इस बदलाव के दो सीधे असर पड़े:
इन दोनों कारणों ने सोने की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बनाया।
2026 में वैश्विक ऊर्जा बाजार भी तनाव में रहा। अमेरिका‑ईरान संघर्ष के कारण तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ गई।
सामान्य परिस्थितियों में महंगाई बढ़ने पर सोना मजबूत होता है, क्योंकि इसे अक्सर मुद्रास्फीति से बचाव (inflation hedge) माना जाता है। लेकिन इस बार समीकरण थोड़ा अलग रहा।
तेल से बढ़ी महंगाई ने यह संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक जल्दी दरें कम नहीं कर पाएंगे। यानी:
इस तरह ऊर्जा‑चालित महंगाई ने अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम अल्पकाल में सोने को कमजोर किया।
इसके बावजूद सोने की कीमत पूरी तरह टूट नहीं गई है। इसका एक बड़ा कारण है भू‑राजनीतिक अनिश्चितता।
ऐसे समय में निवेशक अक्सर जोखिम भरे एसेट से निकलकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं। मध्य‑पूर्व में तनाव ने सोने की मांग को कुछ हद तक सहारा दिया है, हालांकि यह सहारा मौद्रिक नीति के दबाव को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाया।
कई विश्लेषक इसे “सेफ‑हेवन पैराडॉक्स” कहते हैं—जहां युद्ध और तनाव सोने की मांग बढ़ाते हैं, लेकिन वही घटनाएँ अगर महंगाई और सख्त मौद्रिक नीति को बढ़ावा दें, तो कीमतों पर उल्टा दबाव भी पड़ सकता है।
2026 के बाजार आंकड़े इस उतार‑चढ़ाव को साफ दिखाते हैं:
इतनी तेज रैली के बाद इस तरह का करेक्शन असामान्य नहीं माना जाता, खासकर जब मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हों।
हालांकि हाल की गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया है, लेकिन कई बड़े वित्तीय संस्थान अब भी सोने के दीर्घकालिक रुख को सकारात्मक मानते हैं।
एक कारण है संरचनात्मक मांग—विशेषकर केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीदना।
जेपी मॉर्गन ने हाल ही में 2026 के लिए अपने औसत सोना मूल्य अनुमान को घटाकर लगभग $5,243 प्रति औंस किया, क्योंकि निकट अवधि में निवेशकों की मांग कमजोर रही है। फिर भी बैंक का मानना है कि वर्ष के दूसरे हिस्से में मांग बढ़ने पर कीमतें 2026 के अंत तक लगभग $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
अन्य संस्थानों की राय भी कुछ इसी तरह की है—उनके अनुसार हाल की गिरावट शायद लंबे समय के बुल मार्केट के भीतर एक सामान्य चक्रीय करेक्शन हो सकती है, न कि स्थायी गिरावट।
अभी के लिए सोने की कीमतों को मुख्य रूप से तीन कारक नियंत्रित कर रहे हैं: मजबूत डॉलर, ऊँची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में कटौती की घटती उम्मीद। ये सभी मिलकर सोने पर दबाव डाल रहे हैं।
लेकिन अगर आने वाले महीनों में महंगाई कम होती है, फेडरल रिज़र्व दरों में कटौती की ओर मुड़ता है, या वैश्विक तनाव और बढ़ता है, तो यही मैक्रो कारक उल्टा असर भी डाल सकते हैं। ऐसी स्थिति में कई विश्लेषक मानते हैं कि सोना फिर से गति पकड़कर $6,000 प्रति औंस के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
Comments
0 comments