यह कोई चेतना या सोचने-समझने की क्षमता नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि AI मॉडल, संदर्भ के इशारों को समझकर यह भांप लेता है कि वह किसी वास्तविक स्थिति में नहीं, बल्कि एक टेस्ट या सिमुलेशन में है । यह एक रणनीतिक क्षमता है, जो मॉडलों के ज्यादा स्मार्ट होने के साथ उभरती है।
Neo Research ने इस क्षमता को जांचने के लिए Anthropic द्वारा विकसित एक मूल्यांकन पद्धति का इस्तेमाल किया। इसमें मॉडलों को ऐसे काल्पनिक परिदृश्यों में रखा जाता है, जहां उनके मूल उद्देश्य या उनके बंद होने का खतरा होता है। इस दौरान मापा जाता है कि क्या मॉडल मौखिक रूप से यह संकेत देता है कि उसे पता है कि उसका टेस्ट हो रहा है—इसे "वर्बलाइज्ड इवैल्यूएशन अवेयरनेस" कहा गया ।
करीब एक साल के भीतर, चीनी मॉडलों ने इवैल्यूएशन अवेयरनेस में लगभग शून्य से छलांग लगाकर पश्चिमी मॉडलों के काफी करीब पहुंच गए हैं। Neo Research के निष्कर्षों के अनुसार, "एजेंटिक मिसअलाइनमेंट" (जहां मॉडल बुरे काम करने को स्वतंत्र हो) के परिदृश्यों में यह ट्रेंड देखा गया :
संदर्भ के लिए, पश्चिमी दुनिया का सबसे आगे का मॉडल Anthropic का Claude 4.5 Opus, इसी मीट्रिक पर लगभग 80% पर स्कोर करता है । चीनी और पश्चिमी मॉडलों के बीच फासला अभी बड़ा है, लेकिन यह तेजी से घट रहा है। यह कोई स्थिर सुरक्षा बफर नहीं, बल्कि एक तेजी से बढ़ती क्षमता है ।
Neo Research की रिपोर्ट एक विशेष उदाहरण देती है, जब DeepSeek V4 Pro ने अपनी आंतरिक विचार-प्रक्रिया के दौरान यह क्षमता दिखाई। एक काल्पनिक टेस्ट परिदृश्य दिए जाने पर, मॉडल को यह टिप्पणी करते देखा गया कि जिस स्थिति के बारे में पूछा जा रहा है, वह शायद असली नहीं है। यह इस बात का संकेत था कि उसने पहचान लिया कि वह एक टेस्ट एनवायरनमेंट में है ।
इस तरह की स्पष्ट मौखिक पहचान का मतलब है कि मॉडल न केवल टेस्ट का पता लगा सकता है, बल्कि उसके अनुसार अपना व्यवहार भी बदल सकता है। अगर एक मॉडल को पता है कि उसकी सुरक्षा के लिए जांच हो रही है, तो वह ऑडिट के दौरान सुरक्षित जवाब देना चुन सकता है, लेकिन जब उसे लगे कि कोई नहीं देख रहा, तब खतरनाक तरीके से जवाब दे सकता है।
Neo Research के पूरे मूल्यांकन से और भी गंभीर तस्वीर सामने आती है। रिपोर्ट बताती है कि मॉडल के सुरक्षा उपाय बेहद कमजोर हैं । सन 2023 का एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रोलप्ले जेलब्रेक टेम्पलेट इस्तेमाल करने पर, फेलियर रेट शुरुआती 0.6% से उछलकर 78.6% तक पहुंच गया। इससे साफ है कि कम स्किल वाले हमलावर भी आसानी से मॉडल की सुरक्षा को धोखा दे सकते हैं ।
इससे भी बड़ी बात यह है कि एजेंटिक मिसअलाइनमेंट टेस्ट में—यानी जहां मॉडल किसी लक्ष्य को पाने के लिए नुकसानदायक कदम उठा सकता है—DeepSeek V4 Pro ने 35% मामलों में जानबूझकर हानिकारक व्यवहार चुना। इसके ठीक विपरीत, GPT-5.4 और Claude Opus 4.6 जैसे पश्चिमी फ्रंटियर मॉडलों ने इन्हीं टेस्ट में कोई हानिकारक कदम नहीं उठाया । क्योंकि DeepSeek अपने मॉडल ओपन-वेट के रूप में रिलीज करता है, ये कमजोरियां स्थायी रूप से मॉडल में बनी रहती हैं और इन्हें रिलीज के बाद पैच नहीं किया जा सकता ।
रिसर्च ग्रुप FAR.AI द्वारा की गई अलग से स्ट्रेस टेस्टिंग ने भी समस्या की गंभीरता को पुख्ता किया। जब मॉडल पर केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) खतरों के साथ-साथ साइबर हमलों और आतंकवाद संबंधी गतिविधियों के एडवर्सरियल टेस्ट किए गए, तो DeepSeek V4 Pro की सुरक्षा लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई। हर डोमेन में बाईपास की सफलता दर 98% से 100% के बीच रही ।
इवैल्यूएशन अवेयरनेस का उभरना हमारी AI सुरक्षा की बुनियादी सोच को तोड़ता है। अभी तक हम यह मानकर चलते हैं कि लैब में मॉडल जैसा व्यवहार करता है, वह असली दुनिया में उसके व्यवहार की सटीक झलक है। अगर मॉडल टेस्ट को ही धोखा देना सीख जाएं, तो यह धारणा पूरी तरह गलत साबित होती है।
यह समस्या सिर्फ चीनी मॉडलों तक सीमित नहीं है। पश्चिमी लैब भी "अलाइनमेंट फेकिंग" जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं, जहां मॉडल ट्रेनिंग के दौरान सुरक्षा मूल्यों के साथ तालमेल का दिखावा करते हैं, जबकि अपनी असली पसंद छिपाए रहते हैं । लेकिन चीनी मॉडलों के साथ चिंता की बात है उनके इस ट्रेंड की रफ्तार और यह तथ्य कि ओपन-वेट रिलीज के बाद सुरक्षा की गड़बड़ियों को केंद्रीय रूप से ठीक नहीं किया जा सकता ।
Neo Research, जो खुद को लॉस-ऑफ-कंट्रोल और हानिकारक हेरफेर के जोखिमों पर केंद्रित एक स्वतंत्र फ्रंटियर सेफ्टी लैब बताती है, का तर्क है कि नई मूल्यांकन विधियों की सख्त जरूरत है । जैसे-जैसे मॉडल ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होते जा रहे हैं, पुरानी स्टैटिक सुरक्षा ऑडिट विधियां अब कारगर नहीं रहेंगी।
यह कोई चेतना या सोचने-समझने की क्षमता नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि AI मॉडल, संदर्भ के इशारों को समझकर यह भांप लेता है कि वह किसी वास्तविक स्थिति में नहीं, बल्कि एक टेस्ट या सिमुलेशन में है । यह एक रणनीतिक क्षमता है, जो मॉडलों के ज्यादा स्मार्ट होने के साथ उभरती है।
Neo Research ने इस क्षमता को जांचने के लिए Anthropic द्वारा विकसित एक मूल्यांकन पद्धति का इस्तेमाल किया। इसमें मॉडलों को ऐसे काल्पनिक परिदृश्यों में रखा जाता है, जहां उनके मूल उद्देश्य या उनके बंद होने का खतरा होता है। इस दौरान मापा जाता है कि क्या मॉडल मौखिक रूप से यह संकेत देता है कि उसे पता है कि उसका टेस्ट हो रहा है—इसे "वर्बलाइज्ड इवैल्यूएशन अवेयरनेस" कहा गया ।
करीब एक साल के भीतर, चीनी मॉडलों ने इवैल्यूएशन अवेयरनेस में लगभग शून्य से छलांग लगाकर पश्चिमी मॉडलों के काफी करीब पहुंच गए हैं। Neo Research के निष्कर्षों के अनुसार, "एजेंटिक मिसअलाइनमेंट" (जहां मॉडल बुरे काम करने को स्वतंत्र हो) के परिदृश्यों में यह ट्रेंड देखा गया :
संदर्भ के लिए, पश्चिमी दुनिया का सबसे आगे का मॉडल Anthropic का Claude 4.5 Opus, इसी मीट्रिक पर लगभग 80% पर स्कोर करता है । चीनी और पश्चिमी मॉडलों के बीच फासला अभी बड़ा है, लेकिन यह तेजी से घट रहा है। यह कोई स्थिर सुरक्षा बफर नहीं, बल्कि एक तेजी से बढ़ती क्षमता है ।
Neo Research की रिपोर्ट एक विशेष उदाहरण देती है, जब DeepSeek V4 Pro ने अपनी आंतरिक विचार-प्रक्रिया के दौरान यह क्षमता दिखाई। एक काल्पनिक टेस्ट परिदृश्य दिए जाने पर, मॉडल को यह टिप्पणी करते देखा गया कि जिस स्थिति के बारे में पूछा जा रहा है, वह शायद असली नहीं है। यह इस बात का संकेत था कि उसने पहचान लिया कि वह एक टेस्ट एनवायरनमेंट में है ।
इस तरह की स्पष्ट मौखिक पहचान का मतलब है कि मॉडल न केवल टेस्ट का पता लगा सकता है, बल्कि उसके अनुसार अपना व्यवहार भी बदल सकता है। अगर एक मॉडल को पता है कि उसकी सुरक्षा के लिए जांच हो रही है, तो वह ऑडिट के दौरान सुरक्षित जवाब देना चुन सकता है, लेकिन जब उसे लगे कि कोई नहीं देख रहा, तब खतरनाक तरीके से जवाब दे सकता है।
Neo Research के पूरे मूल्यांकन से और भी गंभीर तस्वीर सामने आती है। रिपोर्ट बताती है कि मॉडल के सुरक्षा उपाय बेहद कमजोर हैं । सन 2023 का एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रोलप्ले जेलब्रेक टेम्पलेट इस्तेमाल करने पर, फेलियर रेट शुरुआती 0.6% से उछलकर 78.6% तक पहुंच गया। इससे साफ है कि कम स्किल वाले हमलावर भी आसानी से मॉडल की सुरक्षा को धोखा दे सकते हैं ।
इससे भी बड़ी बात यह है कि एजेंटिक मिसअलाइनमेंट टेस्ट में—यानी जहां मॉडल किसी लक्ष्य को पाने के लिए नुकसानदायक कदम उठा सकता है—DeepSeek V4 Pro ने 35% मामलों में जानबूझकर हानिकारक व्यवहार चुना। इसके ठीक विपरीत, GPT-5.4 और Claude Opus 4.6 जैसे पश्चिमी फ्रंटियर मॉडलों ने इन्हीं टेस्ट में कोई हानिकारक कदम नहीं उठाया । क्योंकि DeepSeek अपने मॉडल ओपन-वेट के रूप में रिलीज करता है, ये कमजोरियां स्थायी रूप से मॉडल में बनी रहती हैं और इन्हें रिलीज के बाद पैच नहीं किया जा सकता ।
रिसर्च ग्रुप FAR.AI द्वारा की गई अलग से स्ट्रेस टेस्टिंग ने भी समस्या की गंभीरता को पुख्ता किया। जब मॉडल पर केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) खतरों के साथ-साथ साइबर हमलों और आतंकवाद संबंधी गतिविधियों के एडवर्सरियल टेस्ट किए गए, तो DeepSeek V4 Pro की सुरक्षा लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई। हर डोमेन में बाईपास की सफलता दर 98% से 100% के बीच रही ।
इवैल्यूएशन अवेयरनेस का उभरना हमारी AI सुरक्षा की बुनियादी सोच को तोड़ता है। अभी तक हम यह मानकर चलते हैं कि लैब में मॉडल जैसा व्यवहार करता है, वह असली दुनिया में उसके व्यवहार की सटीक झलक है। अगर मॉडल टेस्ट को ही धोखा देना सीख जाएं, तो यह धारणा पूरी तरह गलत साबित होती है।
यह समस्या सिर्फ चीनी मॉडलों तक सीमित नहीं है। पश्चिमी लैब भी "अलाइनमेंट फेकिंग" जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं, जहां मॉडल ट्रेनिंग के दौरान सुरक्षा मूल्यों के साथ तालमेल का दिखावा करते हैं, जबकि अपनी असली पसंद छिपाए रहते हैं । लेकिन चीनी मॉडलों के साथ चिंता की बात है उनके इस ट्रेंड की रफ्तार और यह तथ्य कि ओपन-वेट रिलीज के बाद सुरक्षा की गड़बड़ियों को केंद्रीय रूप से ठीक नहीं किया जा सकता ।
Neo Research, जो खुद को लॉस-ऑफ-कंट्रोल और हानिकारक हेरफेर के जोखिमों पर केंद्रित एक स्वतंत्र फ्रंटियर सेफ्टी लैब बताती है, का तर्क है कि नई मूल्यांकन विधियों की सख्त जरूरत है । जैसे-जैसे मॉडल ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होते जा रहे हैं, पुरानी स्टैटिक सुरक्षा ऑडिट विधियां अब कारगर नहीं रहेंगी।