उपलब्ध स्रोतों में फिलिपींस का Caliraya-Lumot Watershed सबसे साफ पूर्ण-प्रतिस्थापन उदाहरण है। ELTI के अनुसार, इस वाटरशेड में द्वितीयक वन आवरण 1980 से 1998 के बीच 69% से घटकर 7% रह गया था। इसी अवधि में नारियल बागानों और दूसरे भूमि उपयोगों का दबाव भी था ।
वन विशेषज्ञ Vincent B. Concio ने देशज प्रजातियों की जगह गैर-देशज प्रजातियाँ लगाए जाने की प्रवृत्ति के जवाब में रेनफॉरेस्टेशन को बढ़ावा दिया। इस दृष्टिकोण में तेज बढ़ने वाले बाहरी पेड़ों के बजाय देशज वृक्ष प्रजातियों पर जोर था । स्थानीय संगठनों और Haribon Foundation के सहयोग से समुदायों ने 50 हेक्टेयर क्षेत्र में देशज वृक्ष दोबारा लगाए
। बाद में एक विश्वविद्यालय ने इसी मॉडल को अपनाते हुए अपने परिसर में देशज प्रजातियों की पौधशाला स्थापित की, जिससे पौध तैयार करने की क्षमता बढ़ी
।
इस केस से व्यावहारिक सबक साफ है: देशज वृक्ष लगाने के लिए एक पूरी आपूर्ति-श्रृंखला चाहिए। प्रजाति सही चुन ली गई, लेकिन पर्याप्त पौधे उगाने, पहुंचाने, लगाने और संभालने की व्यवस्था नहीं बनी, तो परियोजना कमजोर पड़ सकती है। Caliraya-Lumot इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पारिस्थितिक लक्ष्य—देशज पेड़ों की वापसी—को सामुदायिक भागीदारी और पौधशाला क्षमता से जोड़ा गया ।
टेमरिस्क, जिसे साल्ट सीडर भी कहा जाता है, यूरेशिया से अमेरिका में 1800 के दशक में लाया गया गैर-देशज झाड़ी या पेड़ है। इसे पहले सजावटी पौधे के रूप में और बाद में शुष्क पश्चिमी क्षेत्रों में कटाव नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया गया । समय के साथ यह दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका के नदी-तटीय आवासों में बहाली और प्रबंधन का बड़ा मुद्दा बन गया
।
यह उदाहरण इसलिए उपयोगी है क्योंकि यहां मामला एक पेड़ हटाकर दूसरा लगा देने जितना सरल नहीं है। शोध ने Tamarix में कमी के बाद देशज प्रजातियों की रिकवरी का आकलन किया, जिसमें जैविक नियंत्रण और सक्रिय हटाने—दोनों स्थितियाँ शामिल थीं । यानी लक्ष्य सिर्फ टेमरिस्क के तनों की संख्या कम करना नहीं था, बल्कि यह देखना था कि देशज नदी-तटीय वनस्पति और उससे जुड़ी पारिस्थितिक भूमिकाएँ वापस आती हैं या नहीं
।
बहाली की योजना बनाते समय यही फर्क बहुत महत्वपूर्ण है। अगर परियोजना सिर्फ यह गिनती है कि कितने गैर-देशज पेड़ हटे, तो वह बड़ा सवाल छोड़ सकती है: क्या देशज वनस्पति सचमुच लौटी? मजबूत पैमाना यह है कि हटाने या कमी के बाद देशज प्रजातियों की रिकवरी मापी जाए ।
कई बार देशज वृक्ष लगाने का तर्क आवास बहाली से जुड़ा होता है। लेकिन तब देशज प्रजातियों का मिश्रण कोई सजावटी निर्णय नहीं रह जाता; वही तय कर सकता है कि पक्षी, कीट, छाया, घोंसले और खाद्य-संसाधन जैसी पारिस्थितिक भूमिकाएँ लौटेंगी या नहीं।
एक नदी-तटीय पक्षी रिकवरी अध्ययन में पाया गया कि कीस्टोन देशज पेड़ों की अनुपस्थिति आक्रामक पेड़ हटाने के बाद भी पक्षियों की रिकवरी को एक दशक तक रोक सकती है । इसका सीधा मतलब है कि अगर लक्ष्य वन्यजीवों की वापसी है, तो बहाली योजना में उन देशज वृक्षों की पहचान करनी होगी जो आवास की प्रमुख भूमिकाएँ निभाते हैं
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यह इस धारणा के खिलाफ भी चेतावनी है कि हर देशज पेड़ एक-दूसरे का विकल्प हो सकता है। कुछ जगहों पर असली सवाल यह नहीं होता कि लगाया गया पेड़ देशज है या नहीं, बल्कि यह होता है कि क्या वह उसी संरचना या आवास-कार्य को वापस ला रहा है जो पारिस्थितिक तंत्र से गायब हो चुका है ।
मैरीलैंड की Montgomery Parks एजेंसी गैर-देशज पेड़ों को हटाकर बदलने को स्वस्थ वृक्ष-छत्र, देशज प्रजातियों के समर्थन और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र की बेहतरी से जोड़ती है । यह उदाहरण इसलिए उपयोगी है क्योंकि यह दिखाता है कि देशज वृक्ष-प्रतिस्थापन केवल विशेषज्ञ बहाली परियोजनाओं तक सीमित नहीं; इसे सार्वजनिक भूमि और शहरी वृक्ष-छत्र प्रबंधन का हिस्सा भी बनाया जा सकता है।
हालांकि उपलब्ध स्रोत में क्षेत्रफल, लगाए गए पेड़ों की प्रजाति-सूची, पौधों की जीवित रहने की दर या पहले-बाद के विस्तृत पारिस्थितिक माप नहीं दिए गए हैं। इसलिए इसे मात्रात्मक बहाली-सफलता के प्रमाण की तरह नहीं पढ़ना चाहिए । इसकी अहमियत इस बात में है कि एक सार्वजनिक एजेंसी गैर-देशज पेड़ों के प्रतिस्थापन को वृक्ष-छत्र स्वास्थ्य और पारिस्थितिक देखभाल के रूप में प्रस्तुत कर रही है
।
गैर-देशज पेड़ केवल मौजूदा वृक्ष-छत्र को नहीं बदलते; वे भविष्य के जंगल की दिशा भी तय कर सकते हैं। अमेरिकी वन सेवा के हवाई वनों पर शोध में बताया गया कि गैर-देशज वृक्ष प्रजातियाँ बड़े पेड़ों के तनों का 30%, पौधों/नवयुवक पेड़ों के तनों का 65% और नन्हे पौधों के तनों का 67% थीं। एजेंसी के सारांश ने इस पैटर्न को संभावित वृक्ष-छत्र प्रतिस्थापन का संकेत बताया ।
व्यापक शोध भी गैर-देशज वृक्ष आक्रमण को जैव-विविधता की चिंता के रूप में देखने का आधार देता है। PNAS में प्रकाशित एक लेख ने गैर-देशज वृक्ष आक्रमणकारियों से जुड़ी देशज वृक्ष प्रजाति-समृद्धि में गिरावट की रिपोर्ट की, और उसके सारांश के अनुसार मॉडलिंग तथा गुण-आधारित साक्ष्य इस संबंध की कारणात्मक व्याख्या का समर्थन करते हैं ।
इन निष्कर्षों का मतलब यह नहीं है कि हर जगह हर गैर-देशज पेड़ हटाया ही जाना चाहिए। लेकिन वे यह जरूर कहते हैं कि प्रबंधकों को केवल आज का वृक्ष-छत्र नहीं देखना चाहिए; उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि अगर कुछ नहीं किया गया, तो अगली पीढ़ी का जंगल किन पेड़ों से बनेगा ।
इन उदाहरणों से एक उपयोगी क्रम निकलता है:
अगर आपको देशज वृक्षों से पूर्ण प्रतिस्थापन का मजबूत उदाहरण चाहिए, तो Caliraya-Lumot Watershed से शुरुआत करें। इसमें बहाली की स्पष्ट समस्या, रेनफॉरेस्टेशन जैसा नामित दृष्टिकोण, सामुदायिक रोपण, देशज प्रजातियों का प्रसार और 50 हेक्टेयर रोपण क्षेत्र—सभी शामिल हैं ।
अगर अमेरिकी आक्रामक वृक्ष प्रबंधन का उदाहरण चाहिए, तो दक्षिण-पश्चिमी नदी-तटीय क्षेत्रों में टेमरिस्क बहाली को लें और जोर इस बात पर रखें कि कमी या हटाने के बाद देशज प्रजातियाँ लौटती हैं या नहीं । सार्वजनिक क्षेत्र के वृक्ष-छत्र प्रबंधन के उदाहरण के लिए Montgomery Parks उपयोगी है, बशर्ते यह स्पष्ट रखा जाए कि उपलब्ध स्रोत विस्तृत परिणाम-आंकड़े नहीं देता
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आखिरकार सबक एक ही है: गैर-देशज पेड़ हट जाने से बहाली पूरी नहीं होती। काम तब पूरा माना जा सकता है जब देशज वृक्ष इतने मजबूत रूप से स्थापित हों कि वे वांछित वृक्ष-छत्र, पौध समुदाय और आवास-कार्य को फिर से बना सकें ।
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