सबसे सतर्क निष्कर्ष यह है कि जुलाई में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुए कथित हमलों का हर गोपनीय विवरण सार्वजनिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है। फिर भी रिपोर्टिंग यह संकेत देती है कि ईरान के भीतर किसी धड़े ने सामान्य राजनीतिक और सैन्य कमान-श्रृंखला से बाहर जाकर अमेरिका के साथ कूटनीतिक अवसर को खत्म करने की कोशिश की हो सकती है। तीन वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमलों के बाद अमेरिका ने त्वरित सैन्य और आर्थिक जवाबी कार्रवाई की, और ईरान की रणनीति तय करने को लेकर अंदरूनी संघर्ष और तेज हो गया।
1
2
3
क्या हुआ था?
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरानी शासन से जुड़े अंदरूनी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ समझौते के विरोधियों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने के लिए एक गुप्त अभियान का इस्तेमाल किया। निशाना बने जहाज़ों में कतर के स्वामित्व वाला एलएनजी—यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस—वाहक अल रेकय्यात भी शामिल था, जिस पर ओमान तट के पास के जलक्षेत्र में हमला होने की सूचना थी। उस समय तेल और गैस की समुद्री आपूर्ति अभी नाजुक ढंग से बहाल ही हो रही थी और तीन जहाज़ों पर हमलों ने इसे फिर संकट में डाल दिया।
1
2
बाहरी परिणाम तुरंत दिखा। अमेरिका ने कहा कि ईरान ने तीन वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमला किया, जिसके बाद उसने ईरानी ठिकानों पर हमले किए और ईरानी तेल बिक्री की अनुमति देने वाली छूट वापस ले ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, निशानों में वायु-रक्षा प्रणालियां, कमान एवं नियंत्रण नेटवर्क, तटीय रडार, जहाज़-रोधी क्षमताएं और आईआरजीसी की छोटी नौकाएं शामिल थीं।
3
ईरान ने जहाज़ों पर हुए इन हमलों की सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली।
4
नेतृत्व को कथित तौर पर कैसे दरकिनार किया गया?
पांच ईरानी अधिकारियों और आईआरजीसी के दो सदस्यों पर आधारित रिपोर्टिंग के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को हमलों की जानकारी उनके हो जाने के बाद मिली। बताया गया कि उन्होंने नाराज़ होकर आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी को फोन किया। वाहिदी ने कथित तौर पर कहा कि न तो उन्होंने अभियान को मंजूरी दी थी और न ही उन्हें पहले से इसकी जानकारी थी। इसी विवरण के मुताबिक, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और नेतृत्व के बड़े हिस्से को भी इसकी खबर नहीं थी।
19
24
यही कथित “बेलगाम अभियान” की कहानी का केंद्रीय बिंदु है। यह जहाज़ों को निशाना बनाने की तकनीकी प्रक्रिया का प्रमाणित विवरण नहीं है, बल्कि यह दावा है कि फैसला राष्ट्रपति, आईआरजीसी के औपचारिक प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से अलग रखकर लिया गया था।
उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह स्थापित नहीं होता कि कौन-से हथियार इस्तेमाल हुए, किस इकाई ने हमला किया, संचार की श्रृंखला क्या थी या हमलावरों ने पकड़े जाने से कैसे बचाव किया। वरिष्ठ अधिकारियों को अग्रिम सूचना न होने के दावे से इन विवरणों का अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए।
हुसैन ताएब का नाम केंद्र में क्यों आया?
टाइम्स की जांच पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सरकारी और सुरक्षा निकायों की पड़ताल ने तीन वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमले के फैसले को मौलवी और पूर्व खुफिया हस्ती हुसैन ताएब तक पहुंचाया। ताएब अमेरिका के साथ समझौते के विरोधी बताए जाते हैं।
26
33
बाद में ताएब को बसीज अर्धसैनिक बल का प्रमुख नियुक्त किया गया। अनेक रिपोर्टें इस नियुक्ति को उनकी प्रमुख सुरक्षा भूमिका में वापसी के रूप में पेश करती हैं, जबकि अहमद वाहिदी की आईआरजीसी कमांडर-इन-चीफ के रूप में औपचारिक पुष्टि हुई।
39
41
सिर्फ पदोन्नति से यह सिद्ध नहीं होता कि ताएब को दंडित करने के बजाय उन्हें क्यों पुरस्कृत किया गया। लेकिन यह उस व्यापक राजनीतिक संदर्भ से मेल खाता है जिसमें वॉशिंगटन के साथ समझौते के कट्टरपंथी विरोधी राजनीतिक दबाव, प्रदर्शन, मीडिया गतिविधियों तथा निजी और सार्वजनिक संदेशों के माध्यम से समझौते के विरुद्ध खुलकर लामबंद थे।
18 रिपोर्टिंग और विश्लेषण ताएब को मोजतबा खामेनेई के आसपास उभरते नेतृत्व-गुट के निकट भी बताते हैं, हालांकि उपलब्ध सामग्री से उनके प्रभाव की वास्तविक सीमा और निर्णय-प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से तय नहीं किया जा सकता।
34
37
ईरान के सत्ता-संघर्ष के बारे में यह क्या बताता है?
कथित हमले ने उन अधिकारियों के बीच विभाजन उजागर किया जो कूटनीति को ईरान पर दबाव घटाने का रास्ता मानते थे, और उन कट्टरपंथियों के बीच जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य तथा वॉशिंगटन से संबंधों पर किसी भी रियायत को अस्वीकार्य समझते थे।
18
31
इस अंदरूनी टकराव का असर तेहरान से कहीं आगे पड़ा। जहाज़ों पर हमलों ने तेल और गैस आपूर्ति को जोखिम में डाला। तनाव बढ़ने के साथ जलडमरूमध्य में आवाजाही तेजी से घटी: एक रिपोर्ट में जुलाई में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के फिर लागू होने के पहले पूरे दिन सिर्फ 13 जहाज़ों के पारगमन का उल्लेख है।
8 सितंबर तक टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि जुलाई और अगस्त में इस जलमार्ग में कम-से-कम 23 जहाज़ों को निशाना बनाया गया था।
6
क्या अब भी अनिश्चित है?
इस प्रकरण से जुड़े कई व्यापक दावे अब भी उपलब्ध साक्ष्यों से स्थापित नहीं होते। इनमें मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी, उनके नाम से जारी आदेशों की प्रामाणिकता, और क्षेत्रीय मिलिशियाओं, लाल सागर के ठिकानों या ऊर्जा अवसंरचना से जुड़ी कथित योजनाएं शामिल हैं।
सबसे स्पष्ट निष्कर्ष इससे सीमित है: रिपोर्टिंग के अनुसार, कूटनीति के खिलाफ एक अंदरूनी कट्टरपंथी चुनौती ने अमेरिका-ईरान की अस्थायी समझ को फिर सैन्य टकराव में बदलने में मदद की। समुद्री परिणाम वास्तविक और दर्ज किए गए हैं; लेकिन जिम्मेदारी की पूरी गुप्त श्रृंखला अब भी गुमनाम ईरानी अधिकारियों के बयानों पर आधारित है और उसे सार्वजनिक फॉरेंसिक साक्ष्यों के जरिए विस्तार से प्रदर्शित नहीं किया गया है।
1
2
19