अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 24 सितंबर की व्हाइट हाउस बैठक से पहले AI की एक तकनीक—मॉडल डिस्टिलेशन—कूटनीतिक विवाद बन गई। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप था कि चीनी कंपनियों ने अमेरिकी AI मॉडल की क्षमताएँ हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर उनके जवाब जुटाए। चीन ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से क्षमताएँ निकालने के आरोपों को खारिज किया। इसी बीच दोनों देशों के अधिकारियों ने गंभीर AI सुरक्षा घटनाओं पर संपर्क बनाए रखने का प्रस्ताव भी सामने रखा।
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डिस्टिलेशन क्या है—और विवाद कहाँ शुरू होता है?
डिस्टिलेशन में एक AI मॉडल के जवाबों का उपयोग दूसरे मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है। इससे ऐसा छोटा या कम खर्चीला मॉडल बनाया जा सकता है जो पहले मॉडल के कुछ काम कर सके। यह AI शोध की स्थापित तकनीक है; डिस्टिलेशन शब्द अपने-आप में चोरी का पर्याय नहीं है।
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असली सवाल जवाब जुटाने और इस्तेमाल करने की अनुमति का है। अपने ही मॉडल के जवाबों से, या इजाजत लेकर, प्रशिक्षण करना उस स्थिति से अलग है जिसमें किसी दूसरी कंपनी की पाबंदियाँ दरकिनार कर उसके मॉडल से बड़ी मात्रा में जवाब लिए जाएँ। चीन का कहना है कि अमेरिकी कंपनियाँ भी डिस्टिलेशन इस्तेमाल करती हैं, लेकिन तकनीक का आम इस्तेमाल किसी खास कंपनी के आचरण पर लगे आरोप का जवाब नहीं है।
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5 उपलब्ध स्रोत स्वतंत्र रूप से यह स्थापित नहीं करते कि Anthropic अपने मॉडल विकसित करने में डिस्टिलेशन का किस तरह इस्तेमाल करती है।
अमेरिकी एजेंसियों ने क्या आरोप लगाया?
8 सितंबर को FBI, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NSA) और साइबर सुरक्षा एवं अवसंरचना सुरक्षा एजेंसी (CISA) ने एक संयुक्त साइबर सुरक्षा परामर्श जारी किया। उसमें DeepSeek, Moonshot AI, Alibaba, MiniMax, StepFun और Z.AI का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया कि कम-से-कम 2024 के आखिर से अमेरिकी अग्रणी AI मॉडल पर लाखों अनुरोध भेजकर अरबों टोकन—यानी मॉडल द्वारा संसाधित पाठ की इकाइयाँ—हासिल किए गए। एजेंसियों ने प्रभावित मॉडलों में Anthropic के Claude, OpenAI के GPT, Google के Gemini और xAI के Grok के संस्करणों का उल्लेख किया।
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परामर्श पर आधारित रिपोर्टिंग में कथित फर्जी खातों और प्रॉक्सी नेटवर्क का भी जिक्र है। एजेंसियों का आकलन था कि यह गतिविधि संभवतः चीनी सरकार की जानकारी में हुई; इसका अर्थ यह नहीं कि सरकारी निर्देश साबित हो गए। ये अमेरिकी आरोप हैं, छहों कंपनियों के खिलाफ चोरी का स्थापित निष्कर्ष नहीं। अलग से, Anthropic ने DeepSeek और Moonshot पर कुछ उपयोगकर्ता अनुरोध Claude तक पहुँचाने का आरोप लगाया है।
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विवाद सितंबर से पहले भी उठ चुका था। जुलाई में व्हाइट हाउस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार माइकल क्रैटसियोस ने Moonshot पर डिस्टिलेशन के जरिए अग्रणी अमेरिकी मॉडलों की क्षमताएँ हासिल करने के बड़े प्रयास का आरोप लगाया था। उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्थापित नहीं करती कि DeepSeek के प्रदर्शन या दक्षता ने ही OpenAI के आरोपों को जन्म दिया; बेहतर प्रदर्शन अपने-आप में बिना अनुमति जवाब हासिल करने का सबूत भी नहीं है।
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चीन का जवाब और बातचीत की गुंजाइश
चीनी अधिकारियों ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से AI क्षमताएँ निकालने के आरोपों को खारिज किया। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार पीपल्स डेली ने कहा कि AI ‘महाशक्तियों का एकाधिकार’ नहीं होना चाहिए और जोखिम प्रबंधन पर सहयोग तथा बिना भेदभाव वाले विकास वातावरण की वकालत की। यह रुख तकनीक तक पहुँच के व्यापक सवाल को उठाता है; इससे यह तय नहीं होता कि आरोपों में बताए गए तरीके अधिकृत थे या नहीं। उपलब्ध स्रोत छहों नामित कंपनियों में से हर एक की प्रतिक्रिया विश्वसनीय ढंग से दर्ज नहीं करते।
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सहयोग का फिलहाल सबसे ठोस संकेत एक प्रस्ताव है। न्यूयॉर्क में चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफंग से बातचीत के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ऐसी AI घटनाओं की सूचना साझा करने का तंत्र सुझाया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। इसे ट्रंप और शी के विचार के लिए रखा जाना था; उपलब्ध रिपोर्टिंग इसे लागू हो चुका समझौता नहीं बताती।
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ऐसा संपर्क-मार्ग खतरनाक घटना पर दोनों देशों को जल्दी बात करने में मदद कर सकता है। मगर अकेले इससे डिस्टिलेशन के आरोप नहीं सुलझेंगे, AI विकास की सीमाएँ तय नहीं होंगी और उन्नत AI चिपों के निर्यात पर अमेरिकी पाबंदियाँ भी नहीं बदलेंगी। यही इस विवाद की कसौटी है: क्या अमेरिका और चीन अधिकृत मॉडल प्रशिक्षण तथा कथित अनधिकृत निकासी में फर्क तय कर पाएँगे, जबकि साझा जोखिमों पर संवाद भी जारी रखेंगे?
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