हाल के हफ्तों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से कुछ तेल टैंकरों की आवाजाही दिख रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वैश्विक समुद्री व्यापार पूरी तरह सामान्य हो गया है। वास्तव में यह रास्ता अब एक कड़े नियंत्रण वाला समुद्री गलियारा बन गया है, जहाँ से गुजरने वाली जहाज़ी आवाजाही अमेरिका‑ईरान संघर्ष, सैन्य उपस्थिति और राजनीतिक सौदेबाज़ी से प्रभावित हो रही है।
कई मामलों में जहाज़—खासकर एशियाई देशों के ऊर्जा खरीदारों से जुड़े—सावधानी से गुजर रहे हैं, लेकिन यातायात अब भी युद्ध से पहले के स्तर से बहुत कम है और अक्सर ईरानी अधिकारियों की अनुमति पर निर्भर करता है।
सामान्य परिस्थितियों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहाँ किसी भी बाधा का असर तुरंत वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।
फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू होने के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी और जवाब में ईरान ने समुद्री यातायात पर दबाव बनाना शुरू किया। इसके बाद वाणिज्यिक जहाज़ों की आवाजाही लगभग रुक गई।
ईरान की इस नीति को लागू करने में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की केंद्रीय भूमिका रही। रिपोर्टों के अनुसार इस बल ने जहाज़ों को चेतावनी दी, कुछ जहाज़ों को रोका या चढ़कर जाँच की और जलडमरूमध्य में समुद्री माइंस भी बिछाई।
अप्रैल में जब ईरान ने संघर्षविराम के दौरान जलडमरूमध्य खुलने का संकेत दिया, तो एक दिन बाद ही IRGC ने इसे पलट दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अंतिम नियंत्रण सैन्य प्रतिष्ठान के हाथ में है।
पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत रास्ता खोलने के बजाय ईरान ने एक तरह की क्लियरेंस प्रणाली लागू की है।
रिपोर्टों के अनुसार तेहरान ने जहाज़ों की जाँच और संभावित शुल्क के लिए एक नई एजेंसी बनाई है, जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए आवेदन करने वाले जहाज़ों की समीक्षा करती है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बताया कि “गैर‑शत्रुतापूर्ण” जहाज़ों को गुजरने की अनुमति मिल सकती है, बशर्ते वे पहले अनुमति लें और ईरान के खिलाफ किसी आक्रामक गतिविधि से जुड़े न हों।
इस व्यवस्था ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक को खुले मार्ग के बजाय राजनीतिक रूप से नियंत्रित प्रवेश द्वार में बदल दिया है।
भले ही कुछ जहाज़ गुजर रहे हों, कुल यातायात अब भी सामान्य स्तर से बहुत नीचे है।
संघर्ष से पहले रोज़ाना लगभग 125 से 140 जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे। युद्ध के दौरान यह संख्या घटकर कभी‑कभी सिर्फ कुछ जहाज़ प्रतिदिन रह गई—यानी सामान्य गतिविधि का लगभग 10% या उससे भी कम।
उदाहरण के लिए अप्रैल के अंत में 24 घंटे के भीतर सिर्फ करीब छह जहाज़ गुजरने का रिकॉर्ड सामने आया।
हालाँकि मई के मध्य में एक सप्ताह के दौरान लगभग 55 कमोडिटी जहाज़ पार करते देखे गए, लेकिन यह भी अभी पूर्ण सामान्य स्थिति से काफी दूर है।
इन सीमित आवाजाही में सबसे ज्यादा ध्यान एशियाई देशों से जुड़े टैंकरों पर रहा है।
मई में जहाज़ ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि चीन के स्वामित्व वाला एक सुपरटैंकर लगभग 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लेकर जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाएँ खाड़ी क्षेत्र के तेल पर भारी निर्भर हैं। संघर्ष के शुरुआती दिनों में कई दक्षिण कोरियाई टैंकर जलडमरूमध्य के पास फँस गए थे, जिससे क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर तत्काल असर पड़ा।
इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि अभी केवल कुछ चुनिंदा जहाज़—अक्सर बातचीत या विशेष व्यवस्था के तहत—इस मार्ग को पार कर रहे हैं।
दूसरी ओर अमेरिका ने जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक दबाव दोनों का सहारा लिया है।
वार्ता रुकने के बाद वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की और अमेरिकी नौसेना को ऐसे जहाज़ों को रोकने का आदेश दिया जो ईरान के प्रतिबंधों से जुड़े हों।
साथ ही कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत “अंतिम चरणों” में है, लेकिन समझौता न होने पर आगे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
संघर्ष का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र के देश भी स्थिरता बहाल करने के विकल्प तलाश रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब ने ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच मध्य‑पूर्व गैर‑आक्रमण समझौते का विचार रखा है। यह मॉडल 1970 के दशक के यूरोपीय हेलसिंकी समझौते से प्रेरित बताया जा रहा है, जिसने शीत युद्ध के दौरान तनाव कम करने में भूमिका निभाई थी।
इन सभी घटनाओं को मिलाकर देखें तो स्पष्ट होता है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अभी सामान्य रूप से खुला नहीं है।
ईरान सीमित जहाज़ी आवाजाही की अनुमति देकर यह दिखा रहा है कि वह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक पर नियंत्रण रख सकता है—और इसी नियंत्रण का उपयोग वह कूटनीतिक बातचीत में दबाव बनाने के लिए कर रहा है।
जब तक व्यापक राजनीतिक समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज़ से गुजरने वाली जहाज़ी आवाजाही सीमित, सावधानीपूर्ण और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर ही रहने की संभावना है।
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल टैंकर फिर गुजरने लगे हैं, लेकिन यातायात सामान्य स्तर के मुकाबले बहुत कम है और कई जहाज़ों को ईरानी अनुमति लेनी पड़ रही है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल टैंकर फिर गुजरने लगे हैं, लेकिन यातायात सामान्य स्तर के मुकाबले बहुत कम है और कई जहाज़ों को ईरानी अनुमति लेनी पड़ रही है। ईरान ने एक क्लियरेंस प्रणाली लागू की है जिसमें जहाज़ों की जाँच और अनुमति शामिल है, जबकि IRGC कई बार अचानक पहुँच नियंत्रण बदल देता है।
चीन और अन्य एशियाई देशों से जुड़े टैंकर सीमित रूप से गुजर रहे हैं, जो पूर्ण पुनःखुलने के बजाय सावधानी से शुरू हुई आवाजाही को दिखाता है।