अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को चुनौती देने के लिए सांसदों को ज्यादा ताकत देता है। कानून बनाने, सरकारी खर्च तय करने और प्रशासन की जांच-पड़ताल करने के अधिकार के जरिए कांग्रेस यूक्रेन सहायता, रूस पर प्रतिबंधों और ईरान युद्ध पर दबाव बढ़ा सकती है।
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पर ज्यादा राजनीतिक ताकत का अर्थ अपने-आप नीति पलट जाना नहीं है। नई कांग्रेस जनवरी 2027 में कार्यभार संभालेगी; तब तक चुनाव का असर मुख्यतः राजनीतिक समीकरणों पर होगा, न कि तुरंत जमीन पर लागू होने वाली नीति पर।
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यूक्रेन को सहायता पर फिर उठ सकता है सवाल—पर वीटो बड़ी अड़चन
ट्रंप ने यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य और वित्तीय सहायता काफी हद तक रोक दी है, जबकि दोनों दलों के कई सांसद मदद के पक्ष में रहे हैं। दोनों सदनों में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट नई सहायता का प्रस्ताव मतदान के लिए ला सकते हैं।
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लेकिन विधेयक पारित होना अंतिम कदम नहीं होगा। ट्रंप उसे वीटो कर सकते हैं। उस वीटो को पलटने के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट—दोनों में दो-तिहाई समर्थन जरूरी होगा, यानी डेमोक्रेट को रिपब्लिकन सांसदों के वोट भी चाहिए होंगे।
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7 उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट नहीं होता कि इस सीमा तक पहुंचने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद हैं या नहीं।
सहायता का मुद्दा डेमोक्रेटिक बहुमत की दूसरी प्राथमिकताओं और बजट वार्ताओं के बीच भी जगह पाने की चुनौती का सामना कर सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव कब और किस रूप में आगे बढ़ेगा, यह कांग्रेस के एजेंडे, नेतृत्व और बजट बातचीत के साथ-साथ वीटो की आशंका पर निर्भर करेगा।
12 इसलिए सहायता पर मतदान होना अहम राजनीतिक संकेत होगा, लेकिन उससे यह तय नहीं होता कि यूक्रेन को मदद कब पहुंचेगी या उसकी मात्रा कितनी होगी।
रूस पर प्रतिबंधों में ढील कांग्रेस के टकराव का मुद्दा बन सकती है
रूसी डीजल और ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंधों में ट्रंप की ढील से सांसद नाराज हुए हैं; रिपोर्टिंग के अनुसार, आलोचकों में रिपब्लिकन भी शामिल हैं।
4 डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाली कांग्रेस प्रशासन पर दबाव डाल सकती है और प्रतिबंधों में ढील रोकने या उसे पलटने की कोशिश कर सकती है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग किसी खास प्रतिबंध विधेयक का नतीजा तय नहीं करती। इसलिए रूस पर प्रतिबंध दोबारा कड़े होने को संभावना के रूप में देखना चाहिए, पक्का नतीजा नहीं।
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ईरान युद्ध पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन अंत तय नहीं
सरकारी खर्च पर कांग्रेस के अधिकार के चलते सांसद कानून और निगरानी के जरिए प्रशासन के फैसलों को चुनौती दे सकते हैं।
6 डेमोक्रेट ईरान युद्ध पर ट्रंप से जवाब मांग सकते हैं और सैन्य खर्च की जांच या विधायी प्रक्रिया के जरिए उस पर सीमाएं लगाने की कोशिश कर सकते हैं।
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फिर भी, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कांग्रेस युद्ध खत्म कर देगी। DW के विश्लेषण में आगाह किया गया है कि ईरान को लेकर वॉशिंगटन के राजनीतिक मतभेद बाहर से जितने गहरे दिखते हैं, जरूरी नहीं कि वे उतने ही हों। डेमोक्रेट की मजबूत जीत भी नीति बदलवाने के लिए पर्याप्त प्रभाव न दे पाए।
34 चुनाव से दबाव और जांच बढ़ने की संभावना बनती है; युद्ध पर उसका असर अभी अनिश्चित है।
ज्यादा निगरानी का मतलब अधिक संयमित राष्ट्रपति नहीं
डेमोक्रेटिक कांग्रेस प्रशासन की जांच कर सकती है, सरकारी खर्च को प्रभावित कर सकती है और ट्रंप के एजेंडे के कुछ हिस्सों को चुनौती दे सकती है। लेकिन CNBC से बात करने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि कांग्रेस का नियंत्रण खोने के बाद ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में विदेश नीति पर और ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।
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इसलिए नतीजा विदेश नीति में अपने-आप नरमी नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच अधिक खुला और तीखा टकराव भी हो सकता है।
निचोड़
मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेट के पास यूक्रेन सहायता आगे बढ़ाने, रूस पर प्रतिबंधों में ढील का विरोध करने और ईरान युद्ध की जांच-पड़ताल करने के लिए मजबूत मंच होगा। लेकिन ये कोशिशें कानून बनेंगी या नहीं, यह उपलब्ध वोटों, कांग्रेस के एजेंडे और ट्रंप के वीटो पर निर्भर करेगा। सबसे ठोस अनुमान यही है कि कांग्रेस का विरोध बढ़ेगा—अमेरिकी नीति का पलटना तय नहीं है।
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