येन की कमजोरी का सबसे बड़ा संरचनात्मक कारण है अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों का बड़ा अंतर।
जब अमेरिकी ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक अक्सर सस्ती दर पर येन उधार लेकर डॉलर आधारित परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। इसे वित्तीय बाजारों में कैरी ट्रेड (carry trade) कहा जाता है।
जब तक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड जापान की तुलना में ऊंची रहती है, तब तक वैश्विक पूंजी डॉलर की ओर बहती रहती है—और इससे येन पर लगातार दबाव बना रहता है।
जापान पहले भी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर चुका है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सरकार ने अप्रैल–मई 2024 के बीच लगभग ¥9.79 ट्रिलियन (करीब 62 अरब डॉलर) खर्च किए, जब येन लगभग 160 प्रति डॉलर तक गिर गया था ।
ऐसे कदमों से अक्सर येन में अल्पकालिक उछाल आता है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यदि मूल आर्थिक कारण—जैसे ब्याज दरों का अंतर—जैसे के तैसे बने रहें, तो हस्तक्षेप लंबे समय की दिशा नहीं बदलता ।
इसी वजह से बाजार मानता है कि सरकार अत्यधिक उतार‑चढ़ाव पर प्रतिक्रिया दे सकती है, लेकिन किसी खास विनिमय दर को लंबे समय तक बचाना मुश्किल है।
जापान ऊर्जा के मामले में काफी हद तक आयात पर निर्भर है। जब तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो देश को विदेशी मुद्रा में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।
हाल की रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि भू‑राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी जापान की आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती है और कंपनियों व उपभोक्ताओं पर लागत का दबाव बढ़ा सकती है ।
कमजोर येन इस समस्या को और बढ़ा देता है क्योंकि इससे आयात और महंगे हो जाते हैं।
जापानी अधिकारियों ने कई बार कहा है कि यदि मुद्रा बाजार में अत्यधिक अस्थिरता दिखे तो वे कार्रवाई कर सकते हैं। खास तौर पर 160 प्रति डॉलर का स्तर बाजार में मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है ।
लेकिन नीति‑निर्माता यह भी स्पष्ट करते हैं कि हस्तक्षेप का इस्तेमाल सावधानी से होना चाहिए और इसे मुख्यतः बाजार की अव्यवस्थित चालों को शांत करने के लिए ही किया जाता है।
वर्तमान हालात को देखें तो येन की दिशा पर असर डालने वाले मुख्य कारक अभी भी बाहरी हैं:
इसीलिए कई विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिकी यील्ड में गिरावट, बैंक ऑफ जापान की ज्यादा आक्रामक दर‑वृद्धि, या अंतरराष्ट्रीय समन्वित हस्तक्षेप जैसे बड़े कारक सामने नहीं आते, तब तक येन पर दबाव बना रह सकता है और बाजार फिर से 160 प्रति डॉलर के स्तर को परख सकता है।
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