सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, हेडसेट को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि डोनर अपने आसपास के शारीरिक वातावरण के प्रति सचेत रह सके। मेडिकल स्टाफ प्रक्रिया के दौरान बिना किसी रुकावट के डोनर की निगरानी कर सकता है । सैमसंग के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर जेम्स पार्क ने इस पहल के दर्शन को समझाते हुए कहा कि यह अभियान यह दिखाने के लिए है कि गैलेक्सी XR "एक ऐसे मंच के रूप में काम कर सकता है जो सामाजिक मूल्य का विस्तार करता है"
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यह कोई महज़ तकनीकी करिश्मा नहीं है। इसके पीछे एक चिंताजनक आंकड़ा है। पिछले एक दशक में, 30 साल से कम उम्र के लोगों में ब्लड डोनेशन की दर लगभग 30% तक गिर गई है। अमेरिका में तो सालाना सिर्फ करीब 3% आबादी ही रक्तदान करती है । पहली बार रक्तदान करने वाले अक्सर चिंता और घबराहट को एक बड़ी बाधा के रूप में देखते हैं। यह मेडिटेटिव XR अनुभव ठीक इसी परेशानी को दूर करने और प्रक्रिया को अधिक आकर्षक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। एबट और विभिन्न रेड क्रॉस संगठन 2016 से लगभग 30 देशों में इस तरह के अभियान चला रहे हैं, और अब XR-आधारित दृष्टिकोण इस दिशा में सबसे नया कदम है
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कोरिया में हुई यह शुरुआत कोई अकेला प्रयोग नहीं है। सैमसंग और एबट ने इसे मौजूदा XR-आधारित ब्लड डोनेशन कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में पेश किया, जो पहले से ही मैक्सिको, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम में संचालित है । दोनों कंपनियों की योजना इस पहल को और आगे बढ़ाने की है। इस अनुभव को जून 2026 में AWE में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया, और अमेरिका और मलेशिया में आयोजनों की योजना पहले से तय है
। इन आयोजनों में डोनर, शांत 'ज़ेन गार्डन' के अलावा, "इंटरगैलेक्टिका" नामक एक वैकल्पिक अनुभव भी चुन सकते हैं, जो एक इंटरैक्टिव स्पेस एडवेंचर है। इसमें यूज़र्स रोबोटों की एक टीम को फिर से जोड़ने के लिए पहेलियां सुलझाते हैं
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इससे पहले, 2023-2025 के बीच, एबट और ब्लड सेंटर्स ऑफ अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट होलोलेंस 2 हेडसेट का उपयोग करके न्यूयॉर्क, शिकागो, ह्यूस्टन, कोलंबस और डलास के डोनेशन सेंटरों पर एक समान मिक्स्ड-रियलिटी अनुभव का परीक्षण किया था । गैलेक्सी XR हार्डवेयर की ओर यह बदलाव, इस प्रोग्राम के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जो इसे एक वैश्विक लॉन्च पार्टनर के साथ एक सहज उपभोक्ता डिवाइस इकोसिस्टम तक लेकर आया है।
सैमसंग-एबट का यह ट्रायल एक ऐतिहासिक क्षण है, जहां XR ने गेमिंग और प्रोडक्टिविटी की दुनिया से बाहर निकलकर एक असली क्लीनिकल सेटिंग में कदम रखा है। इसका लक्ष्य बेहद साधारण लेकिन मापने योग्य है: लोगों को इतना सुरक्षित महसूस कराना कि वे एक जीवन बचाने के लिए तैयार हो सकें।
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