लिंकन इंस्टीट्यूट के अनुसार, अमेरिका में डेटा सेंटरों की संख्या 2018 से 2021 के बीच दोगुने से ज्यादा हुई और फिर एआई निवेश तेज होने के साथ दोबारा दोगुनी हो गई । उसी रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में अमेरिकी डेटा सेंटरों ने 176 टेरावॉट-घंटे यानी TWh बिजली खर्च की—लगभग आयरलैंड की राष्ट्रीय बिजली खपत के बराबर
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ब्रुकिंग्स के अनुसार, 2024 में वैश्विक डेटा सेंटर बिजली खपत में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 45% थी । ब्रुकिंग्स ने अमेरिकी ऊर्जा विभाग और लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि डेटा सेंटरों ने 2023 में अमेरिका की कुल बिजली का करीब 4.4% इस्तेमाल किया और 2028 तक यह हिस्सा 6.7%–12.0% तक पहुंच सकता है
। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA का अनुमान है कि 2030 तक अमेरिका में डेटा सेंटर बिजली खपत 2024 के स्तर से करीब 240 TWh बढ़ेगी, यानी लगभग 130% की वृद्धि होगी
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यही वजह है कि किसी नए डेटा सेंटर की स्थानीय मंजूरी को सिर्फ एक और औद्योगिक इमारत की तरह नहीं देखा जा सकता। यह बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन लाइनों, सबस्टेशन, कूलिंग वॉटर और जमीन उपयोग पर असर डालने वाला बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट हो सकता है ।
एआई के दौर के बड़े डेटा सेंटर अब सिर्फ वर्ग फुट में नहीं, मेगावॉट में भी समझे जाते हैं। कंज्यूमर रिपोर्ट्स ने एआई से प्रेरित हाइपरस्केल सुविधाओं की बढ़ती संख्या का जिक्र किया है, जिनमें से प्रत्येक कम से कम 50 MW बिजली इस्तेमाल करती है—लगभग एक छोटे शहर की मांग के बराबर । रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बिग टेक की एआई दौड़ अमेरिकी बिजली ग्रिड की सीमाओं से टकरा रही है, क्योंकि बिजली प्रणालियां हाइपरस्केल मांग की रफ्तार से कदम मिलाने में संघर्ष कर रही हैं
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स्थानीय समुदायों के लिए असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कंपनी बिजली खरीद सकती है या नहीं। सवाल यह भी है कि क्या नया उत्पादन, ट्रांसमिशन, सबस्टेशन या वितरण ढांचा चाहिए होगा; उसे बनने में कितना समय लगेगा; और उसका खर्च डेवलपर, बिजली कंपनी, उपभोक्ता, करदाता या इन सबके किसी मिश्रण पर आएगा ।
डेटा सेंटरों में सर्वर लगातार गर्मी पैदा करते हैं, इसलिए कूलिंग उनकी बुनियादी जरूरत है। यही जरूरत एआई विस्तार को स्थानीय जल-नीति का मुद्दा बना देती है। लिंकन इंस्टीट्यूट एआई डेटा सेंटर विस्तार को जमीन और पानी की समस्या के रूप में देखता है, जबकि कंज्यूमर रिपोर्ट्स ने पानी के इस्तेमाल को एआई डेटा सेंटरों से जुड़ी प्रमुख सार्वजनिक चिंताओं में शामिल किया है ।
इसलिए जल-समीक्षा केवल इस भरोसे पर नहीं टिकनी चाहिए कि पानी उपलब्ध है। स्थानीय अधिकारियों को सालाना और अधिकतम पानी की अनुमानित मांग, पानी का स्रोत, कूलिंग पद्धति, सूखे की स्थिति को लेकर मान्यताएं, अपशिष्ट जल प्रबंधन और पुन: उपयोग या संरक्षण से जुड़ी बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं मांगनी चाहिए ।
ज्यादा डेटा सेंटर होने का मतलब अपने-आप ज्यादा गंदी हवा नहीं है। जोखिम इस पर निर्भर करता है कि अतिरिक्त बिजली कैसे पैदा की जाती है, स्वच्छ संसाधन और ग्रिड ढांचा कितनी जल्दी जुड़ते हैं और सुविधा किस तरह के बैकअप सिस्टम इस्तेमाल करती है । रॉयटर्स ने एक उदाहरण में बताया कि एआई से बढ़ती बिजली मांग को सेंट लुईस को प्रभावित करने वाले स्वच्छ-वायु नियमों में ढील से जोड़ा गया; यह शहर पहले से वायु-गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जूझ रहा था
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इसलिए एयर परमिट और बैकअप पावर योजना को मामूली कागजी औपचारिकता नहीं माना जा सकता। समुदायों को पता होना चाहिए कि बैकअप जनरेशन किस तरह का होगा, वह कब चल सकता है, उस पर कौन-सी उत्सर्जन सीमाएं लागू होंगी और अतिरिक्त बिजली मांग स्थानीय या क्षेत्रीय प्रदूषण-नियंत्रण फैसलों को प्रभावित कर सकती है या नहीं ।
डेटा सेंटर कई बार बड़े कैंपस के रूप में आते हैं, जिनके साथ जमीन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और संबंधित बिजली ढांचा भी जुड़ जाता है। कंज्यूमर रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई से प्रेरित हाइपरस्केल साइटें हजारों एकड़ तक फैल सकती हैं, जबकि लिंकन इंस्टीट्यूट तेज डेटा सेंटर वृद्धि के जमीन पर असर को रेखांकित करता है ।
ज़ोनिंग यानी जमीन उपयोग की समीक्षा में कुल रकबा, आवासीय इलाकों या खेतों से दूरी, वर्षा जल निकासी, ट्रांसमिशन पहुंच और मौजूदा भूमि-उपयोग योजना से मेल जैसे सवाल शामिल होने चाहिए । जहां जरूरत हो, स्थानीय मंजूरी में साइट डिजाइन, निर्माण-कालीन असर और चालू संचालन से जुड़ी शर्तें भी लागू करने योग्य रूप में लिखी जानी चाहिए।
कंज्यूमर रिपोर्ट्स एआई डेटा सेंटरों को उपभोक्ता मुद्दा मानता है, क्योंकि बिजली मांग स्थानीय बिजली बिलों, पानी के उपयोग और अन्य असर से जुड़ सकती है । रॉयटर्स की ग्रिड रिपोर्टिंग इसी शासन-समस्या को बिजली व्यवस्था की तरफ से दिखाती है: मांग कई बार ग्रिड की तैयारी से तेज आ सकती है
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अगर कोई कंपनी निजी बिजली समझौते की बात करती है, तब भी सार्वजनिक सवाल खत्म नहीं होते। यदि परियोजना के लिए नए सबस्टेशन, ट्रांसमिशन लाइन, वितरण उन्नयन या अतिरिक्त बिजली संसाधन चाहिए, तो लागत वसूली और मांग के अनुमान बदलने पर जोखिम कौन उठाएगा—यह पहले से साफ होना चाहिए । अगर सार्वजनिक प्रोत्साहन या कर छूट पर विचार हो रहा है, तो मंजूरी से पहले शुल्क, क्लॉबैक और संचालन से जुड़े डेटा साझा करने की शर्तें सार्वजनिक की जानी चाहिए।
किसी बड़े एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले स्थानीय अधिकारियों को इन सवालों के सार्वजनिक जवाब मांगने चाहिए:
अमेरिका के एआई डेटा सेंटर बूम की छिपी लागत यह नहीं है कि कंप्यूटिंग का कोई मूल्य नहीं। असली समस्या यह है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ दूर-दूर तक फैल सकता है, जबकि बिजली, पानी, जमीन और स्थानीय ढांचे का बोझ उन समुदायों पर केंद्रित होता है जहां डेटा सेंटर बनते हैं ।
राष्ट्रीय अनुमान दिशा दिखाते हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं। असर प्रोजेक्ट के आकार, कूलिंग डिजाइन, पानी के स्रोत, ग्रिड की हालत, बैकअप सिस्टम और स्थानीय नियमों पर निर्भर करता है । इसलिए किसी भी बड़े डेटा सेंटर को मंजूरी देने से पहले बिजली, पानी, उत्सर्जन, जमीन, प्रोत्साहनों और लागत कौन देगा—इन सब पर परियोजना-विशेष, सार्वजनिक और जांचे जा सकने वाले आंकड़े जरूरी हैं।
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