अमेरिका ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X और एलन मस्क की उस कानूनी लड़ाई में शामिल होने की अनुमति मांगी है, जिसमें वे यूरोपीय आयोग का 12 करोड़ यूरो (€120 मिलियन) का जुर्माना रद्द कराना चाहते हैं। अमेरिकी न्याय विभाग की आपत्ति है कि आयोग अमेरिकी कंपनियों पर अपने नियामकीय अधिकार का दायरा अनुचित तरीके से बढ़ा रहा है। आयोग के मुताबिक, जुर्माने की वजह X की सेवा में पारदर्शिता से जुड़ी तीन खामियां हैं। दोनों पक्षों के दावे अभी अदालत में विचाराधीन हैं।
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अमेरिका ने अदालत से क्या मांगा है?
न्याय विभाग ने 24 सितंबर 2026 को बताया कि अमेरिका ने यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट में चल रहे मुकदमों में पक्षकार के समर्थन में भाग लेने के लिए आवेदन दिया है। ये मामले X की कंपनियों और मस्क की ओर से आयोग के फैसले को रद्द कराने की मांग से जुड़े हैं। फरवरी की रिपोर्टिंग के अनुसार, संबंधित मुकदमे 16 फरवरी 2026 को दायर किए गए थे।
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यहां फर्क महत्वपूर्ण है: आवेदन देना, मुकदमे में शामिल होने की अनुमति मिल जाना नहीं है। उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि अदालत ने अमेरिका को भाग लेने की अनुमति दे दी है, उसकी दलीलें मान ली हैं या जुर्माना रद्द कर दिया है। फैसला EU की अदालत को करना है।
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आयोग ने X पर जुर्माना क्यों लगाया?
यूरोपीय आयोग ने 5 दिसंबर 2025 को डिजिटल सेवा अधिनियम—डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट या DSA—के तहत नियमों का पालन न करने पर अपना पहला फैसला सुनाते हुए X पर जुर्माना लगाया था। आयोग के निष्कर्ष तीन मुद्दों पर केंद्रित हैं:
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- पेड ब्लू चेकमार्क: आयोग के अनुसार, कोई व्यक्ति भुगतान करके चेकमार्क पा सकता था, जबकि X यह पर्याप्त रूप से सत्यापित नहीं करता था कि खाते के पीछे कौन है। इससे चेकमार्क का अर्थ भ्रामक हो सकता था।
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- विज्ञापनों का डेटाबेस: आयोग ने पाया कि X का विज्ञापन रिकॉर्ड इतना पारदर्शी नहीं था कि शोधकर्ता और अन्य लोग विज्ञापनों की प्रभावी जांच कर सकें।
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- शोधकर्ताओं की पहुंच: आयोग के मुताबिक, X ने DSA की शर्तों के अनुरूप शोधकर्ताओं को सार्वजनिक डेटा तक पहुंच नहीं दी।
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फैसले में नियमों का पालन करने की दिशा में कदम भी निर्धारित किए गए थे। फैसले के एक कानूनी विश्लेषण के अनुसार, चेकमार्क संबंधी खामी दूर करने के लिए 60 कार्यदिवस और विज्ञापन पारदर्शिता तथा शोधकर्ताओं की पहुंच पर कार्ययोजना देने के लिए 90 कार्यदिवस का समय रखा गया था। मार्च की रिपोर्टिंग के मुताबिक, मुकदमा जारी रहने के दौरान X को जुर्माना चुकाना था या भुगतान की वित्तीय गारंटी देनी थी। इन शर्तों से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि आयोग द्वारा बताई गई खामियां दूर हो चुकी हैं।
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वॉशिंगटन की दलील और आगे का सवाल
अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारी ब्रेट शुमेट का तर्क है कि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर अमेरिकी कंपनियों तक नियामकीय पहुंच बढ़ाने की अनुचित कोशिश की। यह अमेरिका का पक्ष है, EU के अधिकारों की सीमा पर अदालत का स्थापित निष्कर्ष नहीं। X के समर्थकों ने विवाद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जोड़ा है, लेकिन इस विशेष जुर्माने के लिए आयोग ने ऊपर दी गई तीन पारदर्शिता संबंधी वजहें बताई हैं।
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उपलब्ध स्रोत संबंधित मुकदमों की पुष्टि करते हैं, लेकिन प्रत्येक अदालत-दस्तावेज़ में लगाए गए सटीक आरोप—जैसे पक्षपात या प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि के दावे—स्थापित नहीं करते। यह भी स्थापित नहीं होता कि अमेरिकी संसद की किसी समिति के प्रकाशन के कारण अलग-अलग मुकदमे दायर हुए। अदालत में दाखिल दस्तावेज़ों के बिना इन्हें साबित अपीलीय आधार मानना जल्दबाज़ी होगी।
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अब अदालत के सामने दो अलग प्रश्न हैं: क्या अमेरिका को चल रहे मुकदमों में भाग लेने दिया जाए, और क्या आयोग का जुर्माना कानूनी रूप से टिकता है। पहले प्रश्न पर अमेरिका के पक्ष में फैसला भी अपने-आप जुर्माना रद्द नहीं करेगा। फिलहाल वॉशिंगटन ने X के पक्ष में अपनी बात रखने की जगह मांगी है; आयोग के फैसले का भविष्य EU की अदालत तय करेगी।
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