CNBC के मुताबिक, सुनवाई अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के ओकलैंड में संघीय अदालत में हुई और इसकी अध्यक्षता फेडरल जज Yvonne Gonzalez Rogers ने की। ऑल्टमैन और OpenAI के अध्यक्ष Greg Brockman भी अदालत में मौजूद थे।
बुधवार को मस्क ने लगातार दूसरे दिन गवाही दी। BBC के अनुसार, OpenAI के वकील William Savitt की जिरह के दौरान मस्क का रुख आक्रामक रहा; उन्होंने कहा कि सवाल “सरल नहीं” हैं और जैसे उन्हें फंसाने के लिए बनाए गए हों।
Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने दूसरे दिन फिर आरोप लगाया कि ऑल्टमैन ने “एक चैरिटी चुरा ली” और कहा कि OpenAI को फंड करना उनकी “मूर्खता” थी। लेकिन अदालत की नाटकीय पंक्तियों से परे, मामला एक संस्थागत प्रश्न पर टिकता है: गैर-लाभकारी पहचान, संस्थापक वादे और बाद की व्यावसायिकता के बीच क्या ऐसा टकराव है जिसे कानून के स्तर पर परखा जा सके?
Business Insider के अनुसार, मामले के केंद्र में मस्क का यह आरोप है कि ऑल्टमैन और अन्य अधिकारियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि OpenAI गैर-लाभकारी रहेगी और निजी लाभ के बजाय सार्वजनिक हित में AI विकसित करेगी। मस्क का कहना है कि इसी आधार पर उन्होंने OpenAI को करीब 3.8 करोड़ डॉलर दान दिए।
यही रकम मुकदमे को निजी कड़वाहट से आगे ले जाती है। यह दान, भरोसे और संस्था के मिशन की विश्वसनीयता का प्रश्न बन जाता है। यदि कोई दानदाता यह साबित कर सके कि उसने ठोस गैर-लाभकारी वादों के आधार पर धन दिया, तो अदालत को यह देखना पड़ सकता है कि बाद के पुनर्गठन में वे वादे कितने प्रभावी बचे।
राहत की मांग भी इसी दिशा की ओर इशारा करती है। CNBC के मुताबिक, मस्क पहले व्यक्तिगत रूप से अधिकतम 134 अरब डॉलर की क्षतिपूर्ति चाहते थे, लेकिन अब वे “सभी अनुचित लाभ” OpenAI की चैरिटी को दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
NBC के अनुसार, दूसरे दिन अदालत में मस्क ने OpenAI के बारे में कहा, “They can’t have it both ways।” उनका आशय था कि OpenAI एक तरफ गैर-लाभकारी चैरिटी की मुफ्त फंडिंग और सकारात्मक छवि का लाभ नहीं ले सकती और दूसरी तरफ निजी हितधारकों को बड़े लाभ भी नहीं दे सकती।
यही वाक्य मस्क के मुकदमे का सार है। उनके अनुसार, गैर-लाभकारी पहचान सिर्फ ब्रांडिंग नहीं हो सकती। अगर किसी संस्था ने सार्वजनिक भलाई के मिशन के नाम पर पैसा, प्रतिभा और भरोसा जुटाया, तो बाद में अधिक व्यावसायिक ढांचे में जाते समय शुरुआती समर्थकों के सवाल उठाने का अधिकार हो सकता है।
NBC की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI ने अक्टूबर में कॉरपोरेट पुनर्गठन पूरा किया, जिसमें वह capped-profit यानी सीमित-लाभ मॉडल से अधिक पारंपरिक लाभकारी ढांचे की ओर गई।
इससे मस्क के आरोपों को मौजूदा संदर्भ मिलता है। विवाद सिर्फ 2015 की स्थापना-कहानी पर नहीं है; सवाल यह भी है कि OpenAI की आज की दिशा क्या अब भी शुरुआती गैर-लाभकारी और सार्वजनिक हित वाले वादों से प्रभावित होनी चाहिए।
हालांकि, सार्वजनिक रिपोर्टों से अभी यह नहीं दिखता कि अदालत ने मुख्य आरोपों पर अंतिम फैसला दे दिया है। फिलहाल सही पढ़ाई यही है: मस्क OpenAI के पुनर्गठन और शुरुआती वादों को एक ही कानूनी कहानी में जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि OpenAI मुकदमे को निराधार बता रही है।
ABC/AP के अनुसार, मस्क और ऑल्टमैन की आमने-सामने गवाहियां AI दौड़ के शुरुआती दौर की सोच और दोनों के रिश्ते के टूटने पर रोशनी डाल सकती हैं।
यही कारण है कि इस मुकदमे की सार्वजनिक अहमियत जीत-हार से बड़ी है। AI उद्योग में अक्सर “सुरक्षित AI”, “सार्वजनिक हित” और “मानवता के लाभ” जैसे बड़े दावे किए जाते हैं। जब ऐसे दावों से समर्थन मिलता है और बाद में कंपनी का व्यावसायिक मूल्य बहुत बढ़ जाता है, तो क्या वे शब्द सिर्फ नारे रह जाते हैं या उनका गवर्नेंस और कानूनी असर भी होता है? यही सवाल अब अदालत के सामने अधिक ठोस रूप में है।
फिलहाल यह कानूनी निष्कर्ष नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के दावों का दौर है। लेकिन मुकदमे ने AI गवर्नेंस का सबसे पेचीदा सवाल साफ कर दिया है: सार्वजनिक हित का मिशन किसी संस्था को शुरू करने में ताकत दे सकता है; जब वही संस्था बहुत बड़ी व्यावसायिक ताकत बन जाए, तो क्या वह मिशन अब भी गिना जाएगा?