Accenture के अनुसार यह "AI फ्लुएंसी"—यानी AI टूल्स को समझना और प्रयोग करना—टीमों के लिए एक बड़ा फायदा बन सकता है। ऐसे कर्मचारी नई तकनीकों को अपनाने में तेजी लाते हैं और AI‑आधारित वर्कफ्लो में जल्दी ढल जाते हैं।
कंपनी ने इस दिशा में आंतरिक बदलाव भी किए हैं। अब AI टूल्स का उपयोग और सीखना कर्मचारियों के प्रदर्शन और करियर प्रगति का हिस्सा बनता जा रहा है। कई मामलों में पदोन्नति के लिए भी AI के साथ काम करने की क्षमता जरूरी मानी जा रही है।
Accenture की रणनीति यह नहीं है कि जूनियर भूमिकाएँ खत्म कर दी जाएँ, बल्कि उन्हें फिर से डिज़ाइन किया जाए। नियमित और दोहराए जाने वाले काम धीरे‑धीरे ऑटोमेशन को सौंपे जा रहे हैं, जबकि नए कर्मचारी समस्या‑समाधान, क्लाइंट कम्युनिकेशन और AI‑सहायता प्राप्त प्रक्रियाओं की निगरानी जैसे कामों पर ज्यादा ध्यान देंगे।
Accenture का मानना है कि नई पीढ़ी के ग्रेजुएट्स के पास एक खास फायदा है—उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही AI टूल्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
पिछले कुछ वर्षों में ChatGPT जैसे जेनरेटिव AI टूल्स शिक्षा और रिसर्च में आम हो गए हैं। इसलिए कई छात्र कॉलेज से निकलते समय AI का उपयोग रिसर्च, कोडिंग, लेखन या डेटा विश्लेषण में कर चुके होते हैं।
कंपनी के नेताओं के मुताबिक यही अनुभव उन्हें कार्यस्थल में जल्दी प्रभावी बनाता है। कई मामलों में नए कर्मचारी सिर्फ सहायक भूमिका नहीं निभाते, बल्कि टीम के भीतर AI अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने वाले बन जाते हैं।
दूसरी ओर PwC—जो दुनिया की "Big Four" अकाउंटिंग और कंसल्टिंग फर्मों में से एक है—AI के प्रभाव को अलग तरीके से देख रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार कंपनी अगले तीन वर्षों में अमेरिका में एंट्री‑लेवल भर्ती लगभग एक‑तिहाई कम करने की योजना बना रही है।
आंतरिक अनुमानों के मुताबिक टैक्स और एश्योरेंस डिवीजनों में भर्ती संख्या 2025 के वित्तीय वर्ष में 3,242 से घटकर 2028 तक लगभग 2,197 रह सकती है—यानी करीब 32% की गिरावट।
PwC ने इस बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं: तकनीकी बदलाव और कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की कम दर (low attrition), जिससे नए जूनियर कर्मचारियों की जरूरत कम हो जाती है।
इसके अलावा कई ऐसे काम, जो पहले एंट्री‑लेवल कर्मचारियों के प्रशिक्षण का हिस्सा होते थे—जैसे दस्तावेज़ समीक्षा, डेटा मिलान या बेसिक विश्लेषण—अब सॉफ्टवेयर और AI सिस्टम द्वारा किए जा रहे हैं।
Accenture और PwC के बीच यह अंतर पूरे उद्योग में चल रही बहस को दर्शाता है। अभी दो प्रमुख दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं:
• ऑटोमेशन जूनियर नौकरियाँ कम करेगा। कुछ कंपनियों का मानना है कि AI उन कई नियमित कार्यों को संभाल लेगा जो पहले बड़ी संख्या में नए ग्रेजुएट्स करते थे। इसलिए एंट्री‑लेवल भर्ती घट सकती है।
• AI जूनियर कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाएगा। दूसरी सोच यह है कि AI के साथ काम करना जानने वाले कर्मचारी पहले से ज्यादा मूल्यवान हो जाएंगे।
Accenture दूसरी सोच पर दांव लगा रहा है, जबकि PwC की रणनीति पहली धारणा के ज्यादा करीब दिखाई देती है।
भले ही कंपनियों की रणनीति अलग हो, लेकिन एक बात लगभग तय लगती है—एंट्री‑लेवल नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है।
वे भूमिकाएँ जिनमें सिर्फ दोहराए जाने वाले काम होते थे—जैसे बेसिक रिपोर्ट बनाना, डेटा एंट्री या साधारण विश्लेषण—ऑटोमेशन के कारण कम हो सकती हैं। लेकिन वे ग्रेजुएट्स जिनके पास विषय‑ज्ञान, मजबूत संचार कौशल और AI टूल्स के साथ व्यावहारिक अनुभव है, उनके लिए अवसर बढ़ भी सकते हैं।
दूसरे शब्दों में, AI करियर की पहली सीढ़ी को पूरी तरह खत्म नहीं कर रहा। वह उसे छोटा, ज्यादा प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से अधिक उन्नत बना रहा है।
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