वैश्विक खाद्य बाजार फिर से अस्थिरता की ओर बढ़ सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 में एल नीनो की स्थिति बनने और 2027 की शुरुआत तक जारी रहने की संभावना है, जो दुनिया भर में वर्षा के पैटर्न और कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इसी समय ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में बाधाएँ भी किसानों की लागत बढ़ा रही हैं।
इन दोनों कारकों के मिलकर असर डालने से आने वाले 6–12 महीनों में फसल उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों में वृद्धि का जोखिम बढ़ जाता है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के अनुसार मई–जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना लगभग 82% है और इसके 2026–27 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक जारी रहने की संभावना 96% है।
एल नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण बदल जाता है और कई क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न उलट जाते हैं। पिछले एल नीनो चक्रों में आम तौर पर यह देखा गया है कि:
क्योंकि कई प्रमुख फसलें मौसमी बारिश पर निर्भर करती हैं, इसलिए थोड़ी सी जलवायु गड़बड़ी भी उत्पादन में उल्लेखनीय बदलाव ला सकती है।
खाद्य कीमतों पर पहला असर सीधे मौसम से आता है: खराब मौसम का मतलब कमजोर फसल।
मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार 2026 के अंत तक इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और दक्षिण‑पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों में सूखे की स्थिति बन सकती है, जो आगे अन्य क्षेत्रों तक फैल सकती है।
कम वर्षा और अधिक तापमान कई महत्वपूर्ण फसलों की पैदावार घटा सकते हैं। विशेष रूप से संवेदनशील फसलें हैं:
ये अधिकांशतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती हैं—यही वे क्षेत्र हैं जहाँ एल नीनो अक्सर वर्षा पैटर्न बदल देता है। चूंकि इनमें से कई कमोडिटी के वैश्विक भंडार पहले से सीमित हैं, इसलिए उत्पादन में छोटा झटका भी कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि चीनी, कोको और कॉफी जैसे “सॉफ्ट कमोडिटी” एल नीनो से होने वाले मौसमीय झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं, जिससे आने वाले महीनों में कृषि वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ती है।
जलवायु जोखिम के साथ‑साथ कृषि पर एक और दबाव बढ़ रहा है—उत्पादन लागत।
मध्य‑पूर्व में तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापार बाधाओं के कारण ईंधन और उर्वरक की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और उर्वरक व्यापार मार्गों में से एक है।
विश्व बैंक के अनुसार 2026 की शुरुआत में उर्वरक कीमतों में तेज उछाल आया—फरवरी से मार्च के बीच यूरिया की कीमत लगभग 46% बढ़ गई।
उर्वरक और ऊर्जा महंगे होने से खाद्य बाजार कई तरीकों से प्रभावित होते हैं:
जब ऐसी लागतें मौसम से होने वाले नुकसान के साथ मिलती हैं, तो असर और ज्यादा बढ़ सकता है।
खाद्य महंगाई आम तौर पर एकदम से नहीं बढ़ती, बल्कि चरणों में बढ़ती है:
विश्व बैंक के अनुसार 2026 की शुरुआत में वैश्विक मुख्य खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर थीं, लेकिन ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में व्यवधान के कारण भविष्य के संकेतक खाद्य महंगाई बढ़ने की ओर इशारा कर रहे हैं।
खाद्य कीमतों में वृद्धि का असर हर जगह समान नहीं होता। जिन क्षेत्रों में लोगों की आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है, वहाँ इसका असर ज्यादा पड़ता है।
लैटिन अमेरिका और कैरिबियन इसका एक उदाहरण हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में भूख की स्थिति में सुधार हुआ है और 2024 में कुपोषण की दर लगभग 5.1% तक गिर गई।
फिर भी भोजन की लागत अभी भी बड़ी चुनौती है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 183 मिलियन लोग स्वस्थ आहार खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
इसलिए कमोडिटी कीमतों में थोड़ी भी वृद्धि निम्न‑आय वाले परिवारों पर बड़ा असर डाल सकती है।
हालाँकि एल नीनो बनने की संभावना बहुत अधिक है, लेकिन यह कितना मजबूत होगा और किस क्षेत्र को कितना प्रभावित करेगा—यह अभी स्पष्ट नहीं है। NOAA के पूर्वानुमानों में अभी किसी एक तीव्रता श्रेणी की स्पष्ट बढ़त नहीं दिख रही।
खाद्य कीमतों पर अंतिम प्रभाव तीन मुख्य कारकों पर निर्भर करेगा:
यदि मौसम का असर सीमित रहता है और उर्वरक आपूर्ति सामान्य हो जाती है, तो वैश्विक खाद्य कीमतों पर दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि मजबूत एल नीनो और लगातार आपूर्ति संकट साथ‑साथ चलते हैं, तो 2027 तक व्यापक खाद्य महंगाई का दौर देखने को मिल सकता है।
संभावित 2026–27 का एल नीनो ऐसे समय पर आ रहा है जब वैश्विक कृषि पहले से कई दबावों से जूझ रही है। जलवायु जोखिम, ऊर्जा संकट और सीमित कमोडिटी आपूर्ति—ये सभी एक साथ जुड़ रहे हैं।
अलग‑अलग देखने पर ये कारक छोटे लग सकते हैं, लेकिन मिलकर ये दुनिया भर के उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों—जैसे कॉफी, चॉकलेट, चीनी आधारित खाद्य और कुकिंग ऑयल—की कीमतों को ऊपर ले जा सकते हैं।
अंततः यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाला एल नीनो कितना तीव्र होता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ इस झटके को कितना संभाल पाती हैं।
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NOAA के अनुसार मई–जुलाई 2026 तक एल नीनो बनने की संभावना 82% और 2026–27 की सर्दियों तक बने रहने की संभावना 96% है, जो वैश्विक कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। [32][33]
NOAA के अनुसार मई–जुलाई 2026 तक एल नीनो बनने की संभावना 82% और 2026–27 की सर्दियों तक बने रहने की संभावना 96% है, जो वैश्विक कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। [32][33] एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में संभावित सूखा और गर्मी कॉफी, कोको, चीनी, चावल और पाम ऑयल जैसी फसलों की पैदावार घटा सकते हैं। [53]
उर्वरक और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएँ तथा बढ़ती लागत किसानों की उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे वैश्विक खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ता है। [17][21]
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