गर्मी से राहत लोगों की सेहत और रोज़ी-रोटी की रक्षा कर सकती है। लेकिन अगर बढ़ती ज़रूरत मुख्यतः अधिक बिजली खर्च करने वाले उपकरणों से पूरी हुई, तो उत्सर्जन भी बढ़ सकता है—और वही जलवायु परिवर्तन तेज़ हो सकता है जो कूलिंग की ज़रूरत बढ़ा रहा है। सिंगापुर की सतत विकास एवं पर्यावरण मंत्री ग्रेस फू ने 17 सितंबर 2026 को पहली ग्लोबल कूलिंग प्लेज असेंबली में इसी दुविधा पर ज़ोर दिया। उनके मुताबिक, एशिया का तापमान वैश्विक औसत के मुकाबले लगभग दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है।
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सिंगापुर के लिए यह अभी की चुनौती क्यों है?
सिंगापुर के तीसरे राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अध्ययन के अनुसार, वहाँ दैनिक अधिकतम तापमान में 5.3°C तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अधिक तीव्र गर्मी वाले दिन और गर्म रातें भी बढ़ने की आशंका है।
20 इस जोखिम से निपटने के लिए फू ने तीन प्राथमिकताएँ बताईं: योजना, नीति और साझेदारी।
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योजना का मतलब है जलवायु विज्ञान और स्थानीय आँकड़ों के आधार पर जोखिम समझना और तैयारी करना। सिंगापुर ने गर्मी के प्रभावों के अनुकूलन पर शोध के लिए 4 करोड़ सिंगापुर डॉलर भी निर्धारित किए हैं। नीति के स्तर पर ज़ोर कूलिंग की ऊर्जा-दक्षता सुधारने पर है, ताकि अधिक लोगों को राहत देने के लिए बिजली की माँग उसी अनुपात में न बढ़े। साझेदारी का उद्देश्य सरकार, कारोबार और समुदायों को इन उपायों के अमल में साथ लाना है।
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राहत का मतलब सिर्फ़ एयर-कंडीशनर नहीं
जिन लोगों के पास गर्मी से बचने के कम साधन हैं, उनके लिए ऐसे विकल्प चाहिए जो व्यवहार में काम आएँ। असेंबली में किसानों जैसे जोखिम में रहने वाले समूहों के लिए कम बिजली इस्तेमाल करने वाले कूलिंग उपायों पर भी चर्चा हुई।
19 संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, छाया, हवा की आवाजाही और इन्सुलेशन जैसे उपाय मशीनों से कूलिंग की ज़रूरत घटा सकते हैं। जहाँ उपकरण आवश्यक हों, वहाँ बेहतर दक्षता मानक और जलवायु को गर्म करने वाले रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल घटाना उत्सर्जन सीमित करने के रास्ते हैं।
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2023 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP28 में शुरू हुआ ग्लोबल कूलिंग प्लेज इन दोनों लक्ष्यों को जोड़ता है: 2030 तक टिकाऊ कूलिंग की पहुँच में उल्लेखनीय बढ़ोतरी और 2050 तक कूलिंग से जुड़े उत्सर्जन में सामूहिक रूप से 68% कटौती। इसमें कूलिंग तकनीकों की दक्षता सुधारने का लक्ष्य भी है। ये आगे की कार्रवाई के लक्ष्य हैं, इस बात का प्रमाण नहीं कि पहुँच बढ़ चुकी है और उत्सर्जन घट चुका है।
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नई वैश्विक पहल और असली कसौटी
असेंबली में घोषित ग्लोबल हीट रेज़िलिएंस रोडमैप का उद्देश्य देशों को अत्यधिक गर्मी के दौरान लोगों की सुरक्षा और स्कूलों, अस्पतालों, कार्यस्थलों, खाद्य व जल प्रणालियों तथा ऊर्जा ढाँचे को चालू रखने में मदद करना है। टिकाऊ कूलिंग को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहयोग, साझेदारियों और उद्योग से जुड़े एक मंच की भी घोषणा हुई।
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सिंगापुर को टिकाऊ कूलिंग और गर्मी से निपटने के प्रयासों के लिए शुरुआती कूल लीडर्स देश पुरस्कारों में से एक मिला। यह उसके शोध, नीतिगत समन्वय और सामुदायिक प्रयासों को मिली मान्यता है। आगे की कसौटी यह होगी कि कूलिंग की माँग बढ़ने पर ये कदम अधिक लोगों की रक्षा कर पाएँ—बिना इस क्षेत्र का उत्सर्जन बढ़ाए।
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