क़तर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे बातचीत के केंद्र में अधिक स्पष्ट रूप से आ रहे हैं। लेकिन अभी जो खबरें सामने आई हैं, वे विचाराधीन प्रस्तावों की हैं—किसी सहमत समझौते की नहीं। खबरों के मुताबिक, ईरान ने क़तर के रास्ते वॉशिंगटन को परमाणु प्रस्ताव भेजा है, साथ ही कहा है कि परमाणु वार्ता शुरू होने से पहले उसकी सात मांगें पूरी की जाएं।
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मध्यस्थता में क्या नया है?
6 नवंबर को मध्य-पूर्व की दो सरकारी अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ मतभेद कम करने के लिए क़तर की ओर से पेश प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। क्षेत्रीय अधिकारियों ने एक संभावित “सेतु समझौते” का भी ज़िक्र किया, जिसका मकसद आगे परमाणु वार्ता की राह बनाना है। रिपोर्टों से यह पुष्टि नहीं होती कि किसी भी सरकार ने इन प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है।
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अलग से, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि तेहरान ने क़तर के ज़रिये अमेरिका को परमाणु मुद्दे पर अपना प्रस्ताव भेजा है। अधिकारी के अनुसार, वॉशिंगटन इसकी समीक्षा कर रहा है, लेकिन ईरान इस पर तभी चर्चा करेगा जब अमेरिका उसकी सात मांगें पूरी करेगा। रिपोर्ट में प्रस्ताव का ब्योरा नहीं दिया गया।
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दो दिन की योजना और कदमों का क्रम
ईरान ने पहले सात चरणों वाला प्रस्ताव बातचीत का आधार बताया था और कहा था कि इसे दो दिन में लागू किया जा सकता है। खबरों में इसके तहत अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने के बाद अन्य मुद्दों पर बातचीत का ज़िक्र है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की शर्तें पूरी हुए बिना जलडमरूमध्य नहीं खुलेगा।
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क़तर की एक अलग, प्रस्तावित “सेतु” योजना में दो दिन के दौरान आपसी भरोसा बढ़ाने वाले कदमों का क्रम बताया गया है। पहले दिन अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी में राहत और ईरान की कुछ रोकी गई धनराशि जारी करने के बदले ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को बुलाने की दिशा में कदम उठाएगा। दूसरे दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर खोलने और परमाणु वार्ता की ओर बढ़ने का प्रस्ताव है। यह एक रिपोर्ट किया गया प्रस्ताव है, दोनों पक्षों की मंज़ूरी वाला पक्का समझौता नहीं।
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ये विवरण आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे एक ही योजना का ब्योरा हों। मुख्य मतभेद इस बात पर है कि कदम किस क्रम में उठाए जाएं: ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने की समय-सीमा को अपनी मांगों से जोड़ा है, जबकि सेतु योजना में परमाणु निगरानी से जुड़ा कदम शुरुआती लेन-देन का हिस्सा है।
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इसे अभी सफलता क्यों नहीं कहा जा सकता?
शर्तें अब भी बड़ी अड़चन हैं। ईरान की सात-बिंदु योजना से जुड़ी खबरों में तेल प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने और रोकी गई धनराशि जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं। एक अन्य रिपोर्ट में संपत्तियां मुक्त करने, नाकेबंदी हटाने, बमबारी से हुए नुकसान का मुआवज़ा देने और सैन्य कार्रवाई—जिसमें लेबनान में इज़राइली हमले भी शामिल हैं—रोकने की मांगों का ज़िक्र है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में सातों शर्तों की एक पूरी और सत्यापित सूची नहीं दी गई है।
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कूटनीतिक संपर्क जारी हैं, लेकिन इससे पहले क़तर की मध्यस्थता में हुई बातचीत संशोधित प्रस्तावों के साथ खत्म हुई थी और कोई सफलता नहीं मिली थी। रॉयटर्स ने भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच दूरी बनी हुई थी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने की संभावना से इनकार नहीं किया था। इसके बाद एसोसिएटेड प्रेस ने क़तर के प्रस्तावों पर ईरान के विचार के बीच नए लक्षित अमेरिकी हमलों की खबर दी।
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खबरें क्या बताती हैं—और क्या नहीं
इन रिपोर्टों से सीमित निष्कर्ष यही निकलता है: क़तर ऐसे प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है जिनमें परमाणु मुद्दे और भरोसा कायम करने वाले कदम शामिल हैं, और ईरान ने अपना परमाणु प्रस्ताव भी भेजा है। लेकिन तेहरान की घोषित पूर्वशर्त—परमाणु चर्चा से पहले अमेरिका उसकी मांगें माने—का मतलब है कि प्रस्ताव भेजने को बिना शर्त बातचीत की सहमति नहीं माना जा सकता।
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यहां उद्धृत खबरें ईरान के परमाणु प्रस्ताव की विस्तृत शर्तों, दोनों पक्षों की मंज़ूरी वाले दो-दिवसीय समझौते या निरीक्षण की अनुमति पर किसी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं करतीं। वे यूरेनियम के भंडार से जुड़ी बताई गई खास मात्रा या जून में अंतरिम समझौता टूटने के पहले के दावे की भी पुष्टि नहीं करतीं। जब तक पक्ष शर्तों और कदमों के क्रम की पुष्टि न करें, मध्यस्थता शुरुआती पड़ताल के स्तर पर है और प्रस्तावों से वास्तविक समझौते तक की दूरी काफी बनी हुई है।
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