Accel का नया फंड Fund IX मुख्य रूप से AI ऐप्लिकेशन, कंज्यूमर इंटरनेट, फिनटेक, सॉफ्टवेयर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करेगा । पार्टनर शेखर किरानी का कहना है कि फर्म AI ऐप्लिकेशन लेयर, फिनटेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत अवसर देख रही है, खासकर भारत में डीप-टेक उद्यमिता के बढ़ते चलन के कारण
। हालांकि मुख्य सेक्टर पिछले फंड की तरह ही (AI, फिनटेक, कंज्यूमर इंटरनेट) हैं, लेकिन AI ऐप्लिकेशन लेयर पर जोर काफी बढ़ गया है
।
Accel AI को एक क्षैतिज तकनीक (horizontal layer) के रूप में देखता है, जो हर उस सेक्टर में काम करेगी जिसमें वह निवेश करता है, न कि एक अलग श्रेणी के रूप में । कंपनी का मुख्य सिद्धांत (thesis) यह है:
| फर्म | भारत में हालिया गतिविधि | संदर्भ |
|---|---|---|
| Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India) | सक्रिय रूप से फंड जुटा रहा है और निवेश कर रहा है; सेकोइया से अलग होने के बाद भारत इसका मुख्य बाजार है | शुरुआती चरण के AI और SaaS डील्स के लिए Accel के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा |
| General Catalyst | भारत में उपस्थिति का विस्तार कर रहा है, जिसमें नेतृत्व की नियुक्तियां और साझेदारी शामिल हैं | 'ग्लोबल-लोकल' दृष्टिकोण; Accel की तुलना में कम भारत-समर्पित फंड |
| Lightspeed | हाल के वर्षों में भारत-समर्पित फंड जुटाए; AI और कंज्यूमर में सक्रिय | समान मल्टी-फंड ग्लोबल + इंडिया संरचना; तुलनीय डिप्लॉयमेंट गति |
Accel का दृष्टिकोण अपनी फंड जुटाने की गति और समय के लिए अलग है - पिछले फंड का आधा से अधिक हिस्सा बचा होने के बावजूद नया फंड बंद करना - जिससे आम तौर पर उसके साथी बचते हैं। यह संकेत देता है कि Accel पूंजी की जरूरत से प्रेरित नहीं, बल्कि भारत में AI चक्र पर एक जानबूझकर 'टाइमिंग बेट' लगा रहा है ।
Accel भारत में अपनी रणनीति को प्री-सीड से लेकर IPO तक संस्थापकों का समर्थन करने के रूप में वर्णित करता है । फर्म के भारत पोर्टफोलियो में Flipkart, Swiggy और Urban Company जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिनमें उसने शुरुआत में निवेश किया और कई राउंड्स में उनका समर्थन किया
। इसी $3.5 बिलियन फंड के तहत $1.35 बिलियन का ग्लोबल एक्सपेंशन फंड विशेष रूप से बड़े शुरुआती दौर के निवेश और तेजी से फॉलो-ऑन पूंजी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसे Accel AI स्टार्टअप्स के लिए महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि उन्हें स्केल करने के लिए पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है
। कंपनी का कहना है कि भारत के सबसे अच्छे संस्थापकों को एक ऐसे पार्टनर की जरूरत है जो पहला संस्थागत चेक लिख सके और प्री-IPO राउंड में भी उनके साथ खड़ा रहे
।