क्योंकि UK में चीन से आने वाले EV पर कुछ अन्य बाजारों की तुलना में कम व्यापारिक बाधाएं हैं, इसलिए कई कंपनियां इसे वैश्विक विस्तार के लिए एक "टेस्ट मार्केट" की तरह देख रही हैं।
2026 की सबसे बड़ी खबरों में से एक है चीनी कंपनी BYD का तेज़ उभार।
ताज़ा रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार 2026 में अब तक BYD UK में सबसे ज्यादा बिकने वाला EV ब्रांड बन चुका है, जिसने Tesla, Kia और Volkswagen जैसे स्थापित ब्रांडों को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी का UK EV बाजार में हिस्सा 7% से अधिक हो चुका है और अप्रैल तक 12,700 से अधिक इलेक्ट्रिक कारें बिक चुकी हैं।
इसके साथ ही बिक्री की रफ्तार भी तेज़ रही है। उदाहरण के लिए मार्च में BYD की UK रजिस्ट्रेशन साल‑दर‑साल लगभग 134% बढ़ी, जो उसी अवधि में Tesla की वृद्धि से कहीं अधिक थी।
वैश्विक स्तर पर भी BYD का विस्तार तेज़ है। कंपनी ने अप्रैल में ही 135,098 नई ऊर्जा वाहनों (NEV) का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70% अधिक है।
Tesla अभी भी EV उद्योग का बड़ा खिलाड़ी है, लेकिन चीनी कंपनियों की तेज़ वृद्धि और व्यापक मॉडल रेंज से प्रतिस्पर्धा का संतुलन बदलता दिखाई दे रहा है।
जहां ब्रिटेन का बाजार अपेक्षाकृत खुला है, वहीं कनाडा ने अधिक सावधानी भरा रास्ता चुना है।
जनवरी 2026 में कनाडा और चीन के बीच हुए समझौते के बाद कनाडा ने पहले लगाए गए चीनी EV पर 100% टैरिफ को हटाकर टैरिफ‑रेट कोटा प्रणाली लागू की।
इस व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
यह नीति 1 मार्च 2026 से लागू हुई, और शुरुआती छह महीनों में 24,500 आयात परमिट पहले आओ‑पहले पाओ के आधार पर जारी किए गए।
फिर भी इसका प्रभाव सीमित है, क्योंकि 49,000 वाहनों की सीमा कनाडा के कुल नए‑वाहन बाजार का लगभग 3% से भी कम है। इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर भी चीनी ब्रांड बाजार पर अचानक हावी नहीं हो सकते।
रिपोर्टों के अनुसार BYD, Chery और Geely जैसी कंपनियां कनाडा में स्टाफ भर्ती और डीलर नेटवर्क की तैयारी कर रही हैं, हालांकि शुरुआती 2026 तक वहां बिक्री शुरू नहीं हुई थी।
चीनी EV निर्यात में तेज़ वृद्धि वैश्विक ऑटो उद्योग में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत देती है।
यूरोप में ही 2025 के अंत तक लगभग हर दस में से एक नई कार चीनी ब्रांड की थी, जो तेज़ी से बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाता है।
इस बदलाव के पीछे कुछ बड़े कारण हैं:
1. सप्लाई चेन पर पकड़
बैटरी निर्माण और महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स में चीन की कंपनियों का मजबूत प्रभुत्व है, जिससे उत्पादन लागत कम और गति अधिक रहती है।
2. घरेलू प्रतिस्पर्धा का दबाव
चीन के अपने EV बाजार में तीव्र कीमत प्रतिस्पर्धा ने कंपनियों को विदेशों में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया है।
3. अलग‑अलग देशों की नीतियां
कुछ देश खुले बाजार की नीति रखते हैं, जबकि अन्य घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए टैरिफ या आयात कोटा लागू कर रहे हैं।
हालांकि 2026 में चीनी EV कंपनियों की गति तेज़ है, लेकिन भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा:
फिर भी मौजूदा संकेत स्पष्ट हैं: चीन अब सिर्फ दुनिया का EV निर्माण केंद्र नहीं रहा। उसकी ऑटो कंपनियां तेजी से वैश्विक ब्रांड बन रही हैं—और कुछ बाजारों में तो वे पहले से ही प्रतिस्पर्धा का संतुलन बदल रही हैं।
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