दक्षिण कोरिया और जापान के जहाज़ निर्माता कुशल कामगारों की कमी, लंबे ऑर्डर बैकलॉग और चीन से प्रतिस्पर्धा के बीच वेल्डिंग और पेंटिंग में ऑटोमेशन बढ़ा रहे हैं। HD Hyundai Samho में एक रोबोट रोज़ाना 50 वेल्डिंग सेल तक कर सकता है, जबकि कुशल कामगार 30 तक—यह तुलना एक खास काम की है, पूरे शिपयार्ड की उत्पादकता की नहीं। [30]...
प्रकाशितकर्ताGPT-6 Luna से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How are South Korean and Japanese shipbuilders using robots to address labor shortages, aging workforces, long order backlogs and competitio. Article summary: South Korean and Japanese shipbuilders are putting robots into welding, painting and other repetitive or hazardous work to stretch scarce skilled labour, keep production moving through long backlogs and compete with lowe. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
दक्षिण कोरिया और जापान के जहाज़ निर्माता वेल्डिंग, पेंटिंग और दूसरे कामों में रोबोट लगा रहे हैं। वजह है कुशल कामगारों की कमी, बड़े ऑर्डर-बैकलॉग और कम लागत पर काम करने वाले चीनी शिपयार्ड से प्रतिस्पर्धा। कंपनियां ऐसे “स्मार्ट शिपयार्ड” बनाना चाहती हैं जहां डेटा, AI और रोबोट उत्पादन में मदद करें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अनुभवी कामगारों की जगह मशीनें आसानी से ले सकती हैं। 18
38
2026 की रिपोर्टिंग में क्लार्कसन के आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि 2025 में दुनिया के नए जहाज़ी ऑर्डरों में चीनी शिपयार्डों की हिस्सेदारी 63% थी। यह जीते गए ऑर्डरों का आंकड़ा है—बनकर तैयार हुए जहाज़ों या कुल उत्पादन का नहीं। 18
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया और जापान मिलकर दुनिया के जहाज़ी उत्पादन का 40% हिस्सा रखते हैं। हालांकि, रिपोर्ट का सार यह नहीं बताता कि उत्पादन को किस पैमाने से मापा गया है और दोनों देशों की अलग-अलग हिस्सेदारी क्या है। 4 एक अलग स्रोत के अनुसार, 2024 में वैश्विक जहाज़-पूर्णता में दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी क्षतिपूर्ति-आधारित सकल टन भार (compensated gross tonnage) के हिसाब से करीब 27% थी। यह एक तय पैमाने और वर्ष का आंकड़ा है, लेकिन इसमें जापान की हिस्सेदारी नहीं दी गई है।
41
इसलिए इन आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे से मिलाकर नहीं देखना चाहिए। ऑर्डर भविष्य में बनने वाले जहाज़ों की मांग बताते हैं, जबकि पूर्णता और उत्पादन के आंकड़े बताते हैं कि कितना काम पूरा हुआ। उपलब्ध आंकड़े प्रतिस्पर्धा का संदर्भ देते हैं, लेकिन तीनों देशों की तुलना एक ही पैमाने पर नहीं करते।
HD Hyundai वेल्डिंग में रोबोट इस्तेमाल कर रही है और AI, डेटा तथा डिजिटल ट्विन तकनीक के सहारे स्मार्ट शिपयार्ड बनाने पर काम कर रही है। HD Hyundai Samho में एक रोबोट रोज़ाना 50 वेल्डिंग सेल तक पूरा कर सकता है, जबकि एक कुशल कामगार 30 तक। इस खास काम में रोबोट की क्षमता करीब 67% अधिक बैठती है—यह पूरे शिपयार्ड या पूरा जहाज़ बनाने की उत्पादकता में 67% बढ़ोतरी का दावा नहीं है। 30
कंपनी की बड़ी ऑटोमेशन योजनाएं अभी लक्ष्य हैं, मापे गए नतीजे नहीं। HD Hyundai ने 2030 तक कुछ उत्पादन लाइनों को ऑटोमेट करने और एक छोटा “डार्क फैक्ट्री” स्थापित करने का लक्ष्य बताया है। डार्क फैक्ट्री से आशय ऐसी फैक्ट्री से है जहां बहुत कम या बिना प्रत्यक्ष मानवीय निगरानी के उत्पादन हो। 18
Hanwha Ocean के मुताबिक, उसके जियोझे शिपयार्ड में इनडोर वेल्डिंग के करीब 67% काम में AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल होता है। कंपनी ने 2030 तक तय वेल्डिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑटोमेट करने और सतह तैयार करने व पेंटिंग के आधे काम में रोबोट लगाने का लक्ष्य रखा है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा शिपयार्ड या हर जगह की वेल्डिंग ऑटोमेट हो चुकी है। 9
20
Fanuc ने जहाज़ निर्माण के कामों के लिए वेल्डिंग और पेंटिंग वाले दो खास रोबोट विकसित किए हैं। कंपनी ने जापान के जहाज़ निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले करीब 75,000 लोगों की संख्या के बराबर रोबोट लगाने की महत्वाकांक्षा जताई है, ताकि रात में भी ज्यादा काम हो सके। यह एक लक्ष्य है—रोबोटों की तैनाती का बताया हुआ आंकड़ा या प्रमाणित उत्पादकता-वृद्धि नहीं। 18
जहाज़ किसी मानकीकृत फैक्ट्री उत्पाद की तरह एक जैसी लाइन में नहीं बनते। हर जहाज़ का डिजाइन अलग हो सकता है और काम अक्सर तंग, अनियमित जगहों पर होता है। इसलिए हर प्रक्रिया को ऑटोमेट करना मुश्किल है; जटिल कामों में कुशल इंसानी हाथों की जरूरत बनी रहती है। रिपोर्टिंग के मुताबिक, चीन के शिपयार्ड वेल्डिंग रोबोट और स्मार्ट सिस्टम लगाने में ज्यादा तेजी दिखा रहे हैं, जिससे जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाती है। 18
38
निवेश की लागत भी एक बाधा है। रिपोर्टों में शिपयार्ड ऑटोमेशन को महंगा बताया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से इन योजनाओं की भरोसेमंद लागत तय नहीं की जा सकती। 28
29 कामगारों की नौकरी को लेकर चिंता भी सामने आई है: दक्षिण कोरिया की धातु-कामगार यूनियन ने कंपनियों में AI और रोबोट का इस्तेमाल बढ़ने के बीच नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।
1
फिलहाल रोबोटों की सबसे स्पष्ट भूमिका कुछ खास कामों में मदद करना है; व्यापक ऑटोमेशन अभी योजनाओं और लक्ष्यों के स्तर पर है। वेल्डिंग सेल की तुलना भी एक सीमित काम से जुड़ी है, जबकि 2030 के लक्ष्य भविष्य की योजनाएं हैं। स्मार्ट शिपयार्ड से पूरे उत्पादन में कितना फायदा होगा—और कुशल कामगारों की भूमिका कैसे बनी रहेगी—यह तकनीकी, आर्थिक और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को हल करने पर निर्भर करेगा।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
दक्षिण कोरिया और जापान के जहाज़ निर्माता कुशल कामगारों की कमी, लंबे ऑर्डर बैकलॉग और चीन से प्रतिस्पर्धा के बीच वेल्डिंग और पेंटिंग में ऑटोमेशन बढ़ा रहे हैं।
दक्षिण कोरिया और जापान के जहाज़ निर्माता कुशल कामगारों की कमी, लंबे ऑर्डर बैकलॉग और चीन से प्रतिस्पर्धा के बीच वेल्डिंग और पेंटिंग में ऑटोमेशन बढ़ा रहे हैं। HD Hyundai Samho में एक रोबोट रोज़ाना 50 वेल्डिंग सेल तक कर सकता है, जबकि कुशल कामगार 30 तक—यह तुलना एक खास काम की है, पूरे शिपयार्ड की उत्पादकता की नहीं। [30]
Hanwha Ocean ने 2030 तक तय वेल्डिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑटोमेट करने का लक्ष्य रखा है; ये लक्ष्य हैं, हासिल हो चुके नतीजे नहीं। [9][20]