टेनेंट ब्रांडिंग फ़ील्ड में बदलाव
Microsoft Entra ID में संगठनों के नाम और ब्रांडिंग जैसी जानकारी कस्टमाइज़ की जा सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि हमलावर इन्हीं फ़ील्ड्स में स्कैम संदेश लिख देते हैं—जैसे नकली खरीद अलर्ट या किसी सपोर्ट नंबर पर कॉल करने के निर्देश।
सिस्टम नोटिफिकेशन ट्रिगर करना
इसके बाद हमलावर एक वैध माइक्रोसॉफ्ट वर्कफ़्लो शुरू करते हैं, जैसे किसी उपयोगकर्ता के लिए नया ईमेल साइन‑इन या रिकवरी तरीका जोड़ना। इस प्रक्रिया में वे अपनी जगह पीड़ित का ईमेल पता डाल देते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट खुद ईमेल भेज देता है
जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, माइक्रोसॉफ्ट का नोटिफिकेशन सिस्टम स्वचालित ईमेल भेज देता है। चूंकि ईमेल टेम्पलेट में टेनेंट नाम या ब्रांडिंग शामिल होती है, इसलिए हमलावर का स्कैम संदेश उसी वैध ईमेल में दिखाई देता है।
दूसरे शब्दों में, हमलावर माइक्रोसॉफ्ट के असली नोटिफिकेशन टेम्पलेट में अपना फ़िशिंग संदेश "इंजेक्ट" कर देते हैं।
इस अभियान में कई तकनीकी चालें देखी गई हैं जो ईमेल को और अधिक विश्वसनीय बनाती हैं और स्पैम फ़िल्टर से बचने में मदद करती हैं:
• सब्जेक्ट लाइन का दुरुपयोग — ब्रांडिंग फ़ील्ड में लंबा स्कैम टेक्स्ट डालकर विषय पंक्ति और प्रीव्यू में वही संदेश दिखाया जाता है।
• अक्षरों की अदला‑बदली — समान दिखने वाले अक्षरों (homoglyphs) का उपयोग करके कीवर्ड‑आधारित फ़िल्टर को धोखा दिया जाता है।
• फोन नंबर छुपाना — नंबरों को अक्षरों या असामान्य चिन्हों के साथ लिखा जाता है ताकि स्वचालित स्पैम पहचान प्रणाली उन्हें पकड़ न सके।
इस अभियान का सबसे खतरनाक पहलू यही है कि ये ईमेल केवल नकली नहीं हैं।
क्योंकि संदेश माइक्रोसॉफ्ट के अपने सर्वरों से भेजे जाते हैं, वे SPF, DKIM और DMARC जैसी प्रमाणीकरण जांचों को पास कर सकते हैं—ये वही तकनीकें हैं जिनका उपयोग अधिकांश ईमेल सेवाएं भेजने वाले की वैधता जांचने के लिए करती हैं।
इसके अलावा, उपयोगकर्ता एक परिचित माइक्रोसॉफ्ट पता देखते हैं जो आमतौर पर सुरक्षा नोटिफिकेशन भेजता है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ जाता है, भले ही ईमेल की सामग्री संदिग्ध हो।
पत्रकारों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की जांच में पता चला कि यह दुरुपयोग काफी समय से चल रहा है।
रिपोर्ट्स में बताया गया है:
• अलग‑अलग इनबॉक्स में माइक्रोसॉफ्ट नोटिफिकेशन पते से कई फ़िशिंग ईमेल देखे गए।
• ईमेल में नकली खरीदारी अलर्ट, बिलिंग समस्या या तत्काल सहायता के बहाने शामिल थे।
• हमलावर बड़ी संख्या में अस्थायी Microsoft 365 टेनेंट बनाकर जल्दी‑जल्दी उनका उपयोग और त्याग कर रहे हैं—इसे "burn‑and‑churn" पैटर्न कहा गया।
एंटी‑स्पैम शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि स्वचालित नोटिफिकेशन सिस्टम में बहुत ज्यादा कस्टमाइजेशन की अनुमति हो, तो वही भरोसेमंद प्लेटफॉर्म फ़िशिंग का माध्यम बन सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन घटनाओं के समय तक माइक्रोसॉफ्ट ने इस समस्या के सटीक तकनीकी कारण की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की थी।
क्योंकि भेजने वाला पता असली हो सकता है, इसलिए केवल "From" फ़ील्ड पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
• अचानक मिला खरीद या भुगतान का अलर्ट जिसे आपने शुरू नहीं किया
• संदेश जिसमें तुरंत किसी फोन नंबर पर कॉल करने को कहा गया हो
• संदिग्ध लिंक पर क्लिक करके समस्या हल करने का आग्रह
• ऐसा वेरिफिकेशन कोड जिसे आपने खुद अनुरोध नहीं किया
अगर आपको माइक्रोसॉफ्ट से आया कोई संदिग्ध ईमेल मिले:
• ईमेल में दिए गए लिंक या फोन नंबर का उपयोग न करें।
• माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट खुद ब्राउज़र में टाइप करके खोलें।
• अपने खाते की गतिविधि और सुरक्षा सेटिंग्स सीधे डैशबोर्ड से जांचें।
• ईमेल को फ़िशिंग के रूप में रिपोर्ट करें या अपनी आईटी टीम को बताएं।
• अगर आपने लिंक खोला या जानकारी दी है, तो तुरंत पासवर्ड बदलें और साइन‑इन गतिविधि की समीक्षा करें।
यह घटना साइबर अपराध की एक बड़ी प्रवृत्ति को दिखाती है: अब हमलावर नकली वेबसाइटों के बजाय विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के असली इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में केवल परिचित ईमेल पता देखना अब सुरक्षा की गारंटी नहीं रह गया है।
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