सिंगापुर की सरकारी तकनीकी एजेंसी GovTech और Google DeepMind Android फोन पर संभावित स्कैम वाली बातचीत पहचानने के लिए AI टूल विकसित कर रहे हैं। इसका मकसद संदेशों में धोखाधड़ी के संकेत फोन पर ही जांचना और जरूरत पड़ने पर यूज़र को चेतावनी देना है। Google के मुताबिक, इस जांच के लिए बातचीत का टेक्स्ट क्लाउड सर्वर पर अपलोड नहीं होगा।
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इस परियोजना की घोषणा सिंगापुर इंटरनेशनल साइबर वीक (SICW) 2026 में की गई थी। इसी मौके पर सिंगापुर ने Google के Fairwind साइबर सुरक्षा कार्यक्रम में शामिल होने की भी घोषणा की।
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फोन पर स्कैम की पहचान कैसे होगी?
यह मॉडल Google की हल्की Gemma AI तकनीक पर आधारित है और इसे स्थानीय स्कैम बातचीत के उदाहरणों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इनमें सरकारी संस्थाओं, बैंकों और स्थानीय जानी-मानी हस्तियों के नाम पर धोखा देने के साथ-साथ क्षेत्र में उभर रहे नए स्कैम तरीके भी शामिल हैं।
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उद्देश्य बातचीत में सोशल इंजीनियरिंग के संकेत पहचानना है—यानी ऐसा दबाव या मनोवैज्ञानिक चाल, जिसके जरिए किसी से पासवर्ड जैसी जानकारी मांगी जाए या पैसे ट्रांसफर करवाए जाएं। ऐसे संकेत मिलने पर फोन पर चेतावनी दिख सकती है, ताकि यूज़र कोई कदम उठाने से पहले रुककर सोच सके।
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कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, यह प्रक्रिया दो चरणों में काम कर सकती है: पहले एक हल्का क्लासिफायर संदेशों की शुरुआती जांच करेगा; संभावित खतरा दिखने पर fine-tuned Gemma मॉडल बातचीत के बड़े हिस्से का विश्लेषण करेगा।
5 हालांकि, उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि दूसरा चरण कितनी बार सक्रिय होगा या मॉडल की पहचान-सटीकता के परीक्षणों के नतीजे क्या हैं।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉडल को उभरते स्कैम तरीकों के आधार पर लगातार प्रशिक्षित करने का इरादा है, ताकि सामान्य बातचीत और चालाकी से की जा रही ठगी में फर्क किया जा सके।
20 लेकिन अपडेट कितनी बार होंगे और प्रशिक्षण की व्यवस्था कैसे चलेगी, यह जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फोन पर प्रोसेसिंग और निजता
Google का कहना है कि मॉडल पूरी तरह डिवाइस पर चलेगा। इस स्क्रीनिंग के लिए बातचीत का टेक्स्ट न Google को भेजा जाएगा, न सिंगापुर सरकार को।
21 यही ऑन-डिवाइस तरीका परियोजना की निजता संबंधी दलील का अहम हिस्सा है। GovTech के ट्रस्ट एंड सेफ्टी निदेशक मार्क चेन ने कहा: “स्कैम से लड़ने का मतलब निजी निजता की कुर्बानी देना नहीं होना चाहिए।”
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हालांकि, फोन पर प्रोसेसिंग होने भर से यह स्पष्ट नहीं होता कि टूल किन मैसेजिंग ऐप्स के साथ काम करेगा या एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाले ऐप्स में संदेशों तक इसकी पहुंच कैसे होगी। उपलब्ध स्रोत ऐप की अनुमतियों, समर्थित डिवाइसों या यूज़र के नियंत्रणों के बारे में जानकारी नहीं देते।
Google के साथ सिंगापुर की व्यापक पहल
SICW 2026 में घोषित दो पहलों में स्कैम डिटेक्टर एक है। दूसरी पहल के तहत सिंगापुर Google के Fairwind Programme में शामिल हुआ है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले साइबर सुरक्षा रक्षकों को Gemini 4 Argon और CodeMender समेत टूल्स की सुविधा मिलती है।
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Google के मुताबिक, CodeMender का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों पर शोध और पैच तैयार करने में मदद के लिए किया जा सकता है। सिंगापुर की घोषणा पर आई रिपोर्टों के अनुसार, ये टूल किसी संगठन के सुरक्षित क्लाउड वातावरण में कमजोरियां पहचानने और उनकी पुष्टि करने के साथ सॉफ्टवेयर पैच तैयार करने में मदद कर सकते हैं।
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24 यह काम Android स्कैम डिटेक्टर से अलग है: Fairwind संगठन के सॉफ्टवेयर की सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि फोन वाला मॉडल लोगों को संदिग्ध बातचीत पहचानने में मदद करने के लिए बनाया जा रहा है।
Android यूज़र्स के लिए अभी क्या जानना बाकी है?
फिलहाल यह विकासाधीन परियोजना है, न कि ऐसा टूल जिसके लिए सार्वजनिक इंस्टॉलेशन निर्देश जारी हो चुके हों। लॉन्च की तारीख, समर्थित मैसेजिंग ऐप, डिवाइस की जरूरतें और चेतावनी किस रूप में दिखेगी—इनमें से किसी बात की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं है। अभी इसकी प्रस्तावित ऑन-डिवाइस व्यवस्था और स्कैम पहचानने का मकसद तो साफ है, लेकिन आम यूज़र्स तक इसकी पहुंच और रोजमर्रा में इस्तेमाल का तरीका नहीं।
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