इसके अलावा, बैंक ने Erica for Employees नाम का एक आंतरिक एआई असिस्टेंट भी शुरू किया है, जिसका इस्तेमाल 2,10,000 से अधिक कर्मचारियों में लगभग सभी करते हैं। यह पासवर्ड रीसेट, उपकरण अनुरोध और अन्य प्रशासनिक सहायता जैसे नियमित काम संभालता है ।
इससे कर्मचारियों पर दोहराए जाने वाले काम का बोझ कम होता है और ग्राहकों को तेज़ सेवा मिलती है।
JPMorgan को एंटरप्राइज स्तर पर एआई अपनाने में सबसे आगे माना जाता है। बैंक ने अपने विभिन्न व्यवसायों में सैकड़ों एआई एप्लिकेशन लागू किए हैं—जिनमें कोडिंग सहायता, अनुपालन निगरानी, डेटा विश्लेषण और रिसर्च शामिल हैं ।
बैंक के 2,00,000 से अधिक कर्मचारियों को आंतरिक बड़े‑भाषा‑मॉडल (LLM) टूल्स तक पहुंच है, जो दस्तावेज़ तैयार करने, डेटा विश्लेषण और कार्यप्रवाह ऑटोमेशन में मदद करते हैं ।
रणनीति साफ है: एआई नियमित ज्ञान‑आधारित काम को संभाले, जबकि कर्मचारी जटिल विश्लेषण और ग्राहकों के साथ काम पर ध्यान दें।
गोल्डमैन सैक्स भी अपने कर्मचारियों के लिए जेनरेटिव एआई असिस्टेंट लागू कर रहा है। 2025 में कंपनी ने हजारों कर्मचारियों के लिए एआई टूल्स लागू करने शुरू किए और आगे इसे पूरे संगठन में फैलाने की योजना है ।
ये टूल्स दस्तावेज़ों का सारांश बनाने, सामग्री तैयार करने और वित्तीय डेटा का विश्लेषण करने में मदद करते हैं। कंपनी के नेतृत्व का कहना है कि एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे नई भर्ती की रफ्तार धीमी हो सकती है और कुछ भूमिकाएँ धीरे‑धीरे कम हो सकती हैं, हालांकि अचानक बड़े पैमाने पर छंटनी जरूरी नहीं होगी ।
पूरे वॉल स्ट्रीट में एक समान पैटर्न दिखाई दे रहा है: दोहराए जाने वाले या जूनियर स्तर के काम कम होंगे, लेकिन इंजीनियरों, एआई विशेषज्ञों और मॉडल‑रिस्क विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।
एआई के फायदे स्पष्ट हैं, लेकिन वित्तीय नियामकों का कहना है कि जोखिम प्रबंधन उतनी तेजी से विकसित नहीं हो रहा जितनी तेजी से तकनीक अपनाई जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रूडेंशियल रेगुलेटर APRA ने चेतावनी दी है कि कई वित्तीय संस्थानों में एआई से जुड़े गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और आश्वासन प्रक्रियाएँ तकनीक की गति के साथ नहीं बढ़ रही हैं ।
ऑस्ट्रेलिया के सिक्योरिटीज़ रेगुलेटर ASIC ने भी पाया कि कुछ वित्तीय कंपनियों में एआई सिस्टम के प्रबंधन और उपभोक्ता जोखिमों की पहचान में संभावित कमियाँ हैं ।
वित्तीय क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कई एआई मॉडल—जैसे ऋण निर्णय, धोखाधड़ी पहचान या अनुपालन निगरानी—काफी जटिल मशीन‑लर्निंग सिस्टम होते हैं जिन्हें समझाना कठिन होता है।
नियामक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जब एआई सिस्टम ग्राहकों से जुड़े फैसलों को प्रभावित करें, तो इंसानी निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही बनी रहनी चाहिए ।
एआई सिस्टम नए तकनीकी जोखिम भी ला सकते हैं। नियामकों का कहना है कि जब बैंक एआई को महत्वपूर्ण सिस्टम में जोड़ते हैं, तो साइबर हमलों की संभावना और बाहरी क्लाउड या तकनीकी प्रदाताओं पर निर्भरता बढ़ सकती है ।
इस वजह से “ऑपरेशनल रेज़िलिएंस”—यानी संकट के समय भी बैंकिंग सेवाएँ चालू रखने की क्षमता—अब एक प्रमुख नियामकीय प्राथमिकता बन गई है।
यूके में वित्तीय आचरण प्राधिकरण (FCA) और अन्य नियामक यह स्पष्ट कर चुके हैं कि एआई से जुड़े जोखिमों की अंतिम जिम्मेदारी बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन की ही होगी, चाहे सिस्टम कितना भी स्वचालित क्यों न हो ।
इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो बैंकिंग उद्योग एक बड़े संक्रमण से गुजर रहा है।
एआई धीरे‑धीरे पूरे उद्योग में एक ऑपरेशनल परत की तरह काम करने लगा है, जो उन कार्यों को संभाल रहा है जिनके लिए पहले बड़ी संख्या में विश्लेषकों, ऑपरेशंस कर्मचारियों और सपोर्ट स्टाफ की जरूरत होती थी।
इसका मतलब यह नहीं कि मानव नौकरियाँ पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। लेकिन यह निश्चित है कि बैंक अब अलग तरह के कौशल तलाश रहे हैं—जैसे एआई निगरानी, सिस्टम डिजाइन, साइबर सुरक्षा और ग्राहक संबंध प्रबंधन।
यही कारण है कि बैंक एआई को उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने का साधन मानते हैं, जबकि नियामक इसे ऐसी शक्तिशाली तकनीक मानते हैं जिसे सावधानी से नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
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