामने चुनौती कम नहीं, बल्कि और बड़ी हो जाती है। अब मॉडलों को यह समझाना होगा कि इतनी कम उम्र में आकाशगंगाएँ न केवल परिपक्व कैसे हुईं, बल्कि पहले की गणना से भी अधिक तारकीय द्रव्यमान इतनी तेजी से कैसे बना पाईं।
कम-द्रव्यमान वाले तारे लंबे समय तक जीवित रहते हैं और ग्रह-प्रणालियों के संभावित मेजबान हो सकते हैं। यदि युवा ब्रह्मांड में बॉटम-हेवी तारा-निर्माण आम था, तो मानक मिल्की वे जैसे IMF से लगाए गए अनुमान की तुलना में ऐसे तारों की संख्या अधिक रही होगी। इससे शुरुआती ब्रह्मांड में बनी संभावित ग्रह-प्रणालियों की संख्या का अनुमान भी बढ़ सकता है।
हालांकि, यह फिलहाल केवल एक संभावित निहितार्थ है। अध्ययन ने तारकीय आबादी को मापा है, ग्रहों की संख्या या ग्रह बनने की दर को नहीं। इसलिए इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन तारों के आसपास ग्रह कितनी बार बने या वे रहने योग्य थे।
शोधकर्ताओं की अगली योजना यही पद्धति और अधिक ऊँची रेडशिफ्ट वाली आकाशगंगाओं पर लागू करने की है। अलग-अलग तरंगदैर्ध्य-क्षेत्रों में प्राप्त बेहद गहरे स्पेक्ट्रा को मिलाकर वे यह जाँच सकेंगे कि कम-द्रव्यमान वाले तारों की अधिकता पहले तारों के युग के करीब भी बनी रही थी या नहीं।
जैसे-जैसे आकाशगंगाएँ अधिक दूर और पुरानी होती जाती हैं, IMF के संकेत देने वाली विशेषताएँ अवरक्त तरंगदैर्ध्य की ओर खिसक जाती हैं—ऐसे संकेतों को JWST देख सकता है। भविष्य के अवलोकन यह स्पष्ट करने में मदद करेंगे कि बॉटम-हेवी IMF केवल इन विशाल, शांत आकाशगंगाओं की विशेषता है, शुरुआती तारा-निर्माण की व्यापक प्रवृत्ति थी, या समय और वातावरण के साथ बदलती रही।