लेकिन बैंक ने आंखें बंद करके आशावादी होने से सावधान किया है। जोखिम भी उतने ही बड़े हैं:
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष श्रम बाजार से जुड़ा है। विश्व बैंक के शोध से पता चलता है कि AI का श्रमिकों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह देश की आय पर निर्भर करता है :
इसका सीधा मतलब यह है: विकासशील देशों के लिए फिलहाल नौकरी जाने का जोखिम कम है, लेकिन उन्हें उत्पादकता के फायदे भी कम मिलेंगे। बैंक चेतावनी देता है कि इन देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा अभी बड़े पैमाने पर नौकरियां जाना नहीं है, बल्कि AI-संचालित इस बदलाव से पूरी तरह बाहर रह जाना है – जिससे वे अमीर देशों से और पिछड़ जाएंगे ।
कोई अस्पष्ट सलाह देने के बजाय, विश्व बैंक ने एक ठोस और संरचित ढांचा पेश किया है, जिसे '4-C' कहा गया है :
अन्य सिफारिशों में AI के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर शोध बढ़ाना, गरिमापूर्ण काम के लिए संस्थानों को मज़बूत करना (न्यूनतम मजदूरी प्रणाली, सामूहिक सौदेबाजी), और सामाजिक सुरक्षा जाल सुनिश्चित करना शामिल है ।
बैंक की मुख्य चेतावनी बेहद स्पष्ट है: AI एक सामान्य-उद्देश्य वाली तकनीक (General Purpose Technology) है, जिससे उम्मीद की जाती है कि यह वैश्विक उत्पादन, व्यापार और सेवाओं को उसी तरह नया रूप देगी जैसे बिजली या इंटरनेट ने दिया । अगर विकासशील देशों ने AI अपनाने की नींव अभी नहीं बनाई, तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा:
बैंक का केंद्रीय संदेश यही है कि निष्क्रियता की कीमत निवेश की कीमत से कहीं अधिक है। तकनीक के पूरी तरह परिपक्व होने का इंतज़ार करने से विकासशील अर्थव्यवस्थाएं ऐसी स्थिति में पहुंच जाएंगी, जहां से पकड़ बनाना आज की तुलना में कहीं अधिक कठिन – शायद असंभव होगा ।