एआई कंपनी का यह कहना कि उसका सिस्टम सुरक्षित है, अपने आप में पर्याप्त सबूत नहीं है। भरोसा तब बनेगा जब योग्य बाहरी विशेषज्ञ सुरक्षा दावों को जाँच सकें और कमी मिलने पर नियामक बदलाव या इस्तेमाल पर रोक लगा सकें। सिंगापुर की मंत्री जोसेफीन टियो ने विमानन से तुलना की है: वहाँ सुरक्षा की कई परतों ने नियमित इस्तेमाल के लिए भरोसा बनाया; एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उसके लिए भी ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
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विमानन से सबक: नियम एक दिन में नहीं बने
अंतरराष्ट्रीय विमानन व्यवस्था से पहले राष्ट्रीय कानून और देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते थे। इसके बाद 1919 का पेरिस कन्वेंशन आया, 1944 के शिकागो कन्वेंशन ने नया ढाँचा दिया और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) 1947 में अस्तित्व में आया।
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35 एआई के लिए सबक विमानन की नियम-पुस्तिका की नकल करना नहीं, बल्कि छोटे, काम करने योग्य समझौतों से शुरू करके साझा तौर-तरीकों को मजबूत करना है।
एक प्रस्तावित ढाँचे में अंतरराष्ट्रीय संस्था न्यूनतम मानक तय कर सकती है, स्वतंत्र परीक्षकों को मान्यता दे सकती है और विभिन्न देशों में दर्ज घटनाओं से मिली जानकारी की तुलना कर सकती है। लेकिन निरीक्षण करना, सुधार का आदेश देना, इस्तेमाल सीमित करना और जुर्माना लगाना राष्ट्रीय नियामकों के हाथ में रहना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र घरेलू कानून के पालन का विकल्प नहीं होगा।
प्रमाणपत्र नहीं, जाँचने योग्य सबूत
उच्च जोखिम वाले एआई सिस्टम के लिए डेवलपर से एक सुरक्षा दस्तावेज़ माँगा जा सकता है: सिस्टम किस काम के लिए है, किन परिस्थितियों में उसका परीक्षण हुआ, कौन-से बचाव उपाय काम करते दिखे, क्या जोखिम बाकी हैं और घटना होने पर क्या किया जाएगा। मान्यता प्राप्त स्वतंत्र परीक्षक को मॉडल के संबंधित संस्करण, उसके इस्तेमाल की तकनीकी व्यवस्था, दस्तावेज़ों और महत्वपूर्ण विफलताओं के रिकॉर्ड तक सुरक्षित पहुँच चाहिए। जाँच की विधि और निष्कर्ष इतने स्पष्ट हों कि कोई दूसरा योग्य परीक्षक उन्हें चुनौती दे सके; साथ ही निजी जानकारी, कारोबारी गोपनीयता और सुरक्षा-संबंधी विवरण सुरक्षित रहें।
जाँच लॉन्च पर खत्म नहीं होनी चाहिए। इस्तेमाल के दौरान निगरानी, बड़े बदलाव के बाद दोबारा परीक्षण और जरूरत पड़ने पर पुराने संस्करण पर लौटने या सिस्टम बंद करने की योजना भी हो। किसी मंजूरी में यह स्पष्ट हो कि वह किस संस्करण और किस उपयोग-परिस्थिति के लिए दी गई है। उसका अर्थ भविष्य के हर इस्तेमाल को स्थायी मंजूरी देना नहीं है।
स्वतंत्रता का एक आर्थिक पहलू भी है। बड़ी कंपनियाँ सीधे अपने परीक्षक चुनने और उन्हें नियंत्रित करने के बजाय साझा या नियामक-प्रशासित परीक्षण कोष में योगदान दे सकती हैं। गंभीर विफलताओं और बाल-बाल टली घटनाओं की स्वतंत्र जाँच का उद्देश्य उनसे सीखना होना चाहिए। सुरक्षित रिपोर्टिंग से जानकारी सामने लाने में मदद मिलेगी, लेकिन जानबूझकर बात छिपाने या गलत आचरण पर कार्रवाई का रास्ता खुला रहना चाहिए।
सिंगापुर की भूमिका: मेजबानी से आगे की कसौटी
टियो ने एआई अपनाने के साथ-साथ सुरक्षा उपाय बनाने की बात कही है। रिपोर्टों में सिंगापुर के AI Verify परीक्षण टूलकिट और उसके AI Safety Institute को इस दिशा में मौजूदा आधार बताया गया है।
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3 सिंगापुर मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों के व्यापक नेटवर्क में संयुक्त जाँच या गोपनीय तकनीकी बातचीत की मेजबानी कर सकता है।
लेकिन वहाँ केंद्र होना ही अमेरिका और चीन, दोनों का भरोसा मिलने की गारंटी नहीं होगा। उसके लिए पारदर्शी संचालन, सुरक्षित पहुँच के नियम, स्वतंत्र अपील की व्यवस्था और दोनों देशों की वास्तविक भागीदारी जरूरी होगी। कई देशों में फैला नेटवर्क किसी एक केंद्र पर निर्भरता भी कम करेगा।
पहले साझा खतरों पर सहमति
एआई विकास की रफ्तार को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं। रॉयटर्स के अनुसार डारियो अमोदेई, सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क ने समन्वित ढंग से रफ्तार धीमी करने की बात की है। इसके उलट मार्क ज़करबर्ग ने बाज़ार-आधारित सुरक्षा उपायों को तरजीह दी है और जेन्सेन हुआंग ने नए नियमों की जरूरत को खारिज किया है।
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48 चीन ने रफ्तार धीमी करने की अपील ठुकराई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि उन्हें 24 सितंबर को शी जिनपिंग के साथ शिखर वार्ता में एआई सुरक्षा सीमाओं पर प्रगति की उम्मीद नहीं थी; उस बैठक पर रिपोर्टिंग में बड़ी सफलता की उम्मीद कम बताई गई थी।
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इन मतभेदों के बावजूद सीमित समझौते संभव हो सकते हैं। अमेरिकी और चीनी सुरक्षा विशेषज्ञों के प्रस्तावों पर रिपोर्टिंग में परमाणु प्रणालियों के आसपास स्पष्ट निषेध-सीमाएँ, गंभीर साइबर हमलों पर मानवीय नियंत्रण और स्वायत्त एआई से जुड़ी घटनाओं के लिए सीधी संपर्क-व्यवस्था शामिल हैं।
20 इन्हें आपात संपर्क, गंभीर घटनाओं की सूचना और पारस्परिक तकनीकी चर्चा की शुरुआत बनाया जा सकता है। मानक तय करने और परीक्षण क्षमता तक पहुँच में अन्य देशों की भी भूमिका होनी चाहिए।
हथियार-नियंत्रण से सीख यह है कि प्रतिबद्धताएँ इतनी स्पष्ट और सीमित हों कि दोनों पक्ष उनका पालन जाँच सकें। वित्तीय निगरानी से सीख यह है कि जहाँ विफलता का असर बड़ा हो, वहाँ स्वतंत्र आकलन, प्रबंधन की जवाबदेही, सुधार की योजना और गंभीर सुरक्षा विफलताओं, डेटा लीक, हैकिंग या मॉडल चोरी की तुरंत रिपोर्टिंग जैसी सख्त जिम्मेदारियाँ लगें। कम जोखिम वाली सेवाएँ देने वाली छोटी कंपनियों को साझा परीक्षण सुविधाएँ और सरल दस्तावेज़ी प्रक्रिया मिल सकती है—लेकिन खतरनाक सिस्टम को केवल कंपनी छोटी होने के कारण छूट नहीं मिलनी चाहिए।
2030 तक संधि और स्थायी अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाना एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य हो सकता है, भरोसेमंद भविष्यवाणी नहीं। प्रगति की पहली असली कसौटी यह होगी कि देश गंभीर घटना की साझा परिभाषा, परीक्षकों की स्वतंत्रता और पारस्परिक सुरक्षा उपायों पर सहमत होते हैं या नहीं—और सबूत कमजोर पड़ने पर नियामक कार्रवाई कर पाते हैं या नहीं।