| अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ईंधन और सप्लाई-चेन जोखिम महंगाई को चिपचिपा रख सकते हैं और कटौती टाल सकते हैं |
| यूरोपीय सेंट्रल बैंक | अप्रैल में अन्य बड़े केंद्रीय बैंकों के साथ दरें अपरिवर्तित रखीं | ऊर्जा लागत बढ़ने पर यूरोपीय बाजारों ने संभावित दर बढ़ोतरी की संभावना ज्यादा माननी शुरू की |
| बैंक ऑफ इंग्लैंड | अप्रैल में दरें नहीं बदलीं | महंगे ऊर्जा आयात ने स्टैगफ्लेशन यानी कमजोर वृद्धि के साथ ऊंची महंगाई की चिंता फिर बढ़ा दी |
| बैंक ऑफ कनाडा | नीति दर 2.25% पर लगातार चौथी बार स्थिर रखी | अधिकारियों ने कहा कि ईरान युद्ध और अमेरिकी टैरिफ से अनिश्चितता ऐसी है कि दर अगली बार ऊपर या नीचे — दोनों तरफ जा सकती है |
| बैंक ऑफ कोरिया | अप्रैल में दर 2.5% पर रखी; यह सातवां लगातार ठहराव था | अप्रैल में महंगाई 21 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची और BOK के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि कटौती रोककर बढ़ोतरी पर विचार करने का समय है |
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की निकट अवधि की रणनीति है — धैर्य। अप्रैल के अंत में उसने फेडरल फंड्स रेंज 3.50%–3.75% पर बरकरार रखी; रिपोर्टिंग में ऊंची महंगाई और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि को इस ठहराव की वजह बताया गया । रॉयटर्स रिपोर्टिंग के मुताबिक, फेड अधिकारियों ने यह भी चेताया कि ईरान संघर्ष महंगाई बढ़ा सकता है और ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है, खासकर तब जब ईंधन लागत का दबाव सप्लाई-चेन में फैलने लगे
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यहीं असली फर्क है। पेट्रोल की कीमत में एक बार की तेजी कुछ महीनों के लिए हेडलाइन महंगाई बढ़ा सकती है। लेकिन अगर ऊर्जा महंगी बनी रहती है, तो उसका असर माल ढुलाई, हवाई यात्रा, उत्पादन लागत और महंगाई उम्मीदों के जरिए मुख्य कीमतों तक पहुंच सकता है। डैलस फेड ने दोनों चैनल बताए: गैसोलीन का सीधा असर और यह जोखिम कि घरों की महंगाई उम्मीदें शुरुआती झटके को और बड़ा बना दें ।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए समस्या सिर्फ महंगाई नहीं है। चुनौती यह है कि ऊर्जा कीमतें ऊपर जा रही हैं और वृद्धि की रफ्तार कमजोर पड़ने का डर भी बढ़ रहा है। अप्रैल के आखिर की नीतिगत बैठकों से पहले रिपोर्टिंग में कहा गया कि फेड, ECB और BoE ऊर्जा कीमतों की तेजी और मंदी की चिंता के बीच दरें स्थिर रखने के रुख में रह सकते हैं ।
बाजारों ने संकेत जल्दी पकड़ लिया। अमेरिकी रेडियो आउटलेट्स द्वारा प्रकाशित रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, मनी मार्केट्स ने साल के अंत से पहले ECB, स्विस नेशनल बैंक और स्वीडन के रिक्सबैंक द्वारा दर बढ़ाने की संभावना पर दांव बढ़ाए; बैंक ऑफ इंग्लैंड को बाद में इसी कतार में देखा गया । इकोनॉमिक टाइम्स ने रोबेको के हवाले से अलग से लिखा कि कच्चे तेल की बाधा कुछ केंद्रीय बैंकों को राहत यानी ईजिंग टालने पर मजबूर कर रही है, जबकि कुछ जगह ऐसी बढ़ोतरी पर विचार हो रहा है जिसकी पहले उम्मीद नहीं थी; रोबेको के एक परिदृश्य में, अगर ब्रेंट क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर टिका रहता है, तो ECB जून और सितंबर में 25 आधार अंक यानी 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी कर सकता है
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ब्रिटेन की कहानी थोड़ी अलग है। वहां निकट अवधि में दर बढ़ोतरी की तस्वीर उतनी साफ नहीं है, लेकिन बैंक ऑफ इंग्लैंड को सावधान जरूर होना पड़ रहा है। ऊर्जा झटका महंगाई बढ़ा सकता है और साथ ही मांग को कमजोर कर सकता है — यही क्लासिक स्टैगफ्लेशन जोखिम है, जिसका जिक्र युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक केंद्रीय बैंकों पर रिपोर्टिंग में किया गया । ऐसे माहौल में बहुत जल्दी कटौती करना महंगाई पर केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि बहुत ज्यादा सख्ती मंदी के खतरे को बढ़ा सकती है।
कनाडा दिखाता है कि यह सिर्फ महंगाई की सीधी कहानी नहीं है। बैंक ऑफ कनाडा ने अप्रैल के आखिर में अपनी बेंचमार्क दर 2.25% पर लगातार चौथी बार स्थिर रखी और अधिकारियों ने चेताया कि ईरान युद्ध तथा अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता आने वाले महीनों में नीति दर को ऊपर या नीचे — दोनों दिशाओं में धकेल सकती है ।
बैंक ऑफ कनाडा की भाषा आक्रामक से ज्यादा सतर्क थी। मार्च में उसने कहा कि ईरान युद्ध ने अनिश्चितता की नई परत जोड़ दी है, तेल कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं और इससे अल्पावधि में महंगाई ऊपर जाएगी । साथ ही उसने केंद्रीय बैंकों की बड़ी दुविधा भी बताई: जब आर्थिक कमजोरी और बढ़ती महंगाई साथ आती हैं, तो नीति-निर्माताओं के पास आसान रास्ता नहीं बचता
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स्कोटियाबैंक के ग्लोबल आउटलुक ने भी यही शर्तों वाला रुख दिखाया। उसके आधारभूत अनुमान में माना गया कि तनाव साल के मध्य के आसपास कम होगा, तेल तीसरी तिमाही तक ऊंचा रहेगा और फिर धीरे-धीरे घटेगा; उसने तेल को अनिश्चितता का मुख्य स्रोत बताया और कहा कि महंगाई जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं । ऐसे परिदृश्य में बैंक ऑफ कनाडा होल्ड पर रहकर झटका गुजरने का इंतजार कर सकता है। लेकिन अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो कटौती की दलील कमजोर पड़ जाएगी।
दक्षिण कोरिया पर दबाव ज्यादा तीखा है, क्योंकि तेल झटका मुद्रा कमजोरी के साथ जुड़ गया है। बैंक ऑफ कोरिया ने अप्रैल में अपनी बेंचमार्क दर 2.5% पर बरकरार रखी; यह सातवां लगातार ठहराव था। रिपोर्टिंग के मुताबिक, ऊंची तेल लागत के कारण उपभोक्ता कीमतें 2% से ऊपर चल रही थीं और वॉन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1,520 के दायरे तक कमजोर हुआ, जिससे कटौती या बढ़ोतरी — दोनों के लिए जगह सीमित रही । कोरियाई रिपोर्टिंग ने तेल कीमतों और वॉन-डॉलर विनिमय दर की एक साथ बढ़ोतरी को दोहरा झटका बताया, क्योंकि कमजोर वॉन आयातित ऊर्जा को स्थानीय मुद्रा में और महंगा बना सकता है और उपभोक्ता कीमतों पर व्यापक असर डाल सकता है
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इसके बाद आए आंकड़ों ने सावधानी की दलील और मजबूत कर दी। दक्षिण कोरिया की महंगाई अप्रैल में 21 महीने की सबसे तेज रफ्तार पर पहुंची; पेट्रोलियम कीमतों में उछाल ने परिवहन, यात्रा और घरेलू खर्चों तक असर फैलाया । रॉयटर्स रिपोर्टिंग के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें महीने-दर-महीना 7.9% बढ़ीं और अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए 13.5% चढ़े
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इसीलिए बैंक ऑफ कोरिया अपने कई बड़े समकक्षों की तुलना में स्पष्ट होल्ड-या-हाइक बहस के ज्यादा करीब है। डिप्टी गवर्नर यू सांग-डे ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती रोकने और दरें बढ़ाने पर विचार करने का समय है, और मई की मौद्रिक नीति बैठक में यह संकेत आ सकता है कि बढ़ोतरी संभव है । अर्थशास्त्रियों ने यह भी चेताया कि अगर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में लंबे व्यवधान के परिदृश्य में तेल करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो तीसरी तिमाही से BOK पर दर बढ़ाने का दबाव आ सकता है
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केंद्रीय बैंक कभी-कभी ऊर्जा कीमतों की तेज लेकिन अस्थायी उछाल को नजरअंदाज कर देते हैं। मुश्किल तब आती है जब झटका कई रास्तों से महंगाई में फैलने लगे। 2026 में ईरान युद्ध यही जोखिम एक साथ पैदा कर रहा है:
कटौती की वापसी केंद्रीय बैंकों के बयान से कम और तेल तथा महंगाई उम्मीदों से ज्यादा तय होगी। अगर संघर्ष शांत होता है, आपूर्ति मार्ग स्थिर होते हैं और ऊर्जा कीमतें नीचे आती हैं, तो टली हुई कटौती फिर संभव हो सकती है। स्कोटियाबैंक के आधारभूत अनुमान में तनाव साल के मध्य के आसपास घटने, तेल के तीसरी तिमाही तक ऊंचे रहने और फिर धीरे-धीरे कम होने की बात थी; उसी आउटलुक में सतर्क फेड का अनुमान लगाया गया, जिसमें इस साल एक कटौती और 2027 में एक कटौती के बाद दरें करीब 3.25% पर रुक सकती हैं ।
अगर झटका कायम रहता है, तो नीति नक्शा बदल जाएगा। यूरोप में ईजिंग से पलटकर बढ़ोतरी की ओर दबाव बढ़ सकता है, खासकर अगर बाजार ऊंची महंगाई को कीमतों में शामिल करते रहें । कनाडा डेटा-निर्भर ठहराव में फंसा रह सकता है, क्योंकि अधिकारी कह चुके हैं कि ईरान युद्ध, ऊर्जा कीमतों और टैरिफ के हिसाब से अगला कदम ऊपर या नीचे दोनों हो सकता है
। दक्षिण कोरिया इस समूह में सबसे ज्यादा संवेदनशील बना रहेगा, क्योंकि तेल महंगाई और कमजोर वॉन पहले ही कीमतों पर असर डाल रहे हैं और BOK अधिकारी खुले तौर पर बढ़ोतरी की संभावना पर बात कर चुके हैं
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निष्कर्ष साफ है: रेट कट का चक्र खत्म नहीं हुआ, लेकिन कटौती की दहलीज ऊंची हो गई है। जब तक केंद्रीय बैंकों को भरोसा नहीं होता कि ईरान युद्ध से आया तेल झटका अस्थायी रहेगा, तब तक उनके लिए सबसे सुरक्षित नीति है — पहले ठहरना, बाद में कटौती करना।
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